ओलंपिक के लिए इंडिया टीम में अपनी जगह पक्की करना चाहते हैं दिलप्रीत सिंह

ओलंपिक साल में टीम में वापसी करने वाले युवा स्ट्राइकर इस अवसर का लाभ उठाते हुए ओलंपिक के लिए चुनी जाने वाली टीम में जगह बनाना चाहते हैं।

भारतीय हॉकी टीम के स्ट्राइकर दिलप्रीत सिंह (Dilpreet Singh) 2018 सीज़न को कभी भी नहीं भूलना चाहेंगे।

जूनियर लेवल पर शानदार प्रदर्शन के दम पर अमृतसर के युवा खिलाड़ी को एक साल के भीतर सीनियर टीम में शामिल कर लिया गया, जहां उन्हें चार प्रमुख प्रतियोगिताओं में भी खेलते हुए देखा गया।

जहां कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स, चैंपियंस ट्रॉफी और विश्व कप की टीम में वो शामिल होने में सफल रहे थे, देखा जाए तो दिलप्रीत सिंह ने अपने शानदार खेल से टीम में अपनी जगह को अब तक सही साबित किया है, और जब भी उन्हें मौके मिले हैं उन्होंने शानदार खेल दिखाया है।

18 साल की उम्र में इस युवा खिलाड़ी ने बेहतरीन अंदाज में अपने करियर की शुरूआत की थी, मैच के दौरान उन्होंने कई गोल दागे और आक्रामक हॉकी में एक प्रभावशाली खिलाड़ी साबित हुए। लेकिन अपने घर में खेले गए विश्व कप में उन्हें निम्न स्तर के प्रदर्शन के बाद जूनियर टीम में वापस भेज दिया गया।

इसी समय के आसपास सीनियर टीम में एक बड़ा बदलाव हुआ और मुख्य कोच की भूमिका संभालने के लिए ऑस्ट्रेलियाई ग्राहम रीड (Graham Reid) को प्रबंधन के साथ जोड़ा गया।

ग्राहम रीड ने बढ़ाया हौसला

युवा और प्रतिभावान खिलाड़ियों पर भरोसा करने की अपनी क्षमता के लिए जाने जाने वाले, ऑस्ट्रेलियाई कोच जूनियर शिविर में नियमित रूप से जाते रहे। इसी दौरान शिविर में दौरे के दौरान उन्होंने दिलप्रीत सिंह को देखा।

युवा खिलाड़ी दिलप्रीत सिंह ने हॉकी इंडिया (Hockey India) के साथ बातचीत के दौरान कहा कि, "मुझे याद है, हमने उस दिन काफी समय तक बात की थी,"

"वो मेरी पृष्ठभूमि को समझना चाहते थे, कि मैं हॉकी में कैसे आया और वो मेरे खेल के बारे में और अधिक जानने के इच्छुक थे, हालांकि उन्होंने कहा कि उन्होंने मुझे विश्व कप के दौरान देखा था।"

मुख्य कोच से बात करते हुए दिलप्रीत सिंह ने प्रोत्साहन के संकेत दिए, उन्हें पता था कि लगातार कठिन परिश्रम का माध्यम ही वापसी करने का एकमात्र तरीका था।

सीनियर भारतीय हॉकी टीम से बाहर होने के बाद दिलप्रीत सिंह ने वापसी के लिए अपने खेल पर काम किया। फोटो: हॉकी इंडिया
सीनियर भारतीय हॉकी टीम से बाहर होने के बाद दिलप्रीत सिंह ने वापसी के लिए अपने खेल पर काम किया। फोटो: हॉकी इंडियासीनियर भारतीय हॉकी टीम से बाहर होने के बाद दिलप्रीत सिंह ने वापसी के लिए अपने खेल पर काम किया। फोटो: हॉकी इंडिया

उन्होंने कहा, "अगर मैं सीनियर कैंप में वापसी करना चाहता हूं तो उन्होंने मुझे कड़ी मेहनत करने, अपने रवैये में सुधार करने, अपने खेल में अधिक अनुशासित रहने और अपने फिटनेस स्तर पर काम करने को कहा।

"उन्होंने कहा कि अगर मैं इन क्षेत्रों में सुधार कर लेता हूं तो मुझे वापसी करने का मौका मिल सकता है और उन्होंने चेतावनी भी दी है कि इस अवसर को हथियाने के लिए कई दूसरे खिलाड़ी इंतजार कर रहे हैं।"

कोच की बात सुनने के बाद भारतीय स्ट्राइकर ने प्रभावशाली तरीके से अपने खेल पर काम करना शुरू कर दिया और टीम मैनेजमेंट को उन्हें ओलंपिक साल में सीनियर भारतीय हॉकी टीम में वापसी करने के लिए मजबूर कर दिया।

विश्व चैंपियंस के खिलाफ सीनियर टीम में वापसी

टीम से बाहर होने के बाद उन्हें सीनियर भारतीय हॉकी टीम में फिर से एक साल बाद विश्व चैंपियंस बेल्जियम के खिलाफ एफआईएच प्रो लीग में खेलने का मौका मिला। उस मैच में दिलप्रीत सिंह थोड़े असहज महसूस कर रहे थे लेकिन इस बार उनके लिए सीनियर खिलाड़ी साथ दिखाई दिए।

उन्होंने कहा, 'मैंने शुरू में दबाव महसूस किया लेकिन मनप्रीत सिंह (Manpreet Singh) ने मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए लंबी बातचीत की।'

“जब मुझे बेल्जियम के खिलाफ मैच के लिए बुलाया गया, तो उन्होंने मुझे विश्वास के साथ खेलने की सलाह दी और कहा कि जो आपको ज़िम्मेदारी दी गई है आप उसे निभाईए।”

"मैं काफी घबरा गया था और मुझे यकीन नहीं था कि मैं चुनौती के लिए तैयार हूं, खासकर विश्व चैंपियंस के खिलाफ खेलने के लिए... जहां कोई भी छोटी सी गलती हमें महंगी पड़ सकती थी लेकिन मनप्रीत सिंह और अन्य सीनियर्स ने मुझे वो आत्मविश्वास दिया।"

हालाँकि दिलप्रीत सिंह का मैच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने प्रतिभा की झलक दिखाई। लेकिन जो किसी भी टीम में सहयोग भावना होती है वो उन्हें भारतीय हॉकी टीम में मिलती है, वो टीम में लंबे समय तक अपनी जगह बनाए रखना चाहते हैं।

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