कोच रीड भारतीय हॉकी टीम के हरेक खिलाड़ी की प्रतिभा को निखार रहे हैं: गुरिन्दर सिंह

भारतीय हॉकी टीम को एक आक्रामक टीम बनाने वाले ऑस्ट्रेलियाई कोच के पास प्रत्येक खिलाड़ियों के लिए है अलग रणनीति

भारतीय हॉकी टीम के डिफ़ेंडर गुरिन्दर सिंह (Gurinder Singh) मानते हैं कि टीम इंडिया जो पहले कभी अपने रक्षात्मक खेल के लिए जानी जाती थी, उन्हें आक्रामक बनाने के पीछे कोच ग्राहम रीड (Graham Reid) की कड़ी मेहनत है।

पिछले साल अप्रैल में भारतीय हॉकी टीम के मुख्य कोच का पदभार संभालने वाले ग्राहम रीड ने भारतीय खिलाड़ियों को सिखाया कि वह किस तरह तुरंत आक्रामक रवैया अपना सकते हैं। ताकि खेल के शुरुआती मिनट में ही वे सर्किल के अंदर जाकर टीम की पकड़ मज़बूत कर सकें।

हॉकी इंडिया के साथ एक ताज़ा इंटरव्यू में गुरिन्दर सिंह ने कहा कि, ‘’मुझे यक़ीन है कि सभी को अब टीम में बदलाव साफ़ नज़र आ रहे होंगे। हमारा रवैया अब पहले से कहीं ज़्यादा आक्रामक हो गया है, और जिसकी वजह से अब हमारे पास मैदान पर गोल करने के मौक़े भी ज़्यादा हो जाते हैं।‘’

शुरुआती गोल करना अब आदत में शुमार

FIH प्रो लीग के शुरुआती मैचों में ये कई बार देखने को मिला कि किस तरह भारतीय खिलाड़ी अब तुरंत ही गोल कर लेते हैं। भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ियों के इस रवैये ने प्रतिद्वंदी टीमों को भी हैरान कर दिया था।

नीदरलैंड्स के ख़िलाफ़ अपने पहले ही मैच में गुरजंत सिंह (Gurjant Singh) ने मैच के 15वें सेकंड्स में ही टीम इंडिया को शुरुआती बढ़त दे दी थी। इसके बाद क्वार्टर ख़त्म होने से पहले ही रुपिन्दर पाल सिंह (Rupinder Pal Singh) ने पेनल्टी कॉर्नर के ज़रिए इस बढ़त को दोगुना कर दिया था।

लॉकडाउन में ख़ुद को फ़िट रखना ही भारतीय हॉकी टीम के डिफ़ेंडर गुरिन्दर सिंह की पहली प्राथमिकता है। तस्वीर साभार: हॉकी इंडिया
लॉकडाउन में ख़ुद को फ़िट रखना ही भारतीय हॉकी टीम के डिफ़ेंडर गुरिन्दर सिंह की पहली प्राथमिकता है। तस्वीर साभार: हॉकी इंडियालॉकडाउन में ख़ुद को फ़िट रखना ही भारतीय हॉकी टीम के डिफ़ेंडर गुरिन्दर सिंह की पहली प्राथमिकता है। तस्वीर साभार: हॉकी इंडिया

भारतीय हॉकी टीम ने ठीक ऐसा ही प्रदर्शन वर्ल्ड चैंपियन बेल्जियम के ख़िलाफ़ भी दोहराया था। इस बार मनदीप सिंह (Mandeep Singh) ने देश को सिर्फ़ दूसरे मिनट में ही बढ़त दिला दी थी।

इस सीज़न में अब तक भारत ने जितने भी मुक़ाबले खेले हैं, क़रीब क़रीब सभी में टीम इंडिया का यही आक्रामक रवैया नज़र आया है। जिसकी वजह गुरिन्दर सिंह मानते हैं कोच का टीम के हरेक खिलाड़ी के लिए अलग रणनीति।

‘’ये देखकर शानदार लगता है कि कोच न सिर्फ़ टीम की रणनीति पर ध्यान देते हैं बल्कि वह हरेक खिलाड़ी के खेल को बारीकी से पढ़ते हैं और उसके मुताबिक़ उन्हें बेहतर बनाते हैं। पिछले साल नवंबर में लगे नेशनल कैंप में भी कोच इसी तरह सभी खिलाड़ियों की प्रतिभा निखार रहे थे।‘’

25 वर्षीय इस भारतीय डिफ़ेंडर ने आगे कहा, “जब FIH ओलंपिक क्वालिफ़ायर्स के बाद दूसरे टूर्नामेंट की तैयारियों के लिए काफ़ी समय था, तब कोच सभी खिलाड़ियों के साथ समय बिता रहे थे और हरेक खिलाड़ी का खेल निखारने में कड़ी मेहनत कर रहे थे।‘’

गुरिन्दर को लगता है कि प्रत्येक खिलाड़ी का विकास टीम की ज़रूरत

कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी की वजह से भले ही इस समय हॉकी पर भी ब्रेक लग गया हो, लेकिन टीम इंडिया के खिलाड़ियों की सीखने की ललक कभी कम नहीं होती।

गुरिन्दर भी इस समय का भरपूर फ़ायदा उठाते हुए अपने खेल को बेहतर करने की कोशिश में जुटे हैं। वह इस समय स्पोर्ट्स ऑथरिटी ऑफ़ इंडिया (SAI) के हॉस्टल में सेल्फ़ आइसोलेशन पर हैं।

2016 FIH जूनियर वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया के सदस्य रह चुके गुरिन्दर ने कहा, “ख़ुद को फ़िट रखना मेरी पहली प्राथमिकता है, इस लॉकडाउन की अवधि में इसके लिए ख़ूब एक्सरसाइज़ कर रहा हूं जिसमें स्टिक वर्क ड्रिल प्रमुख है।‘’

‘’ओलंपिक में भारत के लिए खेलना मेरा बचपन से ही एक सपना रहा है और मुझे उम्मीद है कि मैं इस बार टोक्यो 2020 के दल का हिस्सा रहूंगा। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि मैं देश को पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाऊं।‘’

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