कभी मैं अंडरटेकर और जॉन सीना का बड़ा फ़ैन था, लगता था ये ही हैं असली हीरो: सतीश कुमार

इस खिलाड़ी ने खेल के दुनिया में तब कदम रखा जब उन्होंने आर्मी जॉइन की, इससे पहले सतीश ने इस बारे में कुछ नहीं सोचा था।

अपनी जिंदगी के शुरुआती सालों में भारतीय बॉक्सर सतीश कुमार (Satish Kumar) को इस खेल के बारे में कुछ नहीं पता था, जिसमें उन्होंने अब अपना करियर बनाया है। अपने बचपन के दिनों में अन्य बच्चों की तरह यह भी सुपरहेवीवेट वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट (WWE) के फ़ैन थे। हाल ही में उन्होंने इस रोमांचक कहानी को सभी के साथ साझा किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस एजेंसी (IANS) से बातचीत के दौरान सतीश कुमार ने बताया कि मैंने बॉक्सिंग के बारे में पहली बार साल 2008 में सुना। मैं अंडरटेकर (Undertaker) और जॉन सीना (John Cena) को जानता था लेकिन असली बॉक्सिंग के बारे में मुझे नहीं पता था।

भारतीय मुक्केबाज़ हमेशा से ही खेल की लिए रूचि रखते थे। वह क्रिकेट और हॉकी खेलते थे लेकिन कभी भी इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और वह अपनी वर्तमान स्थिति के लिए सेना को श्रेय देते हैं।

सतीश कुमार ने बताया कि “अगर मैं आर्मी में नहीं होता तो मुझे नहीं लगता मैं जहां हूं, वहां कभी पहुंच पाता। मैं एक ऐसी जगह से आता हूं, जहां जीवन के शुरुआती दौर में खुद के लिए बहुत सारे लक्ष्य निर्धारित नहीं किए जाते लेकिन सेना में शामिल होने के बाद मुझे नई दिशा मिली।”

सतीश कुमार सुपर हेविवेट श्रेणी में ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज़ हैं
सतीश कुमार सुपर हेविवेट श्रेणी में ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज़ हैंसतीश कुमार सुपर हेविवेट श्रेणी में ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज़ हैं

सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों से प्रेरित

सतीश कुमार ने अपनी राष्ट्रीय चैम्पियनशिप की शुरुआत में पदक जीतकर अपनी काबिलियत की झलक दिखा दी थी। वहीं जब उनसे दो सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर्स के बारे में पूछा गया तो उन्होंने विजेंदर सिंह (Vijender Singh) और विकास कृष्ण (Vikas Krishan) का नाम लिया।

ओलंपिक चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि विजेंदर सिंह और विकास कृष्ण मेरे पसंदीदा बॉक्सर्स है। “विजेंदर तकनीक पर जोर देते हैं जबकि विकास वैसे ही बॉक्सिंग कर सकता है, जैसा वह करना चाहता है। वह विरोधियों पर हावी हो सकता है और रिंग में निपुण है। ”

भारतीय मुक्केबाज ने मार्च में एशियाई मुक्केबाजी ओलंपिक क्वालीफायर में इतिहास रच दिया था। सतीश कुमार ओलंपिक के सुपर हैवीवेट श्रेणी में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले बॉक्सर बनें।

अपने करियर को शुरू करने के 8 साल बाद रियो ओलंपिक तक पहुंचना एक सम्मान की बात होती लेकिन लेकिन उनकी भौं (Eyebrow) पर एक कट लग गया था, जिसके कारण वह जगह बनाने से चूक गए थे।

इसके बाद उन्होंने टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने का लक्ष्य बनाया। अब वह चुनौतियों को पार करते हुए भारत के पहले सुपरहेवीवेट ओलंपिक पदक विजेता बनने की उम्मीद की कर रहे हैं।

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