मोहम्मद अली और सोनी लिस्टन को देख विकास कृष्ण बढ़ा रहे हैं अपनी स्किल

विकास कृष्ण ने दूसरे युवा मुक्केबाज़ों को सलाह दी कि उन्हें ऑनलाइन देखते हुए दिग्गज मुक्केबाज़ों से सीखना चाहिए।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

एशियन बॉक्सिंग ओलंपिक क्वालिफ़ायर्स के ज़रिए ओलंपिक गेम्स में जगह बनाने वाले भारतीय बॉक्सर विकास कृष्ण (Vikas Krishan) ने बताया कि कैसे उन्होंने मोहम्मद अली (Muhammad Ali) और सोनी लिस्टन (Sonny Liston) के मुकाबले देख अपने कौशल को मज़बूत किया है।

वर्ल्ड हेवीवेट चैंपियन मोहम्मद अली और सोनी लिस्टन ने 20वें दशक में मानो बॉक्सिंग रिंग और दर्शकों के दिलों पर राज किया है। इस दोनों खिलाड़ियों का आमना सामना आज तक दो बार 1964 और 1965 में हुआ था।

साल 2018 में विकास कृष्ण ने प्रोफेशनल मुक्केबाज़ी में भाग लिया और दो मुक़ाबलों में जीत भी हासिल की और अब वे इन दिग्गजों से सीख लेकर ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने पर नज़र गड़ाए हुए हैं।

विकास कृष्ण लगातार तीसरी बार ओलंपिक गेम्स में शिरकत करते दिखाई देंगे 

किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) के साथ एक ऑनलाइन बातचीत के दौरान इस भारतीय बॉक्सर ने बताया “मैं अली और लिस्टन के मुकाबले देखत़ा था। मैं इन दिग्गजों से सीखने की कोशिश कर रहा था। मैं मानसिक तौर पर और भी ज़्यादा मज़बूत हो रहा हूं। हम भी उन्हीं के जैसे करना चाहते हैं। अगर हमें सही सपोर्ट मिले तो हम न केवल ओलंपिक में अच्छा करेंगे बल्कि प्रोफेशनल सर्किट में भी चैंपियन बनेंगे।”

कोरोना वायरस (COVID-19) की वजह से विकास की ट्रेनिंग में बाधा तो ज़रूर आई है लेकिन वे अभी भी खुद को फिट रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले किरेन रिजिजू ने भी ज़ाहिर किया था कि संगठनों को ओलंपिक में क्वालिफाई कर चुके खिलाड़ियों के लिए कैंप लगाने की प्लानिंग करनी चाहिए।

अलग सोच रखना ज़रूरी

हालांकि विकास का अपने ट्रेनिंग के स्तर को और बढ़ाने का इरादा है और वे बेसिक ट्रेनिंग से आगे बढ़कर और ज़्यादा करना चाहते हैं। घर पर पंचिंग बैग न होने की वजह से दिक्कतें तो आईं लेकिन उनके पिता ने उनकी मदद कर इस पड़ाव को भी पार किया। ट्रेनिंग और अभ्यास के दौरान इस दिग्गज के पिता इनके पंचिंग पैड को पकड़ते हैं ताकि यह मुक्केबाज़ अभ्यास में कोई भी कसर न छोड़ सके।

 भारत का ये 28 वर्षीय मुक्केबाज़ जो कि एशियन गेम्स (Asian Games) और कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) में मेडल जीत चुका है वह चाहता है कि मुक्केबाज़ों की आने वाली पीढ़ी कुछ अलग सोच रखे।

फर्स्टपोस्ट से बातचीत के दौरान विकास ने कहा “हमारे साथ दिक्कत यह है कि हमारे अनुभवी बॉक्सर अपने कोच के बनाए हुए शेड्यूल पर ज़्यादा निर्भर करते हैं।” विकास कृष्ण चाहते हैं कि युवा बॉक्सर बाकी खिलाड़ियों को ऑनलाइन देख कर सीख ले सकते हैं और देखे कि उन्होंने कैसे खुद को बेहतर बनाया है।

विकास कृष्ण ने आगे बताया “मैं कहना चाहता हूं कि युवा बॉक्सर आँखें बंद करके न जीएं। अपनी खुद की बुद्धि का इस्तेमाल करें। उन्हें देखना चाहिए कि वर्ल्ड चैंपियंस क्या कर रहे है। इन दिनों तो सब कुछ ऑनलाइन मिल जाता है, तो क्यों न इस चीज़ का पूरा फायदा उठाया जाए।”