जानिए इतिहास रचने वाली बाला देवी को किससे मिलती है प्रेरणा

बाला देवी पेशेवर रूप से खेलने वाली और यूरोप में स्कोर करने वाली पहली महिला भारतीय फुटबॉलर बनीं, वो भारत की दिग्गज मुक्केबाज़ मैरी कॉम से प्रेरणा लेती हैं।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

भारतीय फुटबॉल स्टार बाला देवी (Bala Devi) इस साल देश के लिए नए रिकॉर्ड बनाने में व्यस्त हैं।

देवी यूरोप में पेशेवर रूप से खेलने वाली पहली महिला फुटबॉलर बनीं जब उन्होंने रेंजर्स वुमन एफसी के लिए साइन किया।

बाला देवी के कारनामे कई युवा महिला फुटबॉलरों को प्रेरित करते हैं, लेकिन इस स्ट्राइकर को भी कोई और प्रेरित करता है। हालांकि इसका उत्तर आश्चर्यजनक नहीं है।

बाला देवी ने ऑल इंडिया फुटबॉल महासंघ (AIFF) को बताया। “मैरी कॉम (Mary Kom) मेरे लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है। उनकी शुरूआत काफी अच्छी रही और उन्होंने बाद में कड़ी मेहनत भी की और कई रिकॉर्ड तोड़े। मां बनने के बाद भी वो देश के लिए जीत हासिल करती रहती हैं।”

“हमने 2014 में हुए एशियन गेम्स में बातचीत की थी और उनकी ट्रेनिंग देखी थी। वो बहुत ही मिलनसार महिला हैं और हमारे मैचों के दौरान हमारा समर्थन भी करती हैं।”

बाला देवी ने आगे कहा, मैरी कॉम कई विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप की विजेता हैं और ओलंपिक पदक भी जीत चुकी हैं।”

बाला देवी ने पिछले सप्ताह एक और इतिहास रचा, जब उन्होंने मदर्सवेल वुमेंस के खिलाफ 9-0 की जीत में रेंजर्स वुमेंस के लिए अपना पहला गोल किया। इस प्रकार वो यूरोपीय लीग में स्कोर करने वाली पहली महिला भारतीय फुटबॉलर बनीं।

इस कारनामे ने बाला देवी को एशियन फुटबॉल कन्फेडरेशन (AFC) प्लेयर ऑफ द वीक ’में सैम केर और हेंग-मिन सोन जैसे सितारों के साथ खड़ा कर दिया।

देवी ने कहा, “गोल के बाद, बहुत से लोगों ने मेरा इतिहास बढ़ाया और कई लोग इसके बारे में बात कर रहे थे और लिख रहे थे, जिससे मुझे बहुत गर्व महसूस हुआ। उसके बाद, मुझे एएफसी प्लेयर ऑफ द वीक के लिए नामांकित किया गया और इस तरह के आइकन के साथ सूची में मेरा नाम देखकर मुझे खुशी हुई।”

उन्होंने कहा, “मैं चाहती हूं कि हर कोई हमारा समर्थन करता रहे ताकि हम भविष्य में देश के लिए बड़ी चीजें हासिल कर सकें।

बाला देवी ने कहा, “मैं हमेशा पोजिटिव रही हूं और भारत में उन सभी लड़कियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनना चाहती हूं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलना चाहते हैं। ये कुछ ऐसा है जो हमेशा मेरे दिमाग में रहा है और मैं इसे हर बार ध्यान में रखते हुए पिच पर कदम रखती हूं।”