ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतना है तो पुरानी तकनीक में बदलाव ज़रूरी - विकास कृष्ण

भारतीय बॉक्सर ने बताया कि ओलंपिक क्वालिफ़ायर्स में उन्होंने डिफ़ेंस की नई तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसके बाद उन्हें अच्छी ख़ासी सफलता भी मिली।

भारत के बॉक्सिंग हीरो विकास कृष्ण (Vikas Krishan)प्रोफेशनल बॉक्सिंग की डिफेंसिव तकनीक का इस्तेमाल एमच्योर बॉक्सिंग में कर रहे हैं। भारतीय वेल्टरवेट बॉक्सिंग स्टार ने अपने पिछले एमच्योर बॉक्सिंग मैच में अच्छी डिफेंसिव तकनीक दिखाई थी, जहां उन्होंने काउंटर करने से पहले विरोधी के पंचो को गार्ड की मदद से रोक दिया।

उनकी तकनीक के कारण वह साल 2018 एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहे लेकिन ओलंपिक के लिए ये काफी नहीं था। अमेरिका में विकास द्वारा की गई प्रोफेशनल बॉक्सिंग की ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने महसूस किया कि वह इससे और बेहतर कर सकते हैं।

विकास कृष्णन ने फर्स्टपोस्ट से बातचीत के दौरान कहा कि “प्रो बॉक्सिंग के कारण मुझे यह समझने में आसानी हुई कि बॉक्सिंग की बेसिक परिभाषा क्या है। पहले मेरी अप्रोच (गार्ड को होल्ड कर ब्लॉक) करना ना केवल मेरे लिए बल्कि दर्शकों के लिए बोरिंग हो जाता था। अब मैं डिफेंस की कला दिखाना चाहता हूं।”

भारतीय बॉक्सर ने बताया कि “मैं दिखाना चाहता हूं कि गार्ड को होल्ड करते हुए पंच कैसे मारे जा सकते हैं। अगर मैं ऐसा करने में कामयाब रहा तो दर्शक कहेंगे कि हम यही तो देखना चाहते हैं”।

विकास कृष्ण का अब तक दूसरा एमच्योर  बॉक्सिंग सफर अच्छा रहा है। हरियाणा के भिवानी का ये बॉक्सर पिछले महीने जॉर्डन के अम्मान में खेली गई एशियन ओलंपिक बॉक्सिंग क्वालिफायर्स में गोल्ड जीतने के करीब पहुंच गए थे।

वहां आंख की चोट के कारण वह फाइनल बाउट में हिस्सा नहीं ले पाए थे लेकिन विकास कृष्ण ने सिल्वर मेडल जीत ओलंपिक का कोटा हासिल कर लिया।

तीन अलग अलग ओलंपिक गेम्स में क्वालिफ़ाई करने वाले विकास कृष्ण सिर्फ़ दूसरे भारतीय मुक्केबाज़ हैं।
तीन अलग अलग ओलंपिक गेम्स में क्वालिफ़ाई करने वाले विकास कृष्ण सिर्फ़ दूसरे भारतीय मुक्केबाज़ हैं।तीन अलग अलग ओलंपिक गेम्स में क्वालिफ़ाई करने वाले विकास कृष्ण सिर्फ़ दूसरे भारतीय मुक्केबाज़ हैं।

ओलंपिक क्वालिफायर्स से संतुष्ट इस भारतीय बॉक्सर ने अपनी नई डिफेंसिव तकनीक का इस्तेमाल किया और यह उनके लिए काफी मददगार भी साबित हुई।

विकास ने बताया कि “क्वालिफायर्स के प्रदर्शन से मैं काफी संतुष्ट हूं। मैं रिंग में मूवमेंट करते हुए पंच लगाने की कोशिश कर रहा था और मैं विरोधी पर ज्यादा हमले की कोशिश कर रहा था। अगर आप ओलंपिक गोल्ड पदक जीतना चाहते हो तो आप यह एक नियमित शैली से नहीं कर सकते। इस दौरान आपको जजों को प्रभावित भी करना होता है”।

समझदारी से ट्रेनिंग

विकास कृष्ण की प्रगति पर पुरुषों की मुक्केबाजी टीम के राष्ट्रीय कोच सीए कुट्टप्पा (CA Kutappa) नजर रख रहे हैं। ट्रेनिंग के दौरान वह इस 28 साल के खिलाड़ी को पीठ की मांसपेशियों पर काम करने को कह रहे हैं।

कोरोना वायरस (COVID-19) के कारण सभी को अपने घर में कैद होना पड़ा है। एथलीट्स के सामने भी ट्रेनिंग करने की समस्या है, हालांकि इस कठिन परिस्थिति में भी विकास नहीं रूके और अपने पिता की मदद से ट्रेनिंग कर रहे हैं।

विकास ने कहा मेरे घर पर पचिंग बैग नहीं है इसलिए मैं अपने पिता से पचिंग पैड होल्ड करने को कहता हूं, जिसके कारण मैं पंच मार सकता हूं। मेरे पास जो भी संसाधन है, उसका मैं ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना चाहता हूं।

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