लॉकडाउन में भी ओलंपिक गोल्ड जीतने की तैयारी को पैना कर रहे हैं अमित पंघल

ओलंपिक पदक पर अपनी निगाहें जमाने वाले भारतीय मुक्केबाज़ टोक्यो खेलों में अपने सपने को पूरा करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।

वो उन बेहतरीन मुक्केबाज़ों में से हैं जिन्हें भारत ने हाल के दिनों तैयार होते हुए देखा है और उनका रिकॉर्ड इस दावे को सही साबित कर रहा है, लेकिन अमित पंघल (Amit Panghal) को पता है कि इन सब से अगले साल टोक्यो ओलंपिक के रिंग में उतरने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

इस साल की शुरुआत में एशियन ओलंपिक मुक्केबाज़ी क्वालिफ़ायर्स में अपनी शानदार मुक्केबाज़ी के दम पर ओलंपिक का टिकट हासिल करने वाले 24 वर्षीय इस भारतीय कोनिश्चित रूप से देश के लिए पदक जीतने वाले फेवरेट मुक्केबाज़ों में से एक माना जा रहा है। वो इसी उत्साह के साथ टोक्यो के फ्लाइट में सवार होंगे।

लेकिन अमित पंघल ने ये भी कहा कि ये सब कहना आसान है, करना मुश्किल है।

भारतीय मुक्केबाज़ ने हाल ही में ओलंपिक चैनल के साथ एक इंटरव्यू में बताया कि, "ये आसान नहीं होगा, इसकी गारंटी है। गोल्ड जीतना हर एथलीट का अपने जीवन भर का लक्ष्य होता है। मेरे लिए अलग नहीं है।”

“मेरा पहला लक्ष्य खेलों के लिए क्वालिफाई करना था। अब वो स्थान सुरक्षित हो गई है, मैं ये सुनिश्चित करना चाहता हूं कि मैं टोक्यो खेलों में अपना 100 प्रतिशत दूं और मौका मिलने पर कोई गलती न करूं।”

“हर बार खेलों के लिए जगह हासिल करना सबसे अच्छा होता है, और टोक्यो कोई अलग नहीं होगा। मेरा काम ये सुनिश्चित करना है कि मैं अपनी ट्रेनिंग पूरी करूं और फ़िटनेस के मामले में शीर्ष पर रहूं।"

कुछ समय से विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले हरियाणा के रोहतक के मुक्केबाज़ का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबलों का उतना महत्व नहीं रह गया है। लेकिन अब तक एक शानदार सफर तय करने वाले अमित पंघल ओलंपिक में अपने मुकाबले को लेकर काफी सतर्क हैं।

जब अमित पंघल से पूछा गया कि खेलों के हिसाब से कोई लिस्ट बना रहे हैं जिसमें आप अपने हिसाब से उन्हें हराने के लिए रणनीति बनाई हो तो उन्होंने कहा कि, “मैं कुछ समय के लिए सर्किट पर रहा हूं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि ये बहुत लंबा सफर है। मैंने अभी क्यूबा के मुक्केबाज़ों से मुकाबला नहीं किया है। ग्रेट ब्रिटेन के एक यफाई गलाल (Yafai Galal) मुक्केबाज़ काफी अच्छे हैं और उसी तरह उजबेकिस्तान के ज़ोइरोव शाखोवदिन (Zoirov Shakhobidin) है।”

"जैसे मैंने हमेशा किया है और ये वो चीज है जो मैं हमेशा याद रखता हूं और समय समय पर याद दिलाता रहता हूं, मैंने शायद कुछ पदक जीते हैं, लेकिन ये वो लोग हैं जिन्होंने मुझे हराया है। तो मैं उन्हीं के लिए प्लान कर रहा हूं।”

फ़िट रहने पर ध्यान दिया जा रहा है

हालाँकि अमित पंघल अपने घर में फंसे हुए हैं, भारत में COVID-19 के प्रसार पर रोक लगाने के लिए देशभर में लॉकडाउन जारी है, लेकिन उन्हें महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के इनडोर क्षेत्र के अंदर रहने की अनुमति दी गई है, जो उनके घर के पास ही है।

यहां भारतीय मुक्केबाज़ ने अपने शुरुआती कोच अनिल धनखड़ के साथ मिलकर अपने खेल पर काम जारी रखा है।

2019 विश्व चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता ने कहा कि, “कॉलेज अधिकारियों ने मुझे परिसर का उपयोग करने की अनुमति दे दी है। मेरे पास मेरे कोच (अनिल धनखड़) हैं, जो मुझे अभ्यास में मदद कर रहे हैं।”

“मैं अभी अपनी ताकत और धीरज पर काम कर रहा हूं। चूंकि मैं अभी मैदान पर नहीं जा सकता, इसलिए बाहर जाना भी प्रतिबंधित है। मैं इस समय को सबसे ज्यादा उपयोग करने की कोशिश करता हूं। रोजाना लगभग 30 मिनट तक दौड़ता हूं या दूसरे एक्सरसाइज पर फोकस करता हूं। मैं बाद में अपनी गति पर काम कर सकता हूं। जिसमें ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए। मेरी योजना है कि मैं इस समय का सर्वोत्तम तरीके से उपयोग कर सकूं।

“मेरा फोकस फिट रहने पर है। मैं ये सुनिश्चित करना चाहता हूं कि मैं लय में रहूं और रिंग में उतरने के लिए तैयार रहूं।”

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