बाईचुंग भूटिया का मानना है कि अच्छे स्ट्राइकरों की 'छठी इंद्री' करती है बेहतर काम

सिक्किम के पूर्व भारतीय फुटबॉल कप्तान भूटिया ने भारत के लिए 104 मैच खेले हैं और उन्होंने देश के लिए 40 अंतरराष्ट्रीय गोल किए हैं।

पूर्व भारतीय फुटबॉल कप्तान और फॉरवर्ड खिलाड़ी बाईचुंग भूटिया (Bhaichung Bhutia) का मानना है कि एक सफल स्ट्राइकर के पास अपने मुख्य हथियार के रूप में उसकी 'छठी इंद्री' बेहतर होनी चाहिए।

लोकप्रिय रूप से सिक्किमिस स्नाइपर के नाम से मशहूर बाईचुंग भूटिया पहले भारतीय फुटबॉलर थे जिन्होंने 2009 के नेहरू कप के दौरान देश का प्रतिनिधित्व करते हुए 100 मैच खेले थे।

भारत के लिए 104 मैचों में 40 गोल करने वाले भूटिया का कहना है कि वो हमेशा गोल करने के लिए अपनी प्रवृत्ति पर भरोसा करते थे और स्ट्राइकर के पास बेहतर समझ होनी चाहिए।

भाईचंग भूटिया ने ऑल इंडिया फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को बताया, "ये सब कुछ छठी इंद्री पर निर्भर करता है।"

“आपको ये अनुमान लगाने की ज़रूरत है कि गेंद कहां आएगी। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइकरों में ये समझ है।

ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के पूर्व खिलाड़ी ने कहा, “आपको स्थितियों को पढ़ने की जरूरत है। जब तक आप अपनी छठी इंद्री को विकसित नहीं करते, आप एक सफल स्ट्राइकर नहीं बन सकेंगे।”

ईस्ट बंगाल के लिए 19 साल की उम्र में डेब्यू करते हुए बाईचुंग भूटिया अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी मोहन बागान के लिए भी एक लोकप्रिय शख्सियत रहे हैं।

हालांकि भूटिया ने जेसीटी मिल्स, मैनचेस्टर-आधारित साइड बरी एफसी, मलेशिया के पेरक एफए और कई अन्य क्लबों के लिए खेला है, लेकिन ईस्ट बंगाल के साथ जिस तरह से वो खेले, इसके लिए उन्हें याद किया जाता है।

ईस्ट बंगाल के लिए 97 मैचों में, बाईचुंग भूटिया ने 52 गोल किए और मोहन बागान के लिए 56 मैचों में 25 बार स्कोर किया। वो अपनी सफलता का श्रेय अपने दौड़ को देते हैं।

भाईचुंग भूटिया का मानना है कि छठी इंद्री, कोशिश करने का जज़्बा और धैर्य ऐसे तत्व हैं जो प्रत्येक स्ट्राइकर के पास होने चाहिए
भाईचुंग भूटिया का मानना है कि छठी इंद्री, कोशिश करने का जज़्बा और धैर्य ऐसे तत्व हैं जो प्रत्येक स्ट्राइकर के पास होने चाहिएभाईचुंग भूटिया का मानना है कि छठी इंद्री, कोशिश करने का जज़्बा और धैर्य ऐसे तत्व हैं जो प्रत्येक स्ट्राइकर के पास होने चाहिए

बाईचुंग भूटिया ने कहा, "एक स्ट्राइकर के लिए वो दौड़ बेहद महत्वपूर्ण हैं। मैं सुनील छेत्री (Sunil Chhetri) से कहता रहता था कि आपको वहां से प्रयास करने की जरुरत होती है जहां से आपको उम्मीद है कि आप गोल कर सकते हैं।”

भूटिया ने कहा, "अगर आप नज़दीक जाते हैं, तो आपको डिफेंडर के पास जाना होगा और डिफेंडर को चकमा देना होगा, और जब आप उसे रोकेंगे, तो अन्य लोग भी आपको रोकेंगे।"

भूटिया के अनुसार दृढ़ता के साथ-साथ धैर्य भी महत्वपूर्ण था।

"यदि आप रोनाल्डो और मेस्सी को देखें, तो ऐसा हमेशा नहीं होता है कि वो 3-4 डिफेंडर्स को पछाड़ दें। इसके बजाय, सभी बड़े स्ट्राइकर गेंद का इंतजार करते हैं और फिर उसे छूते हैं।”

भूटिया ने कहा, "कुल मिलाकर ये सब आपकी समझ पर निर्भर करता है, और मैं पिर कहता हूं, जब तक आप वैसे नहीं दौड़ेंगे, तो आप कभी भी उस समझ को विकसित नहीं कर पाएंगे।"

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