रिक चार्ल्सवर्थ: “टोक्यो 2020 के फाइनल में भिड़ सकते हैं भारत और ऑस्ट्रेलिया”

रिक चार्ल्सवर्थ के हिसाब से हॉकी इंडिया लीग ने भारतीय हॉकी के स्तर को बढ़ाया है और यह टीम कहीं भी अपने हुनर का प्रदर्शन कर सकती है।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

भारत में हॉकी के खेल को पसंद तो किया जाता ही था लेकिन पिछले कुछ सालों से हॉकी खिलाड़ियों ने अपने खेल के स्तर को बढ़ाकर इस खेल का महत्व और भी बढ़ा दिया है। 2008 ओलंपिक गेम्स में क्वालिफाई न कर पाने के बावजूद इस भारतीय हॉकी टीम ने अपने मनोबल को गिरने नहीं दिया और तब से लेकर अब तक वे दुनिया के हर कोने में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रही है।

2012 ओलंपिक गेम्स में क्वालिफाई कर इस टीम ने एक बार फिर वापसी की। इसके बाद 2016 रियो गेम्स में भी क्वालिफाई करने के साथ प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन भी किया।

रियो गेम्स में क्वार्टरफाइनल तक का सफ़र तय करने वाली भारतीय हॉकी टीम (Indian Men’s Hockey Team) ने पिछले 4 सालों में लगभग हर सीज़न में उम्दा प्रदर्शन दिखाते हुए अपने खेमे को मज़बूती प्रदान की है। 2020 ओलंपिक गेम्स की बात की जाए मनप्रीत सिंह (Manpreet Singh) इस भारतीय टीम की अगुवाई करते दिखेंगे। तो

ऑस्ट्रेलिया के रिक चार्ल्सवर्थ का मानना है कि हॉकी इंडिया लीग ने भारतीय हॉकी को बढ़ावा दिया है।

कहते हैं न कि प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती, इसी तरह ऑस्ट्रेलिया हॉकी के दिग्गज रिक चार्ल्सवर्थ (Ric Charlesworth) की माने तो टोक्यो 2020 के फाइनल में ऑस्ट्रेलियाई हॉकी टीम (Australia Hockey Team) का सामना भारतीय हॉकी टीम से हो सकता है। यह बोल अपने आप में ही भारतीय हॉकी के लिए बहुत अहम हैं।

दिल्ली में हुए एक इवेंट के दौरान चार्ल्सवर्थ ने कहा कि “मुझे लगता है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया मेडल जीतने के मुख्य दावेदार हैं। हालांकि ओलंपिक का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। देखते हैं कि आगे क्या होता है।”

“मैं भारत और ऑस्ट्रेलिया को ओलंपिक के फाइनल में देखना चाहता हूं। अगर ऐसा हुआ तो यह  फाइनल ख़ास और दिलचस्प होगा।”

रिक चार्ल्सवर्थ को लगता है कि 2020 ओलंपिक गेम्स के गोल्ड मेडल मैच में भारत और ऑस्ट्रेलिया एक दूसरे के खिलाफ भिड़ सकते हैं।

हॉकी इंडिया लीग भारतीय हॉकी के लिए अहम

चार्ल्सवर्थ का मानना है कि भारतीय हॉकी को हॉकी इंडिया लीग (Hockey India League) से भी बढ़ावा मिला है। हॉकी इंडिया लीग की बात की जाए तो इस प्लेटफार्म ने भारतीय हॉकी खिलाड़ियों को विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका दिया जिस वजह से उनका खेल बेहतर हुआ है। साल 2013 में शुरुआत कर हॉकी इंडिया लीग ने काफी नाम बटोरा और इसे साल 2018 तक खेला गया, हालांकि इस लीग को फिलहाल रोक दिया गया है।

इस ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ने आगे बताया कि “मेरे हिसाब से HIL ने भारतीय हॉकी टीम की सोच को बदला और उन्हें यकीन दिलाया कि हां, हम किसी भी टीम से भिड़ सकते हैं। मुझे लगता है कि एचआईएल को बढ़ावा देना चाहिए ताकि भारतीय हॉकी वर्ल्ड हॉकी से कंधे मिला कर चले।

भारतीय हॉकी टीम को ‘रेस्ट’ की ज़रूरत नहीं

रिक चार्ल्सवर्थ का मानना है कि “भारतीय हॉकी को रुकना नहीं चाहिए क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय हॉकी का स्तर बहुत ऊंचा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट का रुझान ज़्यादा है क्योंकि दोनों ही मुल्क इसमें बहुत अच्छे हैं, लेकिन हमे यह समझना चाहिए कि क्रिकेट केवल आधा दर्जन देशों द्वारा ही खेला जाता है।”

“हॉकी में अच्छा करने के लिए बहुत मेहनत लगती है। अंतराष्ट्रीय स्तर बहुत ज़्यादा प्रतिस्पर्धिक है। आपको हमेशा मेहनत करनी चाहिए, हमेशा बढ़ते रहना चाहिए। 50 साल पहले भारत हॉकी का प्रर्वतक था, लेकिन बीच में यह टीम रास्ते से भटक गई, हालांकि अब भारतीय हॉकी फिर से पटरी पर आ गई है।

चार्ल्सवर्थ का मानना है कि भारतीय टीम के लिए ग्राहम रीड (Graham Reid) के हाथ सही और मज़बूत हैं। उन्होंने आगे बताया कि “रीड एक अच्छे कोच हैं। जब मैं युवा था तो हमारे सभी कोच उपमहाद्वीप से आते थे, हमने हॉकी यहीं से सीखी है। ऑस्ट्रेलियाई लोगों का भारतीय हॉकी से जुड़ाव एक समझदारी की चीज़ है।”कोच