FIFA वर्ल्ड कप क्वालिफ़ायर: सुनील छेत्री ने क़तर के खिलाफ मुक़ाबले वाली यादगार रात को किया याद

गुरुवार, 10 सितम्बर को फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स में क़तर के खिलाफ़ भारत के शानदार डिफेंस वाले मुक़ाबले को एक साल पूरा हो गया, इस मौके पर सुनील छेत्री ने इन यादगार पलों को फिर से याद किया।

लेखक रितेश जायसवाल ·

अस्वस्थ होने की वजह से सुनील छेत्री पिछले साल फीफा विश्व कप क्वालिफायर (FIFA World Cup Qualifiers) में हिस्सा नहीं ले सके थे, जिसकी वजह से भारतीय फुटबॉल टीम पहले से ही कमज़ोर सी नज़र आ रही थी। लेकिन कप्तान ने उस शाम अपने होटल के कमरे से इस मुक़ाबले के हर एक पल को जिया था।

ओमान, बांग्लादेश, अफग़ानिस्तान और एशियाई चैंपियन क़तर से ग्रुप ई में भारतीय फुटबॉल टीम का सामना सबसे मुश्किल प्रतिद्वंदियों से था।

भारत ने पहले ग्रुप मैच में ओमान के घरेलू मैदान में हार के साथ अपने विश्व कप अभियान की शुरुआत की और सुनील छेत्री को यह बात अच्छी तरह पता थी कि ब्लू टाइगर्स को फीफा विश्व कप 2022 मेज़बानों के खिलाफ सकारात्मक परिणाम हासिल करने की जरूरत है।

सुनील छेत्री ने AIFF वेबसाइट पर अपने कॉलम में लिखा था, "क्योंकि ड्रॉ तय किया जा चुका था, इसलिए मैं [कत़र के खिलाफ] चुनौती का इंतजार कर रहा था। ऐसे में यह बेहद महत्वपूर्ण था कि हम इस मैच से कुछ न कुछ जरूर हासिल करें, खासकर गुवाहाटी में ओमान के खिलाफ हमारे परिणाम के बाद यह और भी जरूरी हो गया था।"

हालांकि उस वक्त इगोर स्टिमैक (Igor Stimac) ने युवा मनवीर सिंह (Manvir Singh) को सुनील छेत्री की जगह भारत के अटैक को मज़बूत करने के लिए प्रेरित किया, लेकिन अब पूरा दारोमदार भारत के डिफेंस के जिम्मे था। जिसमें गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू (Gurpreet Singh Sandhu) के सामने राहुल भीके (Rahul Bheke), संदेश झिंगन (Sandesh Jhingan) और मंदार राव देसाई (Mandar Rao Desai) थे।

क़तर अगले 90 मिनट तक भारत की बैकलाइन को चुनौती देने के लिए तैयार था, लेकिन शानदार गुरप्रीत सिंह संधू भी भारत को गोल से बचाने के लिए पूरी तरह सजग थे।

सुनील छेत्री 2019 में फीफा विश्व कप क्वालिफ़ायर के दौरान क़तर के खिलाफ खेल गए शानदार मुक़ाबले में भारतीय टीम का हिस्सा नहीं थे।

आखिरकार, ब्लू टाइगर्स 2019 में महाद्वीपीय चैंपियन के खिलाफ अपराजित रहने वाली एकमात्र एशियाई टीम बन गई।

सुनील छेत्री ने अपने होटल के कमरे से इस पूरे मैच को देखा था। कप्तान को अच्छी तरह याद है कि वह अस्वस्थ होने के बावजूद इस मैच को देखने के लिए एक मिनट भी आराम नहीं कर पाए थे।

सुनील छेत्री ने कहा, "टेलीविजन के सामने बैठे हुए जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ रहा था, मुझे अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में काफी मुश्किल हो रही थी। यह एक रोलर कोस्टर की सवारी करने जैसा था। मैं स्क्रीन को देखकर चिल्ला रहा था जैसे कि मैं खुद टच लाइन पर मौजूद था।”

36 वर्षीय छेत्री ने आगे कहा, “हर मिनट एक घंटे की तरह आगे बढ़ रहा था। लेकिन, अंत में हमने एक यादगार परिणाम हासिल किया और चीज़ें एक की जगह कई मायनों में ‘मीठी’ हो गईं।”

हालांकि भारत के अगले चरण में पहुंचने की संभावना कम ही नज़र आ रही थी, क्योंकि टीम ने पांच मैचों में सिर्फ तीन अंक ही हासिल किए थे। क़तर के खिलाफ गोल रहित ड्रा सबसे बेहतरीन परिणामों में से एक रहा।

छेत्री ने कहा, "इस परिणाम के एक साल बाद भी मुझे अभी भी यह याद करना मुश्किल हो रहा है कि दोहा में उस रात के जैसा मैंने पहले कितनी बार ऐसा महसूस किया था। मैं अपने साथी ब्लू टाइगर्स के साथ मैदान पर भले ही नहीं था, लेकिन जिस तरह से वे खेले और उन्होंने जो दिलेर खेल दिखाया, वह जीवनभर के लिए मेरी यादों में बस गया।”