ओलंपिक के स्थगन से मुझे फाइव स्टार इवेंट में प्रतिस्पर्धा करने का मिल सकता है मौका: फ़वाद मिर्ज़ा

भारतीय घुड़सवार को कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण अपने सपने को पूरा करने के लिए एक और साल का इंतजार करना पड़ रहा है।

लेखक ओलंपिक चैनल ·

20 साल के इतिहास में भारत को ओलंपिक के लिए अपना पहला घुड़सवार मिला है। फ़वाद मिर्ज़ा (Fouaad Mirza) ने जनवरी में टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था, लेकिन कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण उन्हें अपने सपने को पूरा करने के लिए एक साल और इंतजार करना पड़ रहा है।

हालांकि, ओलंपिक का स्थगन भारतीय घुड़सवार को अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक अच्छा मौका दे रहा है।

फ़वाद मिर्ज़ा ने हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए कहा, "मैं फाइव स्टार लेवल पर भी प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश कर रहा था, जो कि ओलंपिक से एक लेवल ऊपर की प्रतियोगिता होती है। ओलंपिक फोर स्टार इवेंट होता है।"

उन्होंने कहा, '' मैं अपने लक्ष्य को और कुछ दिनों के लिए रोक कर रखना चाहता था, क्योंकि मुझे ओलंपिक खेलों के लिए अपने घोड़ों को सुरक्षित रखना था। खेलों के स्थगन के बाद अब थोड़ा और समय मिल गया है, तो मैं फाइव स्टार इवेंट में प्रतिस्पर्धा कर अपने लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश कर सकता हूं।”

जैसा कि आईओसी ने घोषणा की थी कि जिन एथलीटों ने पहले ही क्वालिफाई कर लिया है, टोक्यो ओलंपिक में उनकी जगह पक्की रहेगी यानी उनकी बर्थ सुरक्षित है। 27 वर्षीय इस घुड़सवार को लगता है कि अगर क्वालिफाइंग के लिए दोबारा कहा जाता तो घुड़सवारों के लिए यह करना संभव नहीं होता।

उन्होंने कहा, “मैंने सुना था कि पूरी क्वालिफिकेशन प्रक्रिया फिर शुरू होगी। लेकिन मुझे लगता है कि ये विशेष रूप से हमारे खेल के लिए काफी मुश्किल होगा। क्योंकि सबसे पहले हमें बिल्कुल नहीं पता कि यह सत्र कब शुरू होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारी प्रतियोगिता का सत्र अप्रैल में शुरू होता है और यूरोप में अक्टूबर में समाप्त होता है। उस स्थिति में यदि ये आठ महीने में शुरू होता है, तब तक सत्र समाप्त हो जाएगा और फिर से प्रक्रिया शुरू होती है, तो कोई मौका नहीं मिलेगा। मुझे लगता है कम से कम जहां तक ​​घुड़सवारी के खेल का सवाल है, वह पूरी क्वालिफिकेशन प्रक्रिया को फिर से नहीं शुरू करेंगे।”

फ़ौआद मिर्ज़ा फर्नहिल फेसटाइम और दजारा 4 के साथ प्रतिस्पर्धा करेंगे। तस्वीर साभार: फ़ौआद मिर्ज़ा/ट्विटर  

उतार-चढ़ाव से भरा पल

जहां 2018 में एशियाई खेलों में दो रजत पदक जीतना भारतीय घुड़सवारी के लिए बड़ी बात थी, वहीं इन खेलों में उन्हें चुनौती का सामना करना पड़ा, जिसके लिए फ़वाद मिर्ज़ा पहले से तैयार थे, जो कि उनके लिए अच्छी बात है।

उन्होंने ओलंपिक चैनल से कहा, “यह एक उतार चढ़ाव भरा पल रहा। सिग्नॉरिटी मेडिकॉट (जिस घोड़े के साथ उन्होंने सिल्वर मेडल जीता) पिछले साल घायल हो गया था और खेलों के स्थगन ने उसे टोक्यो ओलंपिक से पहले ठीक होने और दौड़ने का पर्याप्त समय दे दिया है। इसके अलावा एक नए घोड़े दजारा 4 को तैयार करने में अधिक समय लगेगा।”

भारतीय घुड़सवार फिलहाल जर्मनी में हैं, जहां वो सैंड्रा ऑफ़र्थ के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं और टोक्यो ओलंपिक से पहले खुद को और अपने घोड़ों को तैयार करना चाहते हैं।