वर्ल्ड नंबर-1 मुक्केबाज़ अमित पंघल से विजेंदर सिंह को ओलंपिक में है पदक की उम्मीद  

टोक्यो ओलंपिक में क्वालिफ़ाई करने वाले नौ मुक्केबाज़ों के साथ, भारत अपने सबसे बड़े मुक्केबाज़ी दल को इस बार जापान भेजेगा

अनुभवी भारतीय मुक्केबाज़ और ओलंपिक पदक विजेता विजेंदर सिंह (Vijender Singh) युवा मुक्केबाज़ अमित पंघल (Amit Panghal) से अगले साल टोक्यो ओलंपिक में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं। विजेंदर सिंह उनकी बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता से आश्वस्त हैं।

फ्लाईवेट श्रेणी (52 किलोग्राम) के भारतीय मुक्केबाज़ ने 2019 एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक और विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने के बाद शीर्ष मुक्केबाज़ी के रूप में एशियाई मुक्केबाज़ी क्वालिफ़ायर्स टूर्नामेंट में प्रवेश किया।

शीर्ष क्रम के इस मुक्केबाज़ ने क्वार्टर फ़ाइनल में फ़िलीपीन्स के कार्लो पालम (Carlo Paalam) को 4: 1 से हराकर अपने टोक्यो ओलंपिक बर्थ को सील कर लिया।

विजेंदर सिंह ने WION वेबसाइट से बात करते हुए कहा कि, "अमित पंघल एक विश्व स्तरीय मुक्केबाज़ हैं, वो अभी विश्व में नंबर 1 पर हैं और एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता भी हैं। इसलिए, ऐसा कोई कारण नहीं है कि वो ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकते।”

अमित पंघल ओलंपिक बर्थ को सील करने वाले एकमात्र भारतीय मुक्केबाज़ नहीं थे, उनके अलावा आठ अन्य भारतीय मुक्केबाज़ों ने भी टोक्यो के लिए अपनी टिकट बुक की थी। और इस तरह ओलंपिक के लिए भारतीय मुक्केबाज़ी का सबसे बड़ा दल तैयार हुआ।

2016 के ओलंपिक में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद विजेंदर सिंह इस बार भारत की संभावनाओं के बारे में आश्वस्त हैं।

2008 के कांस्य पदक विजेता ने कहा, "मुझे कहना चाहिए कि उनका हालिया प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है।"

विजेंदर सिंह ने कहा, "इससे पता चलता है कि भारतीय मुक्केबाज़ी कितनी आगे आगे है। मुझे विश्वास है कि हमारे मुक्केबाज़ देश को गौरवान्वित करने में सफल होंगे।"

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Team 🇮🇳 In Italy 🇮🇹

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मैरी कॉम से मिली प्रेरणा

क्वालिफ़ायर्स में धमाल मचाने वाले भारतीय मुक्केबाज़ों के मौजूदा दल के अलावा विजेंदर सिंह ने दो अन्य खिलाड़ियों की भी जमकर तारीफ की, जिन्होंने उनके साथ देश के लिए लंदन गेम्स में मुक्केबाज़ी की थी – वो हैं एमसी मैरी कॉम (MC Mary Kom) और विकास कृष्ण (Vikash Krishan)।

जहां 37 वर्षीय मैरी कॉम ने अपने आखिरी ओलंपिक के लिए जगह सील कर ली है, वहीं 28 वर्षीय विकास कृष्ण ने अपने पेशेवर मुक्केबाज़ी से ब्रेक लिया है, ताकि वो लगातार तीसरे गेम के लिए क्वालिफाई कर सकें।

विजेंदर सिंह ने कहा “ये मैरी के लिए ज्यादा कठिन है क्योंकि उनके अब चार बच्चे हैं। ये एक बहुत ही कठिन कार्य है, लेकिन वो इसका समाधान करने में सक्षम हैं, ”

उन्होंने कहा, 'वो सभी भारतीयों के लिए प्रेरणा हैं, जिनमें मैं भी शामिल हूं। उसका दृढ़ संकल्प दूसरों के लिए उदाहरण है, और वो हम सभी में विश्वास पैदा करती हैं।

“विकास एक बहुत अनुभवी बॉक्सर हैं। वो दो ओलंपिक खेल चुके हैं और अगले साल के खेलों में उनको इस अनुभव का फायदा मिलेगा।

लॉकडाउन की वजह से एथलीटों को मिली ज़रूरी ब्रेक

कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण ही शुरू में चीन के वुहान से जॉर्डन के अम्मान तक एशियाई मुक्केबाज़ी क्वालिफ़ायर्स को निर्धारित किया गया था। इस कोरोना की वजह से भारतीय मुक्केबाज़ अपने क्वालिफिकेशन अभियान से लौटने के बाद से अपने घरों में रह रहे हैं।

हालांकि, विजेंदर सिंह मानते हैं कि इस ब्रेक ने उन मुक्केबाज़ों के लिए एक राहत का काम किया जो अपनी ओलंपिक के टिकट के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे।

प्रोफेशनल मुक्केबाज़ ने कहा, "जब आप ओलंपिक जैसे किसी बड़े इवेंट के लिए ट्रेनिंग ले रहे होते हैं, तो एथलीटों को भी शांत होने और आराम की जरूरत होती है।"

“ये उनकी मानसिक भलाई के लिए आवश्यक है क्योंकि उन पर बहुत अधिक दबाव है। समय-समय पर एथलीटों को आराम करने, बाहर जाने और अन्य लोगों के साथ बातचीत करने की आवश्यकता होती है।

उन्होंने आगे कहा, "अगर एथलीट ट्रेनिंग के अलावा कुछ नहीं करते हैं, तो उन पर अधिक दबाव बनता है।"

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