सॉफ़्टवेयर ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह ही मैंने ख़ुद को ओलंपिक गोल्ड के लिए अपग्रेड कर लिया है: विकास कृष्ण

भारतीय स्टार मुक्केबाज़ मानते हैं कि वह रियो 2016 से लेकर अब तक उन्होंने ख़ुद को काफ़ी बेहतर बना लिया है

भारतीय मुक्केबाज़ विकास कृष्ण (Vikas Krishan) को अपने ऊपर पूरा भरोसा है कि रियो 2016 के क्वार्टर फ़ाइनल सफ़र को वह टोक्यो ओलंपिक में पीछे छोड़ देंगे। इतना ही नहीं विकास की नज़र स्वर्ण पदक पर है और इसके लिए वह ख़ुद को तैयार मान रहे हैं।

WION वेबसाइट के साथ एक बातचीत में भारत के स्टार मुक्केबाज़ विकास कृष्ण ने कहा कि, ‘’विकास कृष्ण यादव का ये बिल्कुल ही अलग और बेहतर वर्ज़न है। जिस तरह से सॉफ़्टवेयर ऑपरेटिंग सिस्टम को अपग्रेड किया जाता है, ठीक वैसे ही मैंने पिछले कुछ सालों में ख़ुद को भी एक बेहतर मुक्केबाज़ और प्रतिस्पर्धी के तौर पर अपग्रेड कर लिया है।‘’

टोक्यो 2020 के लिए विकास कृष्ण ने अपना स्थान पहले ही पक्का कर लिया है, जब उन्होंने जॉर्डन के अम्मान में आयोजित एशियन बॉक्सिंग ओलंपिक क्वालिफ़ायर्स में रजत पदक जीता था।

हालांकि कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी की वजह से विकास कृष्ण की टोक्यो की तैयारियों पर ज़रूर असर पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद ये स्टार मुक्केबाज़ मानते हैं कि अगले साल टोक्यो में होने वाले ओलंपिक से पहले वह पूरी तरह तैयार रहेंगे।

उन्होंने भरोसे के साथ अपनी बात रखते हुए कहा, ‘’ओलंपिक क्वालिफ़ायर्स के दौरान मैं बेहतरीन फ़ॉर्म में था, और एक एथलीट के तौर पर वह मेरे करियर का सबसे शानदार दौर था। अब इस ब्रेक के बाद मेरी शारीरिक फ़िटनेस पर असर ज़रूर पड़ा है, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि एक बार नेशनल कैंप के शुरू होते ही मैं पुरानी वाली फ़िटनेस हासिल कर लूंगा। मेरे लिए सबसे शानदार बात ये है कि ओलंपिक का कोटा मैंने हासिल कर लिया है, और अभी भी मेरे पास तैयारी के लिए क़रीब 14 महीनों का समय बचा है।‘’

ओलंपिक गोल्ड - यही है विकास कृष्ण का मक़सद

विजेन्दर सिंह (Vijender Singh) के बाद भारत की ओर से तीसरे ओलंपिक में शिरकत करने वाले विकास कृष्ण सिर्फ़ दूसरे भारतीय मुक्केबाज़ होंगे। इस ऐतिहासिक क्षण को और भी यादगार बनाने के लिए विकास की नज़र स्वर्ण पदक पर ही टिकी है।

उन्होंने अपनी बातों को आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘’ये सिर्फ़ एक सपना नहीं है, मैं ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने के लिए जाऊंगा, और मुझे स्वर्ण से नीचे कुछ गंवारा नहीं है, इसे हासिल करने से मुझे कोई नहीं रोक सकता। अगर मैं ऐसा नहीं कर पाया तो इसका मलाल मुझे ज़िंदगी भर रहेगा और हमेशा सोचचा रह जाऊंगा कि मैं ये क्यों नहीं कर पाया। ओलंपिक की इस उपलब्धि के लिए मैं कोई कसर नहीं छोड़ने वाला।‘’

ओलंपिक इतिहास में आजतक 2008 बीजिंग ओलंपिक में विजेन्दर सिंह के द्वारा जीता गया कांस्य पदक किसी भी भारतीय पुरुष मुक्केबाज़ का इकलौता पदक है।

विकास कृष्ण मानते हैं कि जिस तरह से उन्होंने ओलंपिक के लिए तैयारी की है और साथ ही साथ प्रो बॉक्सिंग में खेलने के बाद उनका आत्मविश्वास ऐसा है कि वह उन्हें टोक्यो 2020 में चैंपियन बना सकता है।

अपनी बात को ख़त्म करते हुए विकास कृष्ण ने कहा, ‘’मेरे तमाम कोच और साथियों ने मेरे अंदर हुए बेहतरीन बदलाव को देखा है, और मुझे भी लगता है कि मैंने अपने खेल के स्तर को काफ़ी ऊंचा कर दिया है। मुक्केबाज़ी एक कला है, जिसमें आक्रामकता और रक्षात्मकता का बेजोड़ मिश्रण होता है, और मुझे लगता है कि हाल के दिनों में मैं इसमें निपुण हो गया हूं।‘’

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