अच्छे नतीजे सुधरी हुई मानसिकता का प्रतिबिंब होते हैं: शोर्ड मारिन

एक प्रेरक वक्ता और मुख्य कोच शोर्ड मारिन मुश्किलों से निपटने के लिए टीम के भीतर एक मजबूत मानसिक शक्ति का निर्माण करने में विश्वास करते हैं।

लेखक रितेश जायसवाल ·

जब साल 2017 में शोर्ड मारिन (Sjoerd Marijne) ने भारतीय हॉकी महिला टीम के मुख्य कोच के रूप में पदभार संभाला, तो यह टीम बहुत अच्छी स्थिति में नहीं थी।

टीम तीन दशकों बाद अपने पहले ओलंपिक खेलों का अनुभव लेकर लौटी थी और तीन गोल दागकर भी निचले स्थान पर रही इस टीम से कुछ सीनियर हॉकी खिलाड़ियों ने भी संन्यास ले लिया था।

यह कोई बहुत अच्छी स्थिति नहीं थी। लेकिन डच खिलाड़ी और एक प्रेरक वक्ता मारिन ने इस चुनौती को स्वीकार किया।

शोर्ड जानते थे कि उन्हें जल्द से जल्द अपने काम में लग जाना होगा। उस वक्त टीम में खेल कौशल का स्तर लाजवाब था और आने वाले महीनों में महज़ फिटनेस पर काम किया जा सकता था। ऐसे में शोर्ड मारिन का मानना था कि एक जिस बड़े बदलाव की जरूरत थी वह मानसिकता थी।

प्रेरक वक्ता शोर्ड मारिन का मानना है कि आधी लड़ाई तो एक बेहतर मानसिक दृष्टिकोण के साथ ही जीती जा सकती है। फोटो: हॉकी इंडिया

वह यह सुनिश्चित करना चाहता थे कि मैच के दौरान कभी भी लड़कियां कमज़ोर न पड़ें। हालांकि इस मानसिकता को बदलने में कुछ समय जरूर लगा, लेकिन भारतीय हॉकी टीम ने इस बात को गांठ बांधकर दिमाग में क़ैद कर लिया।

शोर्ड ने ओलंपिक चैनल को बताया, “मेरी सोच के मुताबिक यह सब मानसिकता पर ही निर्भर करता है। और हां, हमने उस दिशा में कुछ बड़े कदम उठाए हैं। अन्यथा हम क्वालिफाई (ओलंपिक के लिए) नहीं कर सकेंगे।”

लीडर्स को किया तैयार

एक चीज जो शोर्ड मारिन युग में अलग है, वह यह है कि उन्होंने पिच के लिए लीडर्स को तैयार किया है। डच खिलाड़ी ने हमेशा यही कोशिश की है कि खिलाड़ी मैदान पर खुद ही हर समस्या का समाधान खोजें।

इसपर भारतीय ड्रैग फ्लिकर गुरजीत कौर (Gurjit Kaur) ने बताया, “हर कोच का स्वभाव और शैली अलग-अलग होती है। उनके पास खिलाड़ियों के लिए एक अलग स्टाइल है।”

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“वह चाहते हैं कि हम जिस समस्या का सामना करें, उसका हल खुद ही खोजें। हां, हमारी जरूरत के समय वह पिच पर हमेशा हमारी मदद करने के लिए मौजूद होते है, लेकिन शोर्ड हमसे ही किसी हल की उम्मीद करते हैं।”

गुरजीत कौर ने आगे कहा, “वह हमेशा हमारे सुझाव सुनते हैं और जहां भी जरूरत होती है वहां मदद करते हैं। वह ग्राउंड पर हमारी समस्याओं को हल ढूंढ़ने में भी मदद करते हैं और वह सच में एक अच्छे मार्गदर्शक हैं।”

भारतीय महिला हॉकी टीम में यह बदलाव हाल ही में हुए दुनिया की कुछ सर्वश्रेष्ठ टीमों से मुकाबलों में देखने को मिले हैं।

फिर चाहे वह अपने घरेलू मैदान में मौजूदा ओलंपिक चैंपियन ग्रेट ब्रिटेन से मुक़ाबला रहा हो या 2018 FIH महिला विश्व कप के कांस्य पदक विजेता स्पेन के खिलाफ मुक़ाबला, भारतीय टीम ने हमेशा कड़ी चुनौती पेश की है।

लेकिन पिछले साल FIH ओलंपिक क्वालिफ़ायर में यूएसए के खिलाफ खेले गए दो मैचों में एक अलग ही नज़ारा देखने को मिला।

पहले मैच में भारतीय महिला टीम को गोल करने के लिए एक प्रमुख अमेरिकी मिडफील्ड को बाईपास करने की रणनीति अपनाते हुए देखा गया, वहीं दूसरे मैच में टीम के शानदार डिफेंस और दबाव में भी बेहतर करने वाला प्रदर्शन देखने को मिला। और शोर्ड मारिन का मानना है कि लड़कियों ने प्रदर्शन में काफी सुधार किया है।

शोर्ड ने कहा, “दो-तीन साल पहले टीम आमतौर पर हार मान लेती थी। लेकिन अब वे एक-दूसरे से बात करते हैं और फिर मैच को पूरी तरह से बदल देते हैं और यह सब उनकी बेहतर मानसिकता की वजह से संभव हुआ है।”

टीम के मुख्य कोच इस मानसिक दृढ़ता पर ही भरोसा करते हैं और उनका कहना है कि इसी के चलते टीम ने महामारी के दौरान तमाम अनिश्चितताओं में भी अपनी तैयारी को जारी रखा है।

उन्होंने कहा, "हम इस साल जुलाई में (ओलंपिक के लिए) तैयार थे। लेकिन मुझे लगता है कि हमारे पास एक युवा टीम है और वह धीरे-धीरे बेहतर ही होगी। हम एक दूसरे के साथ जितना अधिक रहते हैं, उतना ही अच्छा है। हमारे पास बहुत समय है और मैं वास्तव में इस बात से बहुत खुश हूं। यह हमें और मजबूत बनाएगा।”