शोर्ड मरिन की आक्रामकता ने हमारी टीम को बेख़ैफ़ बना दिया है: नवनीत कौर

लगातार दूसरी बार ओलंपिक में क्वालिफाई करने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की फॉरवर्ड को लगता है कि निडर रवैये के कारण टीम ऐसा कर पाईं।

भारतीय हॉकी का इतिहास काफी महान रहा है। पिछली शताब्दी में दुनिया की सर्वश्रेष्ट टीमों में शुमार टीम इंडिया ने ओलंपिक में 8 गोल्ड, एक सिल्वर और कांस्य पदक जीता हुआ है। ये सभी बातें केवल पुरुष टीम पर ही लागू होती है।

भारतीय महिला हॉकी टीम ने पहली बार ओलंपिक में हिस्सा साल 1980 में मास्को में लिया और इसके बाद उन्हें इसका 36 साल इंतजार करना पड़ा। साल 2016 रियो ओलंपिक में महिला हॉकी टीम ने हिस्सा लिया। अब एक बार फिर भारतीय महिला हॉकी टीम ने ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया और दिखाया कि समय अब बदल रहा है।

भारतीय फॉरवर्ड नवनीत कौर (Navneet Kaur) का मानना है कि ये बदलाव पिछले कुछ सालों में इसलिए आया है क्योंकि हमने अपने रवैये में बदलाव किया है।

हॉकी इंडिया से बातचीत में नवनीत ने बताया कि कई महत्वपूर्ण मैचों को जीतने के अलावा कई ऐसी बात है, जो इस बदलाव का कारण है। इसमें मुख्य कोच शोर्ड मरिन (Sjoerd Marijne) की भी तारीफ होनी चाहिए।

नवनीत ने बताया कि “उन्हें आक्रामकता पसंद है। मरिन को लगता है कि हमारी टीम अच्छी गति से हॉकी खेल सकती हैं। पहले हम टॉप टीम जैसे ग्रेट ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने से घबराते थे। हमारी पास मैच जीतने का विश्वास नहीं था, यही कारण है हमारी गिनती कमजोर टीम के रूप में होती थी”।

नवनीत कौर के लिए साल 2019 शानदार रहा था, उनके नाम थे 10 गोल। तस्वीर साभार: हॉकी इंडिया
नवनीत कौर के लिए साल 2019 शानदार रहा था, उनके नाम थे 10 गोल। तस्वीर साभार: हॉकी इंडियानवनीत कौर के लिए साल 2019 शानदार रहा था, उनके नाम थे 10 गोल। तस्वीर साभार: हॉकी इंडिया

फिटनेस में किया सुधार

इसके अलावा भारतीय महिला हॉकी टीम के प्रदर्शन में आए बदलाव का कारण उनकी फिटनेस में सुधार भी है। अब सभी खिलाड़ी फिटनेस के प्रति पहले से सजग है।

नवनीत ने बताया कि मुझे भी लगता है कि हमारे प्रदर्शन में सुधार का बड़ा कारण फिटनेस भी है। सभी लड़कियाँ अब फिटनेस के महत्व को जानती हैं।  हम अभी भी बदलाव के दौर से गुज़र रहे हैं, हम कड़ी ट्रेनिंग कर रहे हैं, जैसे लाइट जिम सेशन, स्ट्रेचिंग और स्विमिंग पुल में रिकवरी। अगले हफ्ते से हम अपनी ट्रेनिंग को और कड़ा बनाएँगे।

ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करना भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए छोटा लक्ष्य था, हां ये सपने को पूरा करने की तरफ पहला कदम जरूरी है। पिछले ओलंपिक में आखिरी स्थान पर रहना ये इस टीम की काबिलियत को नहीं दर्शाता और सभी टीम से पदक की उम्मीद कर रहे हैं।

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