ब्रेक ने खिलाड़ियों को खेल सुधारने का मौक़ा दिया: चिंगलेनसना सिंह

भारतीय मिडफ़ील्डर मानते हैं कि जब इस समय को बड़ी प्रतियोगिता नहीं हो रही है तो ऐसे में हॉकी खिलाड़ियों के पास अपने खेल को सुधारने का पर्याप्त समय है।

लेखक सैयद हुसैन ·

भारतीय हॉकी टीम के मिडफ़ील्डर चिंगलेनसना सिंह (Chinglensana Singh) मानते हैं कि भारतीय हॉकी खिलाड़ियों को अपनी वह फ़ॉर्म वापस लाने में थोड़ा समय लग सकता है जिसके ज़रिए उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में अपना स्थान पक्का किया था। और इस साल की शुरुआत में FIH प्रो लीग में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया था।

कोरोना वायरस (COVDI-19) महामारी की वजह से क़रीब पांच महीने बाद भारतीय हॉकी खिलाड़ियों ने बेंगलुरु स्थित स्पोर्ट्स ऑथिरिटी ऑफ़ इंडिया (SAI) सेंटर पर अभ्यास शुरू कर दिया है। लेकिन अभी मैदान में वही पुराने रंग में लौटने में खिलाड़ियों को समय लगेगा।

हॉकी इंडिया के साथ बातचीत में चिंगलेनसना सिंह ने कहा, “अभी इसमें समय लगेगा (कम से कम दो से तीन महीने) जब हम सभी वह पुरानी फ़ॉर्म में लौट पाएं जो इस साल की शुरुआत में थी। ये समय हमारे लिए काफ़ी अहम है।“

“ये बहुत ही राहत की बात है कि कोच ग्राहम रीड (Graham Reid) लगातार खिलाड़ियों से बात कर रहे हैं और उन्हें पूरा समय दे रहे हैं। इससे हमारे ऊपर बिल्कुल भी दबाव नहीं है।“

“हमें ये पता चल जाएगा कि हम कहां और कैसे खड़े हैं जब इस साल के अंत में होने वाले मैचों में हम खेलेंगे, हमें बताया गया है कि इस साल के आख़िर में मैच खेले जाएंगे। लिहाज़ा आने वाले समय में हमें पूरी तरह से अपने ऊपर शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से ध्यान देना चाहिए। साथ ही साथ हमें अपने खेल और स्पीड को और भी बेहतर बनाने के ऊपर केंद्रित होना चाहिए।“

भारतीय हॉकी टीम ने बेंगलुरु स्थित SAI सेंटर पर अभ्यास शुरू कर दिया है।

कम प्रतियोगिताओं का होना फ़ायदेमंद

इस साल नवंबर में एशियन चैंपियंस ट्रॉफ़ी प्रस्तावित थी, जो भारतीय हॉकी टीम का ब्रेक के बाद पहला टूर्नामेंट हो सकता था।

लेकिन इस प्रतियोगिता को महामारी की वजह से अब मार्च 2021 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है, लिहाज़ा इस साल अब भारत के लिए एकमात्र प्रतिस्पर्धी इवेंट मलेशिया का दौरा हो सकता है। हालांकि उसे भी अभी तक सरकार की ओर से हरी झंडी नहीं मिली है।

चिंगलेनसना सिंह के मुताबिक़ इस समय का खिलाड़ियों को फ़ायदा उठाना चाहिए और इसे एक अवसर की तरह देखना चाहिए।

“अच्छी बात ये है कि इस साल के अंत तक हमें किसी प्रतियोगिता में नहीं खेलना है, लिहाज़ा हमारे पास पर्याप्त समय है कि हम अपने पुराने फ़ॉर्म में लौट आएं। कोच ग्राहम रीड भी जल्दबाज़ी में नहीं हैं और उन्होंने हमसे कहा है कि टीम इस साल के बाद ही गंभीर तौर पर ट्रेनिंग शुरू करेगी।“

अपने अंदर झांकने का है सही समय

मार्च में जब लॉकडाउन की घोषणा हो गई थी तो ज़्यादातर एथलीट्स अपने अपने घर लौट गए थे, लेकिन भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी और स्टाफ़ SAI सेंटर में ही थे।

जिसकी वजह से खिलाड़ियों को अपनी फ़िटनेस पर काम करने का समय मिल गया, चिंगलेनसना सिंह मानते हैं कि यही चीज़ उन्हें और सभी खिलाड़ियों को मनोवैज्ञानिक तौर पर भी मदद करेगी।

“प्रतिस्पर्धी हॉकी से ब्रेक मिलने की वजह से आपको समय मिल जाता है कि आप अपने अंदर झांक सकें और अपनी कमियों को समझ सकें और उसे ठीक करते हुए अपने खेल को बेहतर बना सकें।“

2014 एशियाई खेलों के विजेता ने अपनी बात ख़त्म करते हुए कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि हम पहले से भी मज़बूत और ताक़तवर टीम की तरह वापसी करेंगे।“