बाईचुंग भूटिया ने स्पेशल एथलीटों की मानसिक ताक़त को सराहा

पूर्व भारतीय फ़ुटबॉलर दोनों ही स्पेशल एथलीट और पैरालंपिक एथलीटों को बढ़ावा देना चाहते हैं। 

पूर्व भारतीय फुटबॉल कप्तान बाईचुंग भूटिया (Bhaichung Bhutia) ने एक स्पेशल एथलीट और पैरा-एथलीट के लिए मानसिक ताकत को बहुत महत्वपूर्व बताया है। स्पेशल ओलंपिक ‘सरप्राइज़ एंड डिलाईट’ में मोहन बगान के फॉरवर्ड खिलाड़ी ने बहुत से खिलाड़ियों से बातचीत की।

इस खिलाड़ी ने अपने 22 साल के चमचमाते करियर पर रोशनी डाली और कुछ एथलीटों के माता-पिता से भी बात की। 43 वर्षीय पूर्व भारतीय फुटबॉलर ने एथलीट और पैरा-एथलीट की जमकर तारीफ की क्योंकि उन्हें पता है एक मुकाम तक पहुंचने के लिए किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

ओलंपिक चैनल से बात करते हुए बाईचुंग भूटिया ने कहा “यह ख़ास है क्योंकि यह सभी हमारे लिए प्रेरणादायक हैं। शारीरिक तौर से अनफिट होने के बाद भी यह लोग स्पोर्ट्स में हैं। यह लोग जीवन में बहुत सकरात्मक होते हैं और हमे इनसे सीखना चाहिए कि ज़िन्दगी में मानसिक रूप से ताकतवर कैसे बनते हैं।”

बाईचुंग भूटिया के अलावा पूर्व भारतीय स्विमर बुला चौधरी और 7 बार के इंडियन नेशनल टेनिस चैंपियन गौरव नाटेकर भी उस ऑनलाइन चैट का हिस्सा थे।

आखिरी बार कुछ स्पेशल एथलीटों की मुलाकात अंजू बॉबी जॉर्ज (Anju Bobby George), आनंद मेनेज़ेस (Anand Menezes) और प्रमिला गुडांडा अयप्पा (Pramila Gudanda Aiyappa) जैसे कुछ ओलंपियन से हुई थी।

बाईचुंग भूटिया के इस खिलाड़ी ने अपने क्लब के दिनों की प्रेरणा जो कि एक हैंडीकैप स्विमर थे उन्हें भी याद करते हुए आगे कहा “अपने खेलने के दिनों में मुझे मसुदुर रहमान से प्रेरणा मिली थी।” ट्रेन एक्सीडेंट की वजह से मसुदुर रहमान बैद्य (Masudur Rahman Baidya) की दोनों टांगे खराब थी लेकिन उनमे जोश की कमी नहीं थी। अपने दृढ निश्चय से स्विमर 1997 में अंग्रेज़ी चैनल का हिस्सा बने थे और 2001 स्ट्रेट ऑफ़ गिब्राल्टर का भी।

दिग्गज ने आगे कहा “मैं बंगाल से हूं तो मुझे पता है कि वह कौन हैं। जब आप उस आदमी को देखते हैं जो कि शारीरिक चुनौती से जूझ रहा है और खुद को और चुनौती में डाल कर इंग्लिश चैनल को क्रॉस कर गया। वह मुझे प्रेरणा दे गया। जितना मैं लोगो को प्रेरणा देता हूं उससे कई ज़्यादा प्रेरणा ऐसे विकलांग एथलीटों से बात कर कर मिलती है।''

स्पेशल एथलीटों के साथ मैरी कॉम
स्पेशल एथलीटों के साथ मैरी कॉमस्पेशल एथलीटों के साथ मैरी कॉम

स्पेशल ओलंपिक भारत ने 1,259 खिलाड़ियों को हिस्सा लेते हुए देखा है जिसमे 1987 और 2019 के बीच 9 वर्ल्ड समर गेम्स थे और 6 वर्ल्ड विंटर गेम्स। गौरतलब है कि इसमें भारत ने 1,504 मेडल अपने नाम किए हैं।

भारतीय खेमे ने और ज़्यादा नाम तो तब कमाया जब आबू धाबी में हुए स्पेशल ओलंपिक वर्ल्ड गेम्स में 284 भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 85 गोल्ड, 154 सिल्वर और 129 ब्रॉन्ज़ मेडल पर अपने देश के नाम की मुहर लगा दी।

भाईचुंग भूटिया का मानना है कि छठी इंद्री, कोशिश करने का जज़्बा और धैर्य ऐसे तत्व हैं जो प्रत्येक स्ट्राइकर के पास होने चाहिए
भाईचुंग भूटिया का मानना है कि छठी इंद्री, कोशिश करने का जज़्बा और धैर्य ऐसे तत्व हैं जो प्रत्येक स्ट्राइकर के पास होने चाहिएभाईचुंग भूटिया का मानना है कि छठी इंद्री, कोशिश करने का जज़्बा और धैर्य ऐसे तत्व हैं जो प्रत्येक स्ट्राइकर के पास होने चाहिए

पैरालंपिक की बात की जाए तो भारत ने उस क्षेत्र में भी ऊँचाइयों को हासिल किया है। 18 संस्कारों में भारत ने आज तक 4 गोल, 4 सिल्वर और 4 ही ब्रॉन्ज़ मेडल जीते हैं।

भूटिया का मानना है कि अगर इन्हें सपोर्ट किया जाए तो यह आंकड़े और भी बेहतर हो सकते हैं। बाईचुंग भूटिया ने आगे कहा “हालांकि भारत को पैरालंपिक में ज़्यादा समर्थन नहीं मिलता लेकिन मुझे फिर भी लगता है कि हम अच्छा करेंगे। ज़्यादा से ज़्यादा स्पोर्ट्स के खिलाड़ियों को आगे आकर इसके बारे में बात करनी चाहिए। चाहे वह स्पोर्ट्सपरसन हो या कोई भी, ऐसे में कोई भी आगे आकर बात कर सकता है। यह अच्छा है।”

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