अपनी मां और देश के लिए टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना चाहती हैं सिमरनजीत कौर

भारतीय बॉक्सर ना केवल अपने देश बल्कि अपनी मां के लिए भी मेडल जीतना चाहती हैं, जिन्होंने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया है।

पूर्व भारतीय रेसलर संग्राम सिंह (Sangram Singh) के साथ इंस्टाग्राम लाइव चैट के दौरान सिमरनजीत ने बताया कि “बचपन में मेरे परिवार की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी, हालात इतने खराब थे कि मेज पर खाना रखना मुश्किल हो जाता था। मैंने और मेरे तीन भाई-बहनों ने कठिनाइयों को दूर करने के लिए कड़ी मेहनत की, हमने वो सब किया जो हम कर सकते थे।”

भारतीय मुक्केबाज़ ने बताया कि “मुझे हमेशा से विश्वास था कि मैं अपने देश के लिए मेडल जीतकर अपने परिवार को और अच्छी लाइफ दे सकती हूं।” वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन चैंपियनशिप में पहले ही पदक जीतकर सिमरनजीत देश की शीर्ष महिला मुक्केबाजों में शुमार हैं, हालांकि ये सब जीतकर भी इस खिलाड़ी की भूख कम नहीं हुई है।

सिमरनजीत कौर ने आगे बताते हुए कहा कि “अब मेरे लिए ये जरूरी है कि मैं ओलंपिक पदक अपने नाम कर पाऊं। मैं पोडियम पर खड़ी हूं और पीछे जन-गण-मन बज रहा हो, अब यही मेरा सपना है।”

मां और देश के लिए जीतना है मेडल

पंजाब की ये बॉक्सर पहली बार ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। सिमरनजीत कौर उन 9 भारतीय बॉक्सर में शुमार हैं, जिन्होंने मार्च में अम्मान, जॉर्डन में हुए एशियन ओलंपिक बॉक्सिंग क्वालिफायर्स में ओलंपिक कोटा हासिल किया था।

इस खिलाड़ी ने मंगोलियन बॉक्सर नामुन मोनखोर को हराकर 60 किलोग्राम कैटेगिरी में ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया है।

भारतीय स्टार ने कहा “मैं अपने देश और अपनी मां के लिए जीतना चाहती हूं। मेरी मां (राजपाल कौर) मेरी पहली प्रेरणा है। इसके बाद मेरी बड़ी बहन अमनदीप कौर क्योंकि शुरुआत में उन्होंने ही मुझे बॉक्सिंग सिखाई थी और उन्हीं की बदौलत मैं बॉक्सिंग में आ पाई”

सिमरनजीत कौर और अमनदीप दोनों राष्ट्रीय लेवल की मुक्केबाज हैं और इसके पीछे उनकी मां का ही अहम योगदान है। इस बारे में उन्होंने कहा कि, ‘’लोग कहते थे कि लड़कियाँ है तो क्यों इन्हें बॉक्सिंग की अनुमति दे रहे हो। या तो इनको पढ़ाओं या इनकी शादी कर दो लेकिन मेरी मां चाहती थी कि हम खेल में अपना नाम कमाए।’’

सिमरनजीत कौर ने बताया कि “लोग बात करते हैं लेकिन अगर आपको अपनी मां का स्पोर्ट है तो आपको कोई परेशानी नहीं होगी।”

पंजाब की बॉक्सर्स के लिए नई प्रेरणा

जैसे कि उनकी मां ने उन्हें प्रेरणा दी, उसी प्रकार वह भी चाहती हैं कि वह पंजाब में महिला बॉक्सर्स को प्रेरित कर पाएं। पंजाब के लुधियाना जिले के अंतिम गाँव चकर से निकलकर सिमरनजीत कौर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली राज्य की पहली महिला मुक्केबाज़ हैं।

सिमरनजीत ने कहा कि “मैं चाहती हूं कि पंजाब से और बॉक्सर आगे आएं, खासकर लड़कियां। यहां पर प्रतिभा की कोई कमी नहीं है लेकिन किसी को ये नहीं पता कि वह अपनी प्रतिभा का फायदा कैसे उठाएं।”

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