भारतीय हॉकी टीम कर रही है पुराने मुकाबलों का आकलन

SAI में सेल्फ-आइसोलेशन कर रही भारतीय मेंस हॉकी टीम टोक्यो गेम्स को ज़हन में रख अपने कारवां को आगे बढ़ा रही है और हर खिलाड़ी एकजुट होकर बेहतरी के पथ पर चल रहा है।

COVID-19 के प्रकोप ने पूरे विश्व को रोक दिया है। यातायात से लेकर खेल जगत में कोई भी गतिविधि नहीं हो रही है। ऐसे में भारतीय मेंस हॉकी टीम (Indian Men’s Hockey Team) वीडियो द्वारा अपने पुराने मुकाबलों का आकलन कर रही है।

इंडो-एशियन न्यूज़ सर्विस एजेंसी से बात करते हुए भारतीय गोलकीपर पीआर श्रीजेश (PR Sreejesh) ने बताया, “हम अपने पुराने मुकाबलों का आकलन कर रहे हैं। हमारे पास myTPA नामक सॉफ्टवेयर है जो हमें खेल का विश्लेषण करने में मदद करता है। हम अपने कमरों में बैठकर फीडबैक देते हैं और कोच द्वारा पूछे गए सवालों का ऑनलाइन जवाब भी देते हैं।”

यह बात सही है कि कोई भी खिलाड़ी फ़ील्ड या कोर्ट में नहीं उतर सकता तो ऐसे में वीडियो के ज़रिए विश्लेषण करना एक बुधिमत्ता का निर्णय है। हिंदुस्तान टाइम्स से हुई बातचीत में कप्तान मनप्रीत सिंह (Manpreet Singh) ने बताया, “जिन क्षेत्रों में हमे बेहतर होना है हम उनपर ज़्यादा ध्यान देते हैं और उन्हें सुधारने के लिए अलग-अलग पैटर्न भी तैयार कर रहे हैं।”

इन सभी प्रयासों में कोच ग्राहम रीड (Graham Reid) भी कहां पीछे रहने वाले थे और उन्होंने भी इन सेशन में बढ़चढ़ कर भाग लिया। कोच ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया, “इस समय हम खेल के ज्ञान को बढ़ा रहे हैं और उन सभी चुनौतियों की तैयारी कर रहे हैं जो टोक्यो ओलंपिक गेम्स में सामने आ सकती हैं।”

भारतीय मेंस और वूमेंस हॉकी टीम बेंगलुरु के स्पोर्ट्स अथोरिटी ऑफ़ इंडिया (Sports Authority of India SAI) में सेल्फ आइसोलेशन के साथ ट्रेनिंग भी कर रहे हैं। लॉकडाउन से पहले यह दोनों टीमें अभ्यास के लिए कैंपस पहुंची थी लेकिन अब उन्हें वही रहकर भारतीय सरकार के निर्देशों का पालन करना पड़ रहा है।

श्रीजेश ने आगे कहा, “हम कैंटीन में भी दायरा बनाकर रखते हैं और एक टेबल पर दो ही लोग बैठते हैं। हम हाइजीन रख रहे हैं ताकि कोई भी खिलाड़ी इस इन्फेक्शन के चपेट में न आए। खिलाड़ी फिटनेस पर भी ध्यान दे रहे हैं और दो-दो लोग एक साथ होकर व्यायाम करते हैं।” न

ओलंपिक गेम्स पर नज़र

ओलंपिक गेम्स और भारतीय मेंस हॉकी टीम की बात करें तो उनका रिकॉर्ड देखते ही बनता है। अपनी झोली में 8 ओलंपिक गोल्ड मेडल लेकर यह टीम जापान की सरज़मीन पर अगले साल जुलाई में उतरेगी। इतना ही नहीं ओलंपिक गेम्स में भारतीय टीम ने एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़ मेडल भी हासिल किया है। हालांकि पिछले कुछ सालों में इस खेल में गिरावट देखी गई है और इस दल ने आखिरी ओलंपिक मेडल मॉस्को गेम्स 1980 में जीता था।

पटरी से उतरे इस दल ने एक बार फिर अपने कारवां को संभाला है और वे अब एक अच्छी फॉर्म का मुज़ायरा पेश कर रहे हैं। एफआईएच प्रो लीग (FIH Pro League) के चलते इन सभी खिलाड़ियों ने अपने से उंचे दर्जे की टीमों के खिलाफ दो-दो हाथ किए हैं जो कि लाभदायक साबित हुआ है।

दो हार, दो जीत और दो डॉ के साथ भारतीय टीम के खाते में 10 अंक जुड़ गए हैं और वे इस समय टेबल में चौथे पर काबिज़ हैं। टोक्यो गेम्स को मद्देनज़र रखते हुए यह टीम पिछले एक साल से उसके अभ्यास में जुटी है और मेडल जीतने की रेस में लगातार खुद को पुख्ता करती जा रही है।

श्रीजेश ने आगे अलफ़ाज़ साझा किए “मानसिक तौर पर सब ओलंपिक गेम्स के लिए तैयार हो रहे हैं। हमें फोकस बनाए रखना होगा, हम पहले दिन से ही मेहनत कर रहे हैं और हम जानते हैं कि अगर कुछ बड़ा करना है तो हमे 365-400 दिनों तक लगातार मेहनत करनी होगी।” 

यह ओलंपिक भारतीय हॉकी टीम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संस्करण बहुत से खिलाड़ियों का आखिरी संस्करण हो सकता है। ऐसे में हर कोई जीत पर नज़र बनाए खुद को कठिन परिस्थितियों में डाल कर परख रहे हैं।

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