अपने खेल में लगातार सुधार करने की दिशा में काम कर रही हैं वंदना कटारिया

भारतीय स्ट्राइकर का कहना है कि आक्रमक होने के बावजूद टीम में उनकी भूमिका सिर्फ गोल करने की नहीं है।

लंबे समय तक वंदना कटारिया (Vandana Katariya) भारतीय महिला हॉकी टीम के आक्रमण की महत्वपूर्ण खिलाड़ी रही हैं।

स्ट्राइकिंग सर्कल के अंदर एक डिफेंस-स्प्लिटिंग पास के अंत तक पहुंचने की उनकी क्षमता हो या डिफेंडरों के सामने रास्ता बनाना हो, 28 साल की इस खिलाड़ी ने ख़तरा लेने से पहले कभी संकोच नहीं किया। अक्सर इस खिलाड़ी ने अपनी हॉकी स्टिक पर भरोसा किया है।

हॉकी इंडिया से बातचीत के दौरान वंदना ने कहा कि “मैं पिछले कुछ सालों में निडर रही हूं।” उत्तर प्रदेश की रहने वाली इस स्ट्राइकर को हाल के दिनों में भारतीय हॉकी टीम में युवा प्रतिभाओं को देखने के बाद अपने खेल में बदलाव करना पड़ा है

वंदना ने बताया कि "लेकिन समय के साथ, मैंने महसूस किया है कि आप उस तरह से नहीं खेल सकते हैं, खासकर जब खेल इतना विकसित हो गया है। मुझे भी विकसित होना था। मैंने टीम और साथियों के साथ खेलने का आनंद लिया है।”

भारतीय स्ट्राइक ने कहा कि“उदाहरण के लिए, जब आप एक स्ट्राइकर के रूप में भी सर्कल के अंदर होते हैं, तो यह हमेशा लक्ष्य पर टारगेट करना सबसे अच्छी बात नहीं होती है। उस निर्णय को करने के लिए आपके पास एक दूसरा विकल्प भी होना चाहिए। कभी-कभी गेंद को अपने साथी खिलाड़ी को पास करना या सिर्फ पेनल्टी कॉर्नर जीतना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। ”

मेंटर की भूमिका

टीम की ज़रूरतों के अनुरूप खेल को ढालना एक बात है। वंदना कटारिया जिनके पास 240 से अधिक इंटरनेशनल मैचों का अनुभव है उन्हें लगता है कि युवा खिलाड़ी भी उन्हीं की ज़िम्मेदारी है क्योंकि उन्हें टीम में रहते हुए काफी समय हो गया है।

साल 2007 में सीनियर टीम की तरफ से पहला मैच खेलने वाली इस स्ट्राइकर ने कहा कि “मेरे पास ऐसा अनुभव है जो युवा खिलाड़ियों के लिए मददगार हो सकता है। मैं उनसे अलग-अलग परिस्थितियों के बारे में बात करती रहती हूं, जिनका वे मैदान पर सामना करेंगे। मैं उन्हें बताती हूं कि युवा खिलाड़ियों को क्या करना चाहिए।”

इस हॉकी खिलाड़ी ने कहा कि “मैं ये उनसे ये नहीं कहती कि जो मैं कह रही हूं, उसे करो, मैं उनके विजन के बारे में बात करती है और उन्हें सलाह देती हो कि वह कोई भी फैसला कैसे लें।”

टीम इंडिया का वीडियो विश्लेषण

जब कोविड-19 महामारी के कारण पूरे देश में लॉकडाउन लगा उस समय भारतीय महिला हॉकी टीम बेंगलुरु के साउथ सेंटर में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में टोक्यो ओलंपिक के लिए अपनी तैयारियों में लगी थी।

हालांकि टीम के लिए मैदान पर जाना प्रतिबंधित कर दिया है। वंदना कटारिया ने कहा कि वे अपनी फिटनेस पर काम ध्यान देने के साथ ही अन्य टीमों का विश्लेषण करके अधिकांश समय बिता रही हैं।

भारतीय स्ट्राइकर ने बता कि “हम मैदान पर नहीं जा सकते लेकिन हमारा दिमाग हमेशा वहीं रहेगा। हम अपने फिटनेस के स्तर को सबसे बेहतर बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि जब हम वापस आ जाएं, तो हम अपने विरोधियों की तुलना में तेज़ हों।”

साल 2013 जूनियर वुमेंस वर्ल्ड कप कांस्य पदक विजेता ने कहा कि “एक और पहलू जिसके बारे में बात की गई है कि हम दुनिया भर की विभिन्न टीमों का विश्लेषण कैसे कर सकते हैं।” वंदना ने बताया कि हम कोचिंग स्टाफ की मदद से कई फुटेज देख रहे हैं और उससे हमें काफी मदद भी मिल रही है।

क्या आपको यह आर्टिकल पसंद आया? इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें!