युवराज वाल्मीकि ने अपने भाई देविंदर के साथ वायरल होने वाली फ़ोटो का खोला राज़

देविंदर वाल्मीकि ने भारत के 2015 हॉकी वर्ल्ड लीग सेमीफ़ाइनल के दौरान अपने भाई युवराज वाल्मीकि के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया था।

अनुभवी हॉकी खिलाड़ी और मुंबई के फ़ॉरवर्ड, युवराज वाल्मीकि (Yuvraj Walmiki) ने खुलासा किया है कि उन्होंने भारत के 2015 हॉकी वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल अभियान के दौरान भाई देविंदर वाल्मीकि (Devinder Walmiki) के साथ राष्ट्रगान गाते हुए अपनी तस्वीर खिंचवाई थी।

दोनों वाल्मीकि भाई टूर्नामेंट में नियमित रूप से खेल रहे थे, जहां बड़े भाई युवराज भारत के लिए अपना 50 वां मैच खेल रहे थे, तो वहीं देविंदर देश के लिए सिर्फ अपना दूसरा मैच खेलने उतरे थे।

विश्व के 17वें नंबर के पोलैंड के खिलाफ अपने दूसरे ग्रुप मैच से पहले, युवराज ने अपने भाई को राष्ट्रगान के दौरान अपने साथ खड़े होने के लिए कहा था।

युवराज वाल्मीकि ने टेबल टेनिस खिलाड़ी मुदित दानी (Mudit Dan) के साथ एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन के दौरान कहा, "मैच से पहले, मैं उनसे कह रहा था कि चाहे हम जीतें या हारें, मुंबई के अखबारों में केवल मेरी तस्वीर लगी होनी चाहिए।"

"तो मज़े के लिए, मैंने उससे कहा कि मेरे बगल में (राष्ट्रगान के दौरान) खड़े रहो ताकि वो भी अखबारों में आ जाए।

पिछले मैच में फ्रांस पर शानदार जीत हासिल करने वाली भारतीय टीम पोलैंड के खिलाफ भी फेवरेट मानी जा रही थी। भारत ने वो मैच भी 3-0 से जीत लिया, दोनों वाल्मीकि भाइयों ने स्कोरशीट में अपना नाम दर्ज कराया।

जहां युवराज वाल्मीकि ने बीरेंद्र लाकड़ा (Birendra Lakra) से गेंद लेकर पोलिश गोलकीपर अरकादिउज़ माटूसज़ाक (Arkadiusz Matuszak) से बचाते हुए गेंद को गोल के अंदर भेज दिया और पहला गोल कर दिया, तो उनके भाई देविंदर ने चिंगलेनसना सिंह (chinglensana Singh) के शॉट की दिशा को बदलकर पोलिश गोल के अंदर डाल दिया और भारत की जीत सुनिश्चित कर दी। भाइयों के अलावा, कप्तान सरदार सिंह (Sardar Singh) ने भारत के लिए एक अन्य गोल किया था।

हालांकि, मीडिया ने मैच से पहले क्लिक किए गए राष्ट्रगान गाते हुए दोनों भाइयों के फोटो को छापने का फैसला किया, जिन्होंने भारत के लिए गोल भी किया था। उन्होंने कहा, "अगले दिन, वो तस्वीर सभी समाचार पत्रों में थी और ये इतनी वायरल हुई कि उन्होंने बाकी टूर्नामेंट के लिए मेरे साथ खड़े होने का फैसला किया, ये वास्तव में एक अद्भुत अनुभव था।"

युवराज वाल्मीकि के लिए ये ख़ास पल था। उन्होंने कहा, "एक साधारण परिवार से आना और फिर अपने देश का प्रतिनिधित्व करना वास्तव में विशेष और महत्वपूर्ण था क्योंकि मैं उस समय भारत के लिए अपना 50 वां मैच खेल रहा था।"

2011 इंटरनेशनल सुपरसीरीज़ में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेलते हुए युवराज वाल्मीकि
2011 इंटरनेशनल सुपरसीरीज़ में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेलते हुए युवराज वाल्मीकि2011 इंटरनेशनल सुपरसीरीज़ में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेलते हुए युवराज वाल्मीकि

अख़बार की कटिंग ने बदल दी ज़िंदगी

मुंबई के मरीन लाइन्स स्टेशन के पास 16x16 की झोंपड़ी में जन्मे युवराज और देविंदर वाल्मीकि ने अपने माता-पिता को संघर्ष करते देखा था। हालाँकि 10 वर्षीय युवराज वाल्मीकि का जीवन तब बदल गया जब उनके स्कूल के दोस्त ने उन्हें एक अखबार की क्लिपिंग दिखाई।

उन्होंने कहा, "मेरे एक क्लासमेट के पिता हॉकी स्टेडियम के डॉक्टर थे, हमारे पास अखबार में अपने पिता की क्लिप दिखाई" तब उन्होंने अपने आप से कहा कि "मैं भी हॉकी खेलना चाहता हूं।"

शुरू में प्रसिद्ध हॉकी कोच और द्रोणाचार्य अवार्ड से सम्मानित मार्जबोन पटेल की देख-रेख में खेलते हुए और मुंबई रिपब्लिकन टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए, युवराज वाल्मीकि ने 2010 में सीनियर टीम के लिए खेलना शुरू किया। अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर में युवराज वाल्मीकि ने 2011 एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में स्वर्ण पदक, 2011 हॉकी चैंपियनशिप में रजत पदक और 2012 में सुल्तान अजलान शाह में कांस्य पदक जीता है।

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