वर्ल्ड नंबर-1 मुक्केबाज़ भारत के अमित पंघल की नज़र टोक्यो 2020 पर

2018 एशियन गेम्स से पहले हसनबाय दुस्मातोव को हराने में नाकाम रहे थे अमित पंघल।

52 किग्रा भारवर्ग में नंबर 1 बॉक्सर अमित पंघल (Amit Panghal) ने 2018 एशियन गेम्स (2018 Asian Games) के फाइनल को अपने करियर का सबसे अच्छा मुकाबला माना। गौरतलब है कि भारतीय बॉक्सर की भिडंत उज़्बेकिस्तान के हसनबाय दुस्मातोव (Hasanboy Dustmatov) से हुई थी।

अमित पंघल पहली सुर्ख़ियों में तब आए थे जब उन्होंने 2017 नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया और उसके बाद उन्होंने कभी पलटकर नहीं देखा। भारतीय बॉक्सर के आगे हमेशा से ही हसनबाय एक रोड़े की तरह आएं हैं और उन्होंने इस भारतीय खिलाड़ी को दो बार पस्त भी किया है।

पूर्व पहलवान संग्राम सिंह (Sangram Singh) के साथ इन्स्टाग्राम द्वारा की गई बातचीत में अमित ने कहा “उन्होंने मुझे दो बार मात दी थी और इस बार दोबारा वो मेरे खिलाफ खड़े थे। मुझे पता था कि अगर मुझे बेस्ट बनना है तो इन्हें हराना ज़रूरी है। मुझे याद है कि मैं अपने कोच को बोल रहा था कि अब लगता है कि मेरी सारी ट्रेनिंग इसी प्रतिद्वंदी को हराने के लिए थी।”

2016 ओलंपियन चैंपियन हसनबाय अपने जंप-एंड-पंच के लिए जाने जाते हैं और 2018 एशियन गेम्स में 49 किग्रा भारवर्ग में अव्वल प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन इस बार पूरी तैयारी के साथ उतरे अमित पंघल ने 3-2 से मुकाबला अपने हक में रखा और अपने मकसद में कामयाब हो गए।

बातचीत के दौरान भारतीय मुक्केबाज़ ने कहा “यह कड़ा मुकाबला था और मैं इनसे तीसरी बार नहीं हार सकता था। उस समय मैं अपना 100 प्रतिशत से भी ज़्यादा देने के लिए तैयार था।''

अब इन दोनों मुक्केबाज़ों के बीच का स्कोर 2-1 से हसनबाय दुस्मातोव के हक में ही था लेकिन अब बारी थी 2019 एशियन चैंपियनशिप के क्वार्टर-फाइनल की और दोनों के बस्ते में एक दूसरे को हराने की तकनीक और आँखों में जुनून था।

बातचीत के दौरान अमित ने कहा “एशियाड में हुई आख़िरी बाऊट के बाद मुक़ाबला बेहद कड़ा हो गया था, लेकिन इस बार में उसे पूरी तरह हराना चाहता था। मैंने उसी हिसाब से तैयारी की थी और मैंने मुकाबले 4-1 से जीत लिया।”

फ्लाईवेट केटेगरी में शोहरत हासिल कर इस हरियाणा के बॉक्सर को भारवर्ग बदलने की ज़रूरत थी क्योंकि 49 किग्रा को ओलंपिक गेम्स से निकाल दिया गया था। कहते हैं न कि परिश्रम से सब मुमकिन है इसी चीज़ का उदाहरण भारतीय बॉक्सर अमित पंघल हैं क्योंकि उन्होंने नए भारवर्ग में भी सफलता हासिल करना शुरू कर दिया था।

संग्राम सिंह के साथ बातचीत को आगे बढ़ाते हुए अमित ने कहा “49 किग्रा में मैंने कितनी भी मेहनत की हो, अपने प्रतिद्वंदियों को कैसे भी परखा हो लेकिन अब 52 किग्रा के आ जाने से वह अलग हो गया था। मुझे याद है मैंने कहा कि अभ्यास के लिए मुझे दो महीने चाहिए क्योंकि 52 किग्रा भारवर्ग में ज़्यादा सहन-शक्ति की ज़रूरत थी।”

इसके बाद अमित के कोच ने उन्हें 3 महीने की मोहलत दी लेकिन इस बॉक्सर ने खुद को 2 महीनों में तैयार कर गोल्ड मेडल जीत लिया था। इसके बाद अमित पंघल के पैर और पंच रुके नहीं और उन्होंने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप (World Boxing Championships) में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता और एशियन बॉक्सिंग ओलंपिक क्वालिफायर्स (Asian Boxing Olympic qualifiers) के ज़रिए उन्होंने पहली बार ओलंपिक गेम्स में अपना स्थान पुख्ता कर लिया है।

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