एक्वेस्ट्रियन इवेन्टिंग

स्पर्धा के लिए फ़ौआद मिर्ज़ा अपने घोड़ों के साथ बढ़ाते हैं कनेक्शन

इक्वेस्ट्रियन के एवेंटिंग जैसे डिसिप्लिन में भाग लेने के लिए घुड़सवार और घोड़े के बीच एक अच्छा रिश्ता होना चाहिए।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

भारतीय घुड़सवार फ़ौआद मिर्ज़ा (Fouaad Mirza) का नाता अपने घोड़ों से उतना ही पक्का है जितना की उनके परिवार से है। स्टड फार्म में रहना, स्पर्धा की तैयारियों में जुटे रहने से फ़ौआद मिर्ज़ा और उनके घोड़ों के बीच एल अलग सा रिश्ता बन गया है।

फर्स्टपोस्ट के एक पॉडकास्ट में फ़ौआद मिर्ज़ा ने कहा था आप साथ ट्रेनिंग कर और साथ रह कर एक जोड़ी बनाते हो। अब यह पेट्स जैसा हो गया जहां वह जानते हैं कि आप दुखी हैं या खुश हैं। हर जानवर के पास लगभग वैसी 6 सेन्स होती है। आप साथ ट्रेन करते हैं तो आप साथ में ग्रो भी करते
हैं।”

यह खेल के साथ प्यार और घोड़ों के साथ कायम रिश्ता ही तो है जिसने 20 सालों में भारत को ओलंपिक गेम्स के इक्वेस्ट्रियन (Equestrian) इवेंट में क्वालिफाई कराने वाला पहला देश बनाया है। अगले साल यानी टोक्यो 2020 में भारतीय घुड़सवार फ़ौआद मिर्ज़ा स्पर्धा करते दिखेंगे और यह इक्वेस्ट्रियन ऐसा इवेंट है जिसे तीन भागों में बांटा गया है – ड्रेसेज, क्रॉस कंट्री और जम्पिंग।

पॉडकास्ट को आगे बढ़ाते हुए फ़ौआद मिर्ज़ा ने कहा “जैसे आप जंग पर जाते हैं तो बात करते हैचाहे ड्रेसेज राउंड में न सही लेकिन क्रॉस कंट्री जैसे अहम भाग में बातचीत करना ज़रूर एहम होता है, खासकर मेरे डिसिप्लिन में।”“यह एक जंग पर जाने जैसा है, जिसे कोर्स डिज़ाईनर ने आपके लिए बनाया है। घोड़े का आप पर भरोसा होना बहुत ज़रूरी है, उसे कभी भी ऐसा नहीं लगना चाहिए कि उसे आपसे दिक्कत हो सकती है या आप उसे खतरे में डाल सकते हैं।”

रिश्ते को आगे बढ़ाना ज़रूरी 

फ़ौआद मिर्ज़ा का उनके घोड़ों के साथ रिश्ता मानो अटूट है, जिस वजह से खेल के बीच का उनका बॉन्ड उभर कर सामने आया है। भारतीय घुड़सवार ने आगे बताया “जब आप शुरुआत करते हैं तो आप धीमे करते हैं लेकिन जब आप साथ काम करने लग जाते हैं तो वह आप पर भरोसा करते हैं। यह इस तरह से पनपता है। हम अस्तबल में अच्छा ख़ासा समय बिताते हैं, उन्हें खाना खिलाते हैं, उनका ध्यान रखते हैं, उन्हें साफ़ करते हैं, ऐसा करने से एक मज़बूत रिश्ता बनता है।”

उन्होंने अलफ़ाज़ साझा करते हुए आगे कहा “कुछ घोड़े में मुझे बाकिओं से ज़्यादा पसंद करते होंगे। हर घोड़े का अपना व्यक्तित्व है और आपको यह खोजना पड़ता है कि उन्हें क्या प
संद है।”

बेंगलुरु में जन्मे इस घुड़सवार को पिछले कुछ समय में बहुत सफलता मिली है और अब यह उन्ही घोड़ों पर दांव लगता है जो इस इवेंट के लिए ही बने होते हैं।

फ़ौआद मिर्ज़ा ने खेल के बारे में बताते हुए कहा “भारत में हम इक्वेस्ट्रियन के लिए ज़्यादातर एक्स-रेस के घोड़े इस्तेमाल करते हैं जैसे कि एवेंटिंग में, ड्रेसेज और शोजम्पिंग में। एक लेवल तक वह बहुत अच्छे हैं। वह बहुत सक्षम हैं। लेकिंन जब अप बड़े स्तर पर जाते हैं तो आपको वह घोड़े चाहिए होते हैं जो उस खेल के लिए पैदा हुए हों जिसमें आप स्पर्धा करना चाहते हैं।”

अब जब इक्वेस्ट्रियन यूरोप जैसी जगहों पर एक बड़ा खेल माना जाता है तो ऐसे में भारतीय एथलीट ने विकल्प खोजने में ज़रा भी देर नहीं लगाई। आज भारत में किसी भी घुड़सवार को कम विकल्प मिलते हैं और उन्हें उसी में प्रदर्शन करना होता है। फ़ौआद मिर्ज़ा ने आगे कहा “जर्मनी में मेरे साथ जो घोड़े हैं, वे मेरे डिसिप्लिन के लिए विशेष रूप से प्रतिबंधित हैं, जो कि एवेंटिंग है। वह खेल के लिए घोड़े की ब्रीडिंग कराते हुए बहुत कुछ देखते हैं क्योंकि उसमे घोड़ा अच्छे व्यवहार का होना चाहिए, और लंबे अंतर में तेज़ दौड़ने वाला होना चाहिए और साथ ही एक अच्छी ब्रीड का भी होना चाहिए।”