लॉकडाउन में भी घुड़सवार फौआद मिर्ज़ा की ट्रेनिंग की गति चरम पर

जर्मनी के एक छोटे शहर में ट्रेनिंग कर रहे भारतीय घुड़सवार फौआद मिर्ज़ा ने टोक्यो गेम्स के लिए क्वालिफाई कर लिया और अब वे उसी की तैयारियों में जुटे हैं।

जहां COVID-19 की वजह से पूरी दुनिया थम सी गई है वही खेल जगत भी इससे अछूता नहीं रहा है। खिलाड़ी हो या कोच या फिर फैंस, सभी को चुनौतियीं का सामना करना पड़ रहा है। अगर बात करें भारतीय घुड़सवार फौआद मिर्ज़ा (Fouaad Mirza) की तो उनका जीवन उसी गति से चल रहा है और उनकी ट्रेनिंग में कोई बाधाएं नहीं आ रही हैं।

 27 वर्षीय खिलाड़ी ने इस साल की शुरुआत में ही टोक्यो गेम्स के लिए क्वालिफाई कर लिया था और अब वे उसी सपने को पूरा करने की तैयारियां कर रहे हैं। Tokyo2020.org से बातचीत के दौरान खिलाड़ी ने कहा “मैं सुबह अपनी ट्रेनिंग शुरू कर देता हूं और शाम 6 से 6.30 के बीच उसे ख़त्म करता हूं। देर रात मैं घोड़ों की देख रेख के लिए भी जाता हूं। इस मामले में मैं खुशकिस्मत रहा कि मैं अस्तबल से केवल 30 मीटर दूर रहता हूं और इस वजह से मुझे ट्रेनिंग करने में कोई दिक्कत नहीं हो रही।

जब लॉकडाउन की वजह से सभी चीज़ों को रोका जा रहा था उस समय फौआद मिर्ज़ा, बर्जडॉर्फ जर्मनी में ट्रेनिंग कर रहे थे। गौरतलब है कि उन्होंने अभी भी अपना बेस जर्मनी को ही बनाया हुआ है और वे वहीं पर अपनी ट्रेनिंग को आगे बढ़ा रहे हैं, उन्होंने आगे अलफ़ाज़ साझा करते हुए कहा “मैं इस देश के नॉर्थ-वेस्टर्न भाग में रहता हूं और कोरोना वायरस ने साउथ के भागों को शिकंजे में लिया है। हालांकि जिस शहर में मैं रहता हूं वहां ज़्यादा जनसंख्या नहीं है तो ऐसे में सोशल डिसटेंसिंग हमारे लिए कोई नई बात नहीं है।

भारत में घुड़सवारी का भविष्य उज्जवल

फौआद बीस सालों में ओलंपिक में क्वालिफाई करने वाले पहले भारतीय इक्वेस्ट्रियन (घुड़सवार) बनें। इससे पहले सिडनी गेम्स में इम्तियाज़ अनीस (Imtiaz Anees) ने अपना कौशल दिखाया था। बेंगलुरु के रहने वाले फौआद को घुड़सवारी के गुण उनके पिता से ही आए हैं और साथ ही साथ उन्होंने दिग्गज सर मार्क टॉड (Sir Mark Todd) की वीडियो देख खुद को प्रेरित किया और वहां से भी खेल की बारीकियों को सीखा।

अपने कौशल के साथ इंसाफ करते हुए फौआद मिर्ज़ा ने एशियन गेम्स 2018 (Asian Games 2018) में सिल्वर मेडल जीता। उसके अगले साल उन्हें अर्जुन अवार्ड (Arjuna Award) से सम्मानित किया गया। इसके बाद टोक्यो 2020 (Tokyo 2020) के लिए क्वालिफाई करना इस खिलाड़ी के लिए ख़ास रहा और अब वे अगले साल जापान की सरज़मीन पर भारत की अगुवाई करते हुए नज़र आएं।

जब उनसे पूछा गया कि आप युवा घुड़सवारों को क्या कहना चाहते हैं तो उन्होंने कहा “मैं उन्हें लगातार परिश्रम करने की सलाह दूंगा। यह खेल आसान नहीं है लेकिन अब भारत में भी इसकी रूचि बढ़ रही है। इतना कहना चाहूंगा कि वे अपने दिमाग में खेल को ले कर कोई शंका न रखें कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं और उनका भविष्य बहुत अच्छा होने वाला है।”

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