भारत को हॉकी में तीन बार ओलंपिक गोल्ड दिलाने वाले दिग्गज खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर नहीं रहे

हॉकी के सबसे बेहतरीन फॉरवर्ड खिलाड़ियों में से एक 96 वर्षीय बलबीर सिंह बीते दो सप्ताह से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।

भारतीय हॉकी के दिग्गज बलबीर सिंह दोसांज (Balbir Singh Sr.) ने चंडीगढ़ के एक अस्पताल में दो सप्ताह से भी अधिक समय तक भर्ती रहने के बाद सोमवार को अंतिम सांस ली, उनके पोते कबीर ने इस बात की पुष्टि की है।

फोर्टिस अस्पताल के निदेशक अभिजीत सिंह ने प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) से बात करते हुए कहा, "आज सुबह करीब 6:30 बजे उनका निधन हो गया।"

बलबीर सिंह सीनियर (बेहद लोकप्रिय हॉकी खिलाड़ी) को तेज़ बुखार होने के बाद निमोनिया के संदेह के चलते 8 मई आईसीयू में भर्ती कराया गया था।

उनका COVID-19 टेस्ट भी किया गया, जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। अन्य टेस्ट के बाद पता चला कि उनके शरीर के कई अंग खराब हो चुके थे। कुछ दिनों पहले उनके मस्तिष्क के एमआरआई स्कैन में एक नए खून के थक्के का भी पता चला था और वह सेमी-कोमाटोज़ (कोमा जैसी स्थिति) अवस्था में थे।

बीते दो वर्षों में 96 वर्षीय इस दिग्गज खिलाड़ी को चौथी बार अस्पताल में भर्ती किया गया था। दो दिनों के भीतर उन्हें तीन बार दिल का दौरा पड़ा। पिछले साल की शुरुआत में उन्होंने ब्रोन्कियल निमोनिया से उबरने के लिए अस्पताल में करीब 100 से अधिक दिन बिताए थे।

हाल के महीनों में दो अन्य दिग्गज भारतीय खिलाड़ियों का निधन हो चुका है, सिंह तीसरे खिलाड़ी हैं जो हमारे बीच अब नहीं रहे हैं। महान और पूर्व ओलंपियन पीके बनर्जी (PK Banerjee) ने निमोनिया की वजह से मार्च में अंतिम सांस ली, और उनकी टीम के पूर्व साथी चुन्नी गोस्वामी (Chuni Goswami) की भी पिछले महीने ही मृत्यु हो गई थी।

भारतीय हॉकी के ‘गोल्ड’

बलबीर सिंह सीनियर को एक बेहतरीन फॉरवर्ड खिलाड़ी माना जाता है, जिन्होंने इस खेल को बेहद रोचक और दिलचस्प बनाने का भी काम किया। उनके प्रेरणादायक नेतृत्व ने भारतीय हॉकी टीम को 1948, 1952 और 1956 में ओलंपिक गोल्ड मेडल की दूसरी हैट्रिक लगाने में मदद की।

उन्होंने 1948 और 1952 के दोनों ओलंपिक फाइनल में गोल दागे और बाद में नीदरलैंड के खिलाफ उनके पांच गोल पुरुषों के ओलंपिक फाइनल में बनाए गए सबसे अधिक गोल के रिकॉर्ड के रूप में आज भी दर्ज हैं।

1956 के ओलंपिक फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय हॉकी का यह दिग्गज अपने दाहिने हाथ में फ्रैक्चर होने के बावजूद मैदान में उतरा और 1-0 की जीत के साथ देश को लगातार छठा ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाया।

बलबीर सिंह सीनियर बाद में भारतीय हॉकी टीम के कोच बने और 1975 में भारतीय हॉकी टीम ने उनके मार्गदर्शन में एकमात्र विश्व कप जीता। इससे पहले 1971 में भी उन्होंने टीम को विश्व कप में कांस्य पदक जीतने के लिए प्रेरित किया।

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