संयोग से शुरू हुआ एक सफ़र जिसने पीआर श्रीजेश को शीर्ष पर पहुंचा दिया

हॉकी में संयोग से अपना करियर बनाने के बाद भारतीय गोलकीपर ने यह सुनिश्चित किया कि वह हर मौक़े का फ़ायदा उठाते हुए दुनिया के सबसे उम्दा शॉट-स्टॉपर में से एक बनें।

भारत का केरल एक ऐसा राज्य है, जिसने हॉकी के खेल में अपनी पकड़ तब मज़बूत की जब गोलकीपर पीआर श्रीजेश (PR Sreejesh) ने अपने करियर की सीढ़ियों को चढ़ना शुरू किया। इस खेल के शीर्ष तक पहुंचने का उनका सफ़र काफ़ी रोचक और चौंकाने वाला रहा है।

तिरुवनंतपुरम के जीवी राजा स्पोर्ट्स स्कूल में दाख़िला लेने वाले 12 वर्षीय श्रीजेश काफ़ी उलझन में थे, एक युवा के तौर पर वह यह निर्णय नहीं ले पा रहे थे कि वह किस खेल का चुनाव करें।

एक बार उन्होंने अपने कुछ साथियों को शॉट पुट थ्रो करते हुए देखा था, तो उसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने स्पोर्ट्स स्कूल में दाख़िला ले लिया। इसके बाद शॉट पुटर बनने के विचार के साथ ही यह युवा धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा।

पीआर श्रीजेश ने भारतीय क्रिकेटर जेमिमाह रॉड्रिक्स (Jemimah Rodrigues) और स्मृति मंधाना (Smriti Mandhana) द्वारा आयोजित वेब शो डबल ट्रबल पर अपने शुरुआती जीवन पर चर्चा करते हुए कहा, "वे लोग मुझसे बहुत बेहतर थे। उन लड़कों को देखकर मुझे अहसास हुआ कि मैं उनके आस-पास भी नहीं था और इसलिए मैं इसमें अपना करियर नहीं बना सका।"

तब उन्होंने वॉलीबॉल कोर्ट की ओर अपना रुख़ किया। लेकिन साढ़े चार से पांच फ़िट लंबे लोगों के साथ खड़े होने के बाद श्रीजेश को जल्द ही अहसास हो गया कि वह इस खेल में भी कुछ ख़ास नहीं कर पाएंगे।

उनके पास अगला विकल्प फ़ुटबॉल था। हालांकि, केरल में इस खेल के शानदार इतिहास ने युवा पीआर श्रीजेश को डरा दिया। उन्होंने कहा, “आप जानते हैं कि केरल में फ़ुटबॉल कितना लोकप्रिय है। आप हर जगह कुछ लोगों गेंद पर किक मारते हुए आसानी से देख सकते हैं। इसलिए मैंने इस खेल से भी दूरी बना ली।”

संयोग से चुना हॉकी का खेल

पीआर श्रीजेश की इसी बीच पास के ही मैदान पर नज़र पड़ी, जहां कुछ लड़के और लड़कियां हॉकी स्टिक से गेंद पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रहे थे।

इस खेल में अपनी शुरुआत को याद करते हुए उन्होंने कहा, “वे सभी इस खेल के बेसिक्स [मूल बातें] सीख रहे थे। इसलिए मैं वहां गया और उस पर अपना हाथ आज़माया। यह मज़ेदार था,  यह आसान नहीं था,  इसकी अपनी कुछ मुश्किलें थीं। लेकिन यह काफी रोचक था।”

“फिर मैंने देखा कि कुछ लोग एक कोने में खड़े थे - सभी पैड पहने हुए थे और गेंद को लात मार रहे थे। मुझे लंबे समय तक दौड़ना कभी भी पसंद नहीं था। इसलिए मुझे लगा कि यह मेरे लिए सबसे अच्छा काम रहेगा। इसमें मुझे बहुत ज्यादा भागना नहीं होगा। इसी तरह मैंने अपने करियर का चुनाव किया।”

हालांकि पीआर श्रीजेश करियर उनकी पसंद की बजाए कई मौकों और संयोग से बना। 32 वर्षीय श्रीजेश अब गोलकीपिंग में महारत हासिल कर चुके हैं और वह भारतीय हॉकी टीम की पहली पसंद हैं।

पीआर श्रीजेश ने अपने दिल और आत्मा को गोलकीपिंग में महारत हासिल करने पर लगा दिया और आज वह इसमें सर्वश्रेष्ठ हैं। तस्वीर साभार: हॉकी इंडिया
पीआर श्रीजेश ने अपने दिल और आत्मा को गोलकीपिंग में महारत हासिल करने पर लगा दिया और आज वह इसमें सर्वश्रेष्ठ हैं। तस्वीर साभार: हॉकी इंडियापीआर श्रीजेश ने अपने दिल और आत्मा को गोलकीपिंग में महारत हासिल करने पर लगा दिया और आज वह इसमें सर्वश्रेष्ठ हैं। तस्वीर साभार: हॉकी इंडिया

