बाला देवी के नक़्श-ए-क़दम पर चलने को तैयार हैं दंगमेई ग्रेस

विदेशी लीग में खेलकर इतिहास रचने वाली भारतीय महिला फ़ुटबॉलर बाला देवी ने युवाओं के लिए भी रास्ते खोल दिए हैं। मणिपुर की युवा खिलाड़ी दंगमेई ग्रेस भी अब उन्हीं की तरह आगे बढ़ना चाहती हैं।

लेखक सैयद हुसैन ·

भारतीय महिला फ़ुटबॉल टीम की युवा फ़ॉरवर्ड दंगमेई ग्रेस (Dangmei Grace) भी अब उसी पदचिन्हों पर चलना चाहती हैं, जिसपर आगे बढ़ते हुए बाला देवी (Bala

Devi) ने इतिहास रच दिया था और किसी यूरोपियन लीग में खेलने वाली पहली भारतीय महिला बनीं थीं।

इसी साल जनवरी में बाला देवी ने स्कॉटिश दिग्गज टीम रैंजर एफ़सी के साथ 18 महीनों का क़रार करते हुए इतिहास रच दिया था। 2020-21 के स्कॉटिश वुमेंस प्रीमियर लीग (Scottish Women’s Premier League) में अपने प्रदर्शन से प्रभावित करते हुए 30 वर्षीय बाला देवी टीम की स्थायी सदस्य बन गईं हैं। इस सीज़न रैंजर्स

एफ़सी (Ranger FC) के 7 में से 5 मैचों में बाला देवी मैदान में उतरीं हैं। इतना ही नहीं उन्होंने मैल्की थॉमसन (Malky Thomson) की अगुवाई में अपनी टीम के लिए पहला गोल भी दागा है

स्कॉटिश प्रीमियर लीग में खेलने वाली बाला देवी ने देश की दूसरी खिलाड़ियों को भी प्रेरित किया है। तस्वीर साभार: रैंजर्स एफ़सी

अपनी सीनियर की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से युवा दंगमेई ग्रेस भी प्रेरित हुईं हैं और अब वह भी उन्हीं के नक़्श-ए-क़दम पर चलने को तैयार हैं।

24 वर्षीय इस मणिपुरी खिलाड़ी ने AIFF TV के साथ बातचीत में कहा कि बाला देवी युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन गई हैं।

“हर एक खिलाड़ी का सपना होता है कि वह भी विदेश में जाकर खेले और देश का नाम रोशन करे। बाला दी शानदार प्रदर्शन कर रही हैं, और वह हम जैसे युवाओं के लिए एक प्रेरणा हैं। बाला दी ने हमें ये सिखाया है कि अगर हम चाह लें तो रास्ता कितना भी मुश्किल क्यों न हो मंज़िल मिल ही जाती है।“

दंगमेई ग्रेस ने अपना अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू साल 2013 में किया था और तब से ही वह भारतीय महिला फ़ुटबॉल टीम का अहम हिस्सा बन गई हैं।

SAFF कप की जीत हो या फिर ओलंपिक क्वालिफ़ायर्स में प्रदर्शन करना, ये युवा भारतीय फ़ॉरवर्ड कई मैचों में टीम की जीत का सूत्र रही हैं। इस मणिपुरी खिलाड़ी ने इसका श्रेय ऑल इंडिया फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन (AIFF) को दिया और कहा कि बिना उनके समर्थन के भारतीय महिला फ़ुटबॉल टीम का इस मुक़ाम पर पहुंचना संभव नहीं था।

“दो साल पहले हमारी विश्व रैंकिंग 67 थी, और अब हम 53वें स्थान पर पहुंच गए हैं। ये दर्शाता है कि हम किस रफ़्तार से विकास कर रहे हैं। इसके पीछे की अहम वजह हीरो इंडियन वुमेंस लीग भी है जिसने हमें अपनी प्रतिभा दिखाने का एक मंच दिया।”

भारत 2022 में FIFA अंडर-17 वुमेंस वर्ल्ड कप (FIFA U-17 Women’s World Cup) और AFC वुमेंस एशियन कप (AFC Women’s Asian Cup) की मेज़बानी भी करने जा रहा है, और दंगमेई ग्रेस मानती हैं कि इससे भारतीय महिला फ़ुटबॉल टीम और तेज़ी से ऊपर की ओर जाएगी।

“2022 में हम दो बड़े टूर्नामेंट्स की मेज़बानी करेंगे, मुझे लगता है ये युवाओं के लिए एक प्रेरणा की तरह होगा। मेरा भी सपना है कि मैं AFC वुमेंस एशियन कप में खेलूं और वहां शीर्ष रैंकिंग वाली टीम जापान और ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मैदान में उतरते हुए देश का नाम रोशन करूं। अगर ऐसा हुआ तो मैं ख़ुद को बेहद ख़ुशक़िस्मत समझूंगी और मेरे परिवार को मुझ पर नाज़ होगा।”

प्रमुख तस्वीर: AIFF मीडिया