अपने आदर्श खिलाड़ियों की मदद से खुद को निखारना चाहती हैं उदिता

शुरू में हैंडबॉल खेल को पसंद करने वाली हरियाणा की एथलीट ने केवल पांच साल पहले हॉकी को अपनाया है।

भारतीय हॉकी टीम की उभरती हुई स्ट्राइकर उदिता ने साल 2015 से पहले ये सोचा भी नहीं था कि वह हॉकी में अपना करियर बनाएंगी।

एक बार जब स्कूल में उनके हैंडबॉल कोच लगातार 3 दिन की छुट्टी पर रहे तो उन्हें मजबूरी में हॉकी के खेल को चुनना पड़ा और उनके इस फैसले ने उनकी जिंदगी ही बदल दी।

2015 में हॉकी में आने के बाद, हरियाणा की इस लड़की ने अगले साल एशिया कप में भारतीय अंडर -18 महिलाओं की हॉकी टीम को कांस्य पदक दिलाने में अपना अहम योगदान दिया।

उदिता ने हॉकी इंडिया से बातचीत में बताया, "यह अद्भुत है, जीवन आपको खुद आपके लक्ष्य तक ले जाता है। मैंने अचानक ही हॉकी को चुना और मुझे जल्दी ही समझ आ गया कि मैं इस खेल में अच्छी हूं। मुझे लगता है कि 2016 का अंडर-18 एशिया कप मेरे लिए एक बड़ा मोड़ था।”

22 साल की इस खिलाड़ी ने कहा कि उस टूर्नामेंट में मेरी प्रतिभा को सही पहचान मिली और आखिरकार मैंने सीनियर टीम में भी जगह बना ली।

यूरोप में हुए चार देशों के टूर्नामेंट में उदिता का प्रदर्शन शानदार रहा। साल 2018 एशियन गेम्स में इंडोनेशिया के खिलाफ भारत तरफ से पहला गोल करने के बाद ये खिलाड़ी टीम की नियमित सदस्य है।

कौशल में सुधार

युवा उदिता के लिए अगला कदम आसान नहीं होने वाला है। उनका मुकाबला नवनीत कौर (Navneet Kaur), लालरेमसियामी (Lalremsiami), रानी रामपाल (Rani Rampal), वंदना कटारिया (Vandana Katariya) और अन्य से है।

इस समय पूरे देश में लॉकडाउन चल रहा है और भारतीय फॉरवर्ड बेंगलुरु स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण में अपनी टीम के साथ अपनी ख़ामियों पर काम कर रही हैं।

भारतीय स्टार ने कहा कि लॉकडाउन के समय मैं अपने पिछले मैचों की फुटेज देख रही हूं और कुछ चीजों पर बारीकी से ध्यान दे रही हूं, मैं मैदान पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करना चाहती हूं।

भारत की तरफ से 32 मैचों का प्रतिनिधित्व करने वाली उदिता ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि मैं अपनी स्किल्स में जल्द सुधार कर लूंगी और एक बेहतर खिलाड़ी बनूंगी।

आदर्श खिलाड़ियों के साथ रहना

उदिता इस समय भारतीय कप्तान रानी रामपाल और स्ट्राइकर वंदना कटारिया के साई सेंटर में टीम के दिग्गजों के साथ नियमित रूप से प्रशिक्षण कर रही हैं।

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राष्ट्रीय टीम के लिए इस जोड़ी ने लगभग 500 मैच खेले है और करीब 182 गोल किए हैं। ये दोनों ही खिलाड़ी उदिता की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

उदिता ने कहा, “मैं रानी और वंदना को अपना आदर्श मानती हूं और उनसे काफी कुछ सीख रही हूं। वे दोनों ही काफी अनुभवी खिलाड़ी हैं और जब भी मैं टीम में होती हूं तो हमेशा वह मेरी मदद करती हैं। मैं बहुत करीब से ये देखती हूं कि कैसे वह प्रैक्टिस करती हैं और मैच से पहले रणनीति बनाती हैं। मैं आशा करती हूं कि एक दिन मैं भी उनकी तरह बन सकूं।”

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