FIH राइज़िंग स्टार ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड ने लालरेमसियामी की ओलंपिक तैयारियों में लगाया पंख 

भारतीय फॉरवर्ड ने ये भी बताया कि व्यक्तिगत दुख के बावजूद उन्होंने कैसे सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में चिली के ख़िलाफ़ भारत का प्रतिनिधित्व किया।

भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार फॉरवर्ड लालरेमसियामी (Lalremsiami) ने पिछले साल जून में ये साबित किया था कि वह मानसिक तौर पर कितनी मज़बूत हैं। जब उन्होंने अपने पिता की मृत्यु के बावजूद FIH सीरीज़ टूर्नामेंट में खेलते रहने का फ़ैसला किया और चिली के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में मैदान में खेल रहीं थीं।

प्रतियोगिता के दौरान ही 19 वर्षीय इस खिलाड़ी ने अपने पिता लाथानसंगा ज़ोटे को खो दिया था और काफ़ी भावुक थीं, लेकिन तब भी उन्होंने टीम के साथ ही रहने का फ़ैसला किया था।

लालरेमसियामी ने उस हादसे को याद करते हुए कहा, ‘’ये सेमीफ़ाइनल मैच के दौरान की बात है, मैच से कुछ ही देर पहले मेरे पिता जी का देहांत हो गया था और वह मेरी ज़िंदगी का सबसे मुश्किल पल था। साथ ही साथ देश के लिए खेलना भी उतना ही अहम था, और मैंने टीम के लिए खेलने का फ़ैसला किया।‘’

भारत ने वह सेमीफ़ाइनल 4-2 से अपने नाम कर लिया था, और इस जीत ने भारत को ओलंपिक क्वालिफ़ायर का टिकट दिला दिया था। जिस परिस्थिति में उन्होंने देश के लिए खेलते रहने का फ़ैसला किया था, उसने भारतीय टीम को ओलंपिक में क्वालिफ़ाई करने के लिए प्रेरित कर दिया था।

2017 में भारतीय टीम के लिए डेब्यू करने के बाद से लेकर अब तक लालरेमसियामी काफ़ी आगे आ चुकी हैं। अब तो उनका खेल भी एक बेहतरीन स्तर पर पहुंच गया है, इसी महीने की शुरुआत में FIH राइज़िंग स्टार ऑफ़ द ईयर का पुरस्कार पाने वाली लालरेमसियामी मानती हैं कि ये उनके पिता के लिए गर्व का पल है।

इस अवार्ड को जीतने के दौरान लालरेमसियामी ने अर्जेंटीना की जुलिएटा जानकुनस (Julieta Jankunas) और नीदरलैंड की फ़्रेडरीक मातला (Frederique Matla) को पीछे छोड़ा था। भारतीय महिला स्ट्राइकर को विश्व की ऊभरती हुई स्टार के तौर पर सबसे ज़्यादा वोट हासिल हुए, इसका फ़ैसला ऑनलाइन पोल के ज़रिए हुआ। जहां नेशनल फ़ेडरेशन्स (50%), द प्रेस (25%) और प्रशंसकों (25%) ने लालरेमसियामी को वोट देते हुए विजयी बना।

लालरेमसियामी मानती हैं कि इस FIH राइज़िंग स्टार ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड को जीतने के बाद उनकी ओलंपिक तैयारियों को बहुत फ़ायदा होने वाला है।

इस महिला फॉरवर्ड ने कहा, ‘’मुझे इस अवॉर्ड को जीतने की ज़रा भी उम्मीद नहीं थी, क्योंकि कई दिग्गजों को इस अवॉर्ड के लिए नामित किया गया था। लेकिन जब ये मुझे मिला तो मैं ख़ुशी से झूम उठी, मैं इसके लिए ऊपर वाले का शुक्र अदा करती हूं। साथ ही साथ हॉकी इंडिया और FIH को भी मेरे प्रति उनके प्यार और समर्थन के लिए धन्यवाद देती हूं। ये अवॉर्ड मुझे टोक्यो 2020 की तैयारियों के लिए भी प्रोत्साहित करेगा कि मैं अपना और बेहतर दे सकूं।‘’

लालरेमसियामी ने आगे कहा कि कोच की बातों और उनकी मेहनत का असर भी टीम पर पड़ रहा है, और कोच की भूमिका टीम की क़ामयाबी में बेहद अहम है।

‘’एक खिलाड़ी के तौर पर आप मैदान में हों या मैदान के बाहर, बहुत ज़रूरी होता है कि आप अनुशासित रहें। जब हम मैदान पर होते हैं तो कोच को अपनी पसंद की संरचनाएं बताने की जरूरत होती है। और हमें उसका पालन करना चाहिए।‘’

भारतीय महिला हॉकी टीम ने 2016 ओलंपिक के लिए अपने इतिहास में सिर्फ दूसरी बार क्वालीफाई किया था। जहां रियो 2016 में उन्हें ग्रुप स्टेज में ही बाहर होना पड़ा था, और फिर उन्हें छठे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। लेकिन टोक्यो 2020 में महिला टीम इंडिया इससे कहीं आगे जान के इरादे से तैयारियां कर रही हैं।

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