विकास कृष्ण के परिवार के सदस्य बने उनके प्रतिद्वंदी, शतरंज के खेल में दे रहे शह और मात

इस मुक्केबाज़ के परिवार के सदस्य उन्हें शतरंज के खेल में कड़ी टक्कर दे रहे हैं और इसके अलावा वह उनको ट्रेनिंग में भी मदद कर रहे हैं।

देशभर में जारी लॉकडाउन ने अधिकांश एथलीटों को प्रभावित करने का काम किया है, लेकिन इसने भारतीय मुक्केबाज़ विकास कृष्ण (Vikas Krishan) के लिए काफी अधिक मुश्किलें खड़ी कर दी है। 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता को इस समय चाहे ट्रेनिंग हो या रिंग हो, कहीं भी प्रतिद्वंदिता करने का अवसर नहीं मिल रहा है। कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी ने उन्हें बिल्कुल अकेला कर दिया है। इसके अलावा एक दशक से भी अधिक समय से वह जिस दिनचर्या को फॉलो कर रहे थे, उसपर विराम सा लग गया है।

इसलिए इस भारतीय मुक्केबाज ने मौजूदा परिस्थितियों में कुछ अच्छा करने का फैसला किया और अपने परिवार के सदस्यों को ही किसी प्रतियोगिता के प्रतिद्वंदी के तौर पर मुक़ाबला करने के लिए तैयार कर लिया है। विकास कृष्ण ने हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए कहा, “मुझे शतरंज खेलना बहुत पसंद है, इसलिए मैंने अपने माता-पिता को लॉकडाउन के दौरान यह खेल खेलना सिखाया। मैंने सोचा कि क्यों न घर पर ही कुछ प्रतिद्वंदी तैयार कर लिए जाएं।”

ओलंपिक खेलों में तीसरी बार हिस्सा लेने के लिए विकास कृष्ण ने मार्च में टोक्यो ओलंपिक का टिकट हासिल किया। वह इस समय अपने तीनों बच्चों के साथ अपना अधिकांश समय बिता रहे हैं, उन्हें लूडो खेलना सिखा रहे हैं और भिवानी में उनके फार्महाउस में उनके साथ स्वीमिंग कर रहे हैं।

हालांकि, उनके पिता को दिन के सबसे जरूरी काम की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है – यह है विकास कृष्ण की बॉक्सिंग ट्रेनिंग। उन्होंने कहा, “मेरे पास एक स्किपिंग रोप (रस्सी कूदने वाली रस्सी), फोकस और पंचिंग पैड और डम्बल हैं। मेरे पिता मेरी मदद कर रहे हैं। मैंने उन्हें सिखाया है कि पंचिंग पैड्स को कैसे पकड़ें। अब वह मुझे ट्रेनिंग करने में मदद करते हैं।”

इस भारतीय मुक्केबाज ने 2018 में प्रो बॉक्सिंग में भी अपने कदम रखे, लेकिन ओलंपिक पदक की उम्मीद में उन्होंने एक बार फिर अमेच्योर बॉक्सिंग में वापसी की है।

कविंदर और सोनिया कैसे कर रहे घर पर ट्रेनिंग 

भारतीय मुक्केबाज़ सोनिया लाथर (Sonia Lather) और कविंदर बिष्ट (Kavinder Bisht) भी घर पर अपनी ट्रेनिंग को जारी रखने के लिए कुछ दिलचस्प तरीकों को अपना रहे हैं। वह नियमित उपकरणों के बजाय घरेलू सामान का उपयोग करते हुए ट्रेनिंग कर रहे हैं।

सोनिया लाथर ने इंडो-एशियन न्यूज सर्विस एजेंसी (IANS) को बताया, “मैं बांस की छड़ें और ईंटों का इस्तेमाल करती हूं और घर पर मैंने एक मिनी जिम बना लिया है। मैंने चिन-अप के लिए लोहे की रॉड के साथ डंडे का इस्तेमाल किया है और प्लेट और बांस के डंडे मुझे वेट ट्रेनिंग (वजन प्रशिक्षण) में मेरी मदद करते हैं।”

जबकि कविंदर बिष्ट फिट रहने के लिए सीढ़ियां चढ़ रहे हैं और स्किपिंग कर रहे हैं, उनका वेट ट्रेनिंग थोड़ा अलग है। उन्होंने कहा, “मैं उन रॉड का इस्तेमाल नहीं कर रहा हूं, जो वेट ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। घर पर बहुत से भारी सामान हैं, जो इसमें मेरी मदद कर रहे हैं।”

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