पीआर श्रीजेश को करियर की बुलंदियां छूते हुए उनकी टीम के पूर्व साथी सरदार सिंह ने बेहद क़रीब से देखा है।

जूनियर स्तर पर दोनों ही खिलाड़ियों ने एक साथ शुरुआत की। सरदार सिंह और पीआर श्रीजेश ने एक दशक से भी अधिक समय तक ड्रेसिंग रूम को साझा किया और फिर साल 2018 में सिंह ने इस खेल से संन्यास ले लिया।

एक ओर जहां पीआर श्रीजेश अपने खुले मिज़ाज के चलते टीम में जल्द ही घुल-मिल गए, तो वहीं सरदार सिंह को टीम में जगह बनाने में काफ़ी वक़्त लग गया और इसके लिए उन्हें काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी।

33 वर्षीय ने नेशनल टीम के चुनाव के दिनों को याद करते हुए कहा, “लंबे समय तक खेलने के बाद मुझे अहसास हुआ कि भारत में हमारे पास प्रतिभा की कमी नहीं है। अगर आप अच्छा नहीं खेलते हैं तो आपकी जगह लेने के लिए हमेशा कोई न कोई तैयार रहता है। ऑफ द फ़ील्ड इक्वेशन ने मेरे खेल को काफ़ी प्रभावित किया है। इसलिए इसपर मैंने हमेशा काम किया है।”

सरदार सिंह भारत के एक शानदार सेंटर-हॉफ खेलने वाले हॉकी खिलाड़ी रहे हैं।
सरदार सिंह भारत के एक शानदार सेंटर-हॉफ खेलने वाले हॉकी खिलाड़ी रहे हैं।सरदार सिंह भारत के एक शानदार सेंटर-हॉफ खेलने वाले हॉकी खिलाड़ी रहे हैं।

अधिक प्रयास कर हासिल की महारत

बीते बर्षों में किए गए अपने प्रयासों के चलते सरदार सिंह (Sardar Singh) भारत के सबसे बेहतरीन सेंटर-हाफ खिलाड़ियों में से एक बन गए। यही नहीं, पूर्व कप्तान ने कई प्रसिद्ध जीत में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई है।

कई लोग मानते हैं कि क़ुदरत ने उन्हें इस खेल से नवाज़ा है, जबकि सरदार सिंह कुछ और ही मानते थे। मशहूर नामधारी सिख समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सरदार सिंह ने कहा, “मुझे एक बात का अहसास हुआ है कि हर हाल में टीम के साथ काम करना है, अगर आप अपने खेल में सुधार करना चाहते हैं तो आपको अधिक प्रयास करने की ज़रूरत होती है।”

उन्होंने आगे कहा, “मेरे पूरे करियर के दौरान यह कुछ ऐसा है जिसपर मैंने विश्वास किया है और साथ ही इसपर काम भी किया है। मैं अपने खेल पर काम करने के लिए सत्र ख़त्म हो जाने के बाद भी एक्स्ट्रा 30 मिनट देता था। मैं इस समय में कभी अपने कौशल तो कभी अपनी गति पर या हवा में आ रही गेंद को जगह पर रोकने की प्रैक्टिस करता था। जहां भी मुझे कमी महसूस होती, मैं उस क्षेत्र को चुनता और उसपर काम करता।”

अपने पूरे करियर के दौरान अपना ज़्यादा से ज़्यादा समय मैदान पर बिताने के बाद अब सरदार सिंह यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वह अपना समय परिवार के साथ बिताएं।

उन्होंने कहा, “जब आप एक सक्रिय खिलाड़ी होते हैं तो आपको अपने परिवार के साथ रहने का समय कम मिलता है। आप एक वर्ष के 365 दिनों में से 300 दिन टीम के साथ होते हैं या यात्रा कर रहे होते हैं। मुझे लगता है कि मैंने पहली बार अपने माता-पिता के साथ इतना समय बिताया है।”

वहीं, पीआर श्रीजेश टीम के बाकी साथी खिलाड़ियों के साथ बेंगलुरु के भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) साउथ सेंटर में हैं। इस दिग्गज भारतीय खिलाड़ी ने कहा, ‘’इस दौरान टीम को मैदान पर जाने से रोक दिया गया है, इसलिए वे सभी इस महामारी के बीच खुद को स्वस्थ और सक्रिय रखने पर काम कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, “शुक्र है कि यह जगह इतनी बड़ी है। यह प्रॉपर्टी लगभग 90 एकड़ की है… अभी क्योंकि ट्रेनिंग नहीं चल रही है, इसलिए हमें 2-3 लोगों के छोटे समूह में रहते हुए अपने फ़िटनेस रूटीन पर काम करने की अनुमति दी गई है।

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