भारत को FIH प्रो लीग में आगे बढ़ने के लिए इन जरूरी मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत

कोच ग्राहम रीड ने इस टीम के मुक़ाबला करने की ताकत के साथ-साथ मानसिक संतुलन में सुधार पर ध्यान दिया है। अब देखते हैं कि प्रो लीग में कोच की क्या रणनीति रहती है। 

लेखक जतिन ऋषि राज ·

एफआईएच प्रो लीग (FIH Pro League) में भारतीय मेंस हॉकी टीम (Indian men’s Hockey team) ने कई मौकों पर ज़बरदस्त खेल दिखाया है और दुनिया को ये बताया कि इस प्रतियोगिता के वह प्रबल दावेदार हैं। अपने दो दिन के शेड्यूल में ऑस्ट्रेलियन मेंस हॉकी टीम (Australian men’s Hockey team) के खिलाफ खेल रही भारतीय टीम की झोली में मिले-जुले परिणाम आए। जहां एक मुक़ाबला ऑस्ट्रेलिया ने जीता तो वहीं दूसरा मुक़ाबला भारत ने अपने नाम करते हुए बराबरी की।

एफआईएच प्रो लीग के अपने डेब्यू संस्करण में भारतीय मेंस हॉकी टीम अभी 6 मुकाबले खेल चुकी है, और गौर करने वाली बात यह है कि वे सभी मुकाबले इस टीम ने अपने से अच्छी रैंक की टीमों के खिलाफ खेले हैं।

अब भारतीय टीम को घरेलू मैदान की जगह विदेशी धरती पर जर्मनी के खिलाफ खेलना होगा। ऐसे में एक बार उन पहलुओं पर नज़र डालते हैं, जिन्हें कोच ग्राहम रीड (Graham Reid) ज़रूर सुधारना चाहेंगे।

दोहरी रणनीति की जरूरत

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुक़ाबलों में देखा गया कि भारतीय हॉकी टीम ने फील्ड की दोनों साइड से अटैक किया लेकिन अपने प्रतिद्वंदियों के गोल के भीतर जाने में असफल रही। हालांकि रमनदीप सिंह (Ramandeep Singh) और राज कुमार पाल (Raj Kumar Pal) ने नई रणनीति बनाते हुए गोल दागे लेकिन ऑस्ट्रलियाई टीम ने जल्द ही इसका तोड़ निकाल लिया और भारतीय टीम को दोबारा कोई मौका नहीं दिया।

मनप्रीत सिंह ने अच्छी शुरुआत कर अपनी टीम को विजयी कराया। फोटो क्रेडिट: हॉकी इंडिया 

अभी के खेल के सिलसिले से लगता है कि कोच रीड को इस खेल के दौरान मिड-फील्डर को ज़्यादा से ज़्यादा प्रयोग में लाना होगा। ज़रूरी नहीं कि हर मुक़ाबले में कुछ नया किया जाए लेकिन प्लान-बी साथ होना बेहद ज़रूरी है। इस मुकाबले की बात करें तो मनप्रीत सिंह (Manpreet Singh) हमेशा की तरह रचनात्मक दिखे और उन्होंने अपने कौशल का भरपूर प्रमाण दिया। साथ ही युवा हार्दिक सिंह (Hardik Singh) ने भी दूसरे मुक़ाबले के दौरान अपनी गति को प्रयोग में ला कर अपनी टीम का अच्छा साथ निभाया। हालंकि भारतीय मेंस हॉकी टीम ने आक्रामकता तो कई मौकों पर दिखाई लेकिन उन्हें उस जोश को गोल में तब्दील करने में ज़रा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

शुरुआत में संतुलन ज़रूरी

भारतीय टीम इस लीग में जब भी मुकाबले को जीतने में सफल रही है तब यह देखा गया है कि ज़्यादातर मौकों पर इस टीम ने पहले ही बढ़त बना ली थी। खेल के शुरूआती दौर में गोल करना किसी भी खेमे को खेल को चलाने का संतुलन प्रदान करता है और इससे टीम का मनोबल भी उंचा रहता है।

मनप्रीत सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा “ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले मुकाबले में हमारी शुरुआत धीमी थी लेकिन आज यानि दूसरे मुकाबले में हमने शुरुआत से ही चढ़ कर खेला जो कि हमारी सफलता का कारण बना।”

कोच रीड ने एक मीडिया पोस्ट में कहा था कि “हमे मुकाबले की शुरुआत से ही चुस्ती दिखानी चाहिए” इस वाक्य की बात करें तो भारतीय फॉरवर्ड मंदीप सिंह (Mandeep Singh), ललित उपाध्याय (Lalit Upadhyay) और गुर्जंत सिंह (Gurjant Singh) जैसे खिलाड़ियों की भूमिका बढ़ जाती है।

रमनदीप सिंह ने कई बार अटैक कर भारत के लिए गोल दागने की कोशिश की। फोटो क्रेडिट: हॉकी इंडिया 

डिफ़ेंस को करना होगा और मज़बूत

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम की ओर से उम्दा डिफ़ेंस देखा गया। रुपिंदर पाल सिंह (Rupinder Pal Singh), हरमनप्रीत सिंह (Harmanpreet Singh), बीरेंद्र लाकड़ा (Birender Lakra), अमित रोहिदास (Amit Rohidas) और सुरेंदर कुमार (Surender Kumar) ने चालाकी दिखाते हुए अपने प्रतिद्वंदियों को हमेशा कुछ अलग करने पर मजबूर किया।

शनिवार को खेले गए मैच में भारत ने चौकन्ना रहकर ऑस्ट्रेलिया को मिले पेनल्टी कॉर्नर को भी रोका और दिखा दिया कि इस टीम के पास आक्रामकता के साथ डिफ़ेंस का कौशल भी भरपूर है।

ग्राहम रीडने पोस्ट मैच कांफ्रेंस में कहा कि “हमारी रणनीति उन्हें सर्कल के बाहर ही रोकना था ताकि वे चढ़ कर न खेल सकें। कल हुए मुकाबले में हमने उन्हें कई मौके दिए थे जिन्हें इस बार रोकना ज़रूरी था।

कमाल की बात तो तब बनी जब भारतीय टी ने ऑस्ट्रेलिया को 9 पेनल्टी कॉर्नर तोहफे में दिए। अपने डिफ़ेंस को खेल में लाते हुए भारत ने अपने प्रतिद्वंदी को इस मौके पर एक बार भी गोल दागने नहीं दिया।

मनप्रीत ने आगे कहा “हमारे पास अभ्यास के मौके हैं और पीआर श्रीजेश (PR Sreejesh) का साथ हमें और ज़्यादा संतुष्ट करता है क्योंकि वे हर गेम में 2 से 3 गोल तो रोकते ही हैं।”

अब साल 2020 शुरू हो चुका है यानी ओलंपिक गेम्स का साल शुरू हो चुका है। हर टीम इस साल की शुरुआत में ही लय पकड़ना चाहेगी और अपने कारवां को जापान तक बिना किसी कमी के लेकर जाना चाहेगी। कोच ग्राहम रीड के पास अब इस टीम की कमियों का और मज़बूत पक्षों का एक अच्छा अनुमान है और उम्मीद कर सकते हैं कि ट्रेनिंग के दौरान इन सभी पहलुओं पर उनके द्वारा काम किया जाएगा।