बलबीर सिंह सीनियर भारत के अनमोल खिलाड़ियों में से एक थे: मिल्खा सिंह 

भारतीय हॉकी दिग्गज और फ़्लाइंग सिख ऑफ़ इंडिया ने भारतीय स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री में 30 साल तक एक साथ काम किया है।

पंजाब से बहुत से खिलाड़ी निकले हैं लेकिन इन दो खिलाड़ियों का खेल और आपसी दोस्ती की बात ही कुछ अलग है। एक नाम है फ्लाइंग सिंख ऑफ़ इंडिया मिल्खा सिंह (Milkha Singh) और दूसरे हैं हॉकी के दिग्गज, स्वर्गीय बलबीर सिंह दोसांज (Balbir Singh Dosanjh)। अपने अपने खेल में जितनी अच्छी इनकी तकनीक थी, खेल के बाहर उतनी ही अच्छी इनकी दोस्ती भी थी।

यह दोनों खिलाड़ी पहली बार एक दूसरे से 1956 ओलंपिक गेम्स के दौरान मिले थे और तब से लेकर ताः उम्र उन्होंने एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। बलबीर सिंह के निधन के बाद मिल्खा सिंह ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बातचीत में कहा “वह बहुत बड़े खिलाड़ी थे, हॉकी में ध्यानचंद के बाद सबसे बड़ा नाम है तो वह है बलबीर सिंह का।”

उन्होंने आगे बताया “वह हॉकी का एक बड़ा नाम थे और जब वह 1956 ओलंपिक गेम्स में कप्तानी करके भारत के लिए गोल्ड मेडल लाए तो मैं भी उस समय भारतीय दल का हिस्सा था और इस बात पर मुझे गर्व है। यह एक बड़ा नुकसान है, हम सहयोगी बनने से पहले दोस्त बन गए थे।”

साल 1960 में पंजाब के मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों (Partap Singh Kairon) द्वारा मिल्खा सिंह और बलबीर सिंह सीनियर को पंजाब स्टेट स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के साथ जोड़ा गया। उस समय कौन जानता था कि इन दो खिलाड़ियों का नाम पंजाब के ही नहीं बल्कि भारत के इतिहास में लिखा जाएगा।

मिल्खा सिंह का मानना है कि शुरूआती दौर में उनके बीच पेशेवर प्रतिद्वंदिता ज़रूर थी लेकिन उससे उनके रिश्ते पर कोई फर्क नहीं पड़ा। मिल्खा सिंह ने आगे बताया “वरिष्ठता में मैं बस उनसे नाम के लिए आगे था क्योंकि मैं उनसे 15-20 दिन पहले आया था। ख़ास बात तो यह थी कि इस सभी चीज़ों को हम अपने निजी संबंधों में नहीं लाए। हमने साथ में 30 साल काम किया है लेकिन हमारी दोस्ती उम्र-भर की है।

सरहद पार से बलबीर के लिए प्यार

बलबीर सिंह सीनियर के देहांत की खबर सुन कर जहां भारतीय खेल जगत शोकाकुल है वहीं दूसरी ओर सरहद पार से भी खिलाड़ियों ने इस दिग्गज को प्यार भेजने में कोई कमी नहीं छोड़ी। पकिस्तान से ताल्लुक रखने वाले खिलाड़ी जो बलबीर सिंह दोसांज के मित्र भी रहे हैं उन्होंने भी इस मौके पर अपना शोक ज़ाहिर किया। प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया (PTI) से बातचीत के दौरान पूर्व पाकिस्तान कप्तान समीउल्लाह खान (Samiullah Khan) (Flying Horse) ने कहा उनके खेल में गति, लचीलापन और निष्ठा थी। उनकी स्प्रिंट देखते ही बनती थी।

वहीं पाकिस्तान के लिए ओलंपिक गेम्स में गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतने वाले मोतीउल्ला खान (Motiullah Khan) ने भी बलबीर सिंह को याद करते हुए अपनी दोस्ती की यादों को ताज़ा किया। हिंदुस्तान टाइम्स से इस खिलाड़ी ने कहा “1956 ओलंपिक गेम्स के दौरान पंजाब से बहुत से खिलाड़ी हिस्सा ले रहे थे तो बलबीर सिंह सीनियर भी ओलंपिक विलेज में स्थित मेरे कैंप में आ जाते थे। उस साल हम भारत से फाइनल में हार गए थे और मुझे याद है कि बलबीर सिंह दोसांज और लेस्ली क्लॉडियस (Leslie Claudius) क्या खेले थे। हम सभी उनकी बहुत इज्ज़त करते हैं।”

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