लॉकडाउन के दौरान ऑर्गेनिक खेती से खुद को व्यस्त रख रहे हैं गौरामंगी और पूनम रानी मलिक

शूटर शगुन चौधरी ने भी कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन के दौरान अपने फॉर्म पर 8 महिलाओं को रोजगार दिया

भारतीय एथलीटों लॉकडाउन के बीच खेती के क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण लेते दिखाई दिए। इसी के साथ वह अपने नए शौक को भी पूरा कर रहे हैं।

भारतीय फुटबॉल टीम के पू्र्व कप्तान और डिफेंडर गौरामंगी सिंह (Gouramangi Singh), जो अपने परिवार के साथ इम्फाल लौटे थे, उन्होंने किचन गार्डन में सब्जियों की नई नई किस्मों को शामिल किया।

गौरामंगी ने AIFF वेबसाइट से बातचीत के दौरान कहा कि “हमारे पास जमीन का एक छोटा सा पैच है, एक एकड़ से भी कम। यह हमारे घर से कुछ पैदल दूरी पर है।” इसके साथ ही उन्होंने माना कि “जैविक खेती ने उन्हें इन कठिन समय के दौरान मानसिक और शारीरिक रूप से तरोताजा रखा है।”

इसके अलावा नेशनल फुटबॉल लीग, फेडरेशन कप और कई आई-लीग खिताब के विजेता ने कहा कि “यह काफी सकारात्मक अनुभव रहा, मैं इसका आनंद लिया। गार्डन में काम करना हमेशा से ही अच्छा लगता है।”

उन्होंने कहा कि “हम कोशिश करते थे कि हर दिन 2-3 घंटे गार्डन में समय व्यतित करें। बिस्तर बिछाना, बीज बोना, पौधों को पानी पिलाना और सब्जियों को तोड़ना, यह सब बहुत संतोषजनक है, खासकर जब हमारी मेहनत फल देती है।”

इसके अलावा भारत के पूर्व फुटबॉल कप्तान ने कहा कि “इससे यह भी सुनिश्चित होता है कि हम स्वस्थ खा रहे हैं और हमें परिवार के साथ गुणवत्ता का समय बिताने का मौका मिलता है।”

जड़ों में वापसी

एक किसान परिवार में पली-बढ़ी होने के बावजूद, भारतीय हॉकी फॉरवर्ड पूनम रानी मलिक (Poonam Rani Malik) खेल प्रतिबद्धताओं के कारण कभी भी खेतों में नहीं जा पाईं।

फसल के मौसम के दौरान हरियाणा में अपने गांव में ये रियो ओलंपियन अपने माता-पिता और भाई की खेत में मदद कर रही हैं।

पूनम रानी मलिक ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत के दौरान बताया कि “ये पहला मौका है, जब मैं फसल के समय खेत में समय दे पा रही हूं। ज्यादातर गांवों में किसानों ने अज्ञात कृषि श्रमिकों को बुलाने से परहेज किया, वहीं अधिकांश जानने वाले श्रमिक अपने संबंधित राज्यों में वापस चले गए हैं।”

भारत की तरफ से 200 से ज्यादा मैच खेलने वाली इस हॉकी खिलाड़ी ने आगे कहा कि “इसलिए श्रमिकों के ना होने के कारण मैं अपने परिवार की मदद कर रही हूं”

लॉकडाउन के समय रोज़गार देना

साल 2012 ओलंपिक गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय ट्रैप शूटर शगुन चौधरी (Shagun Chowdhary) जयपुर में फंसी हुई हैं, हालांकि इस दौरान उन्होंने अपना जैविक खेती का शौक पूरा किया।

इस शूटर ने एक कदम आगे बढ़ते हुए अपने फॉर्म पर 8 महिलाओं को रोजगार भी दिया, भविष्य में भी वह जैविक खेती करने की योजना बना रही है।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान शगुन चौधरी ने बताया कि “चूंकि मैं हमेशा शूटिंग या यात्रा में व्यस्त रहती थी तो यहां समय बिताना कभी संभव ही नहीं होता था। इसके अलावा उन्होंने बताया कि  यहां रहने के दौरान मुझे जैविक फसलें उगाने का विचार आया।”

इसके अलावा उन्होंने कहा कि “मैं इसे एक महिला केंद्रित खेत बनाना चाहता हूं। वे यहां रहेंगे, काम करेंगे और स्वतंत्र रहेंगे।"

भारतीय मुक्केबाज़ों ने खेतों में बिताया समय

शीर्ष क्रम के फ्लाइटवेट बॉक्सर अमित पंघल (Amit Panghal), दो बार के ओलंपियन मनोज कुमार (Manoj Kumar) और स्टार मुक्केबाज सतीश कुमार (Satish Kumar) ने अपने दस्ताने उतार दिए हैं।

एक किसान के बेटे, अमित पंघाल ने गेहूं की कटाई और पैकिंग के लिए अपने परिवार का साथ दिया. जबकि सतीश कुमार और मनोज कुमार अपने माता-पिता की सहायता के लिए खेतों की तरफ रुख कर रहे हैं।

View this post on Instagram

आप देश के अन्नदाता हो आपका स्वास्थ्य भी देश के लिए उतना ही जरूरी है जितना जवानों का, पुलिस का और डॉक्टर भाईयों का है। आप अनाज उपजाते हो तो पूरे देश का पेट भरता है। इसीलिए मेरे अन्नदाताओं से मेरी हाथ जोड़कर गुजारिश है कि अपना पूरा ध्यान रखना है कटाई के टाइम पै। जय हिंद ।

A post shared by Boxer Manoj Kumar (@boxermanojkumar) on

मनोज कुमार ने बताया कि “जब मैं बच्चा था तब से अपने बड़ों को खेती करते देख रहा हूं। पहले मैं मस्ती के लिए अपने पिता और अंकल की मदद करता था लेकिन इस बार हालात ऐसे थे कि मुझे उनकी मदद करनी ही पड़ी।”

क्या आपको यह आर्टिकल पसंद आया? इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें!