भारतीय जेवलिन थ्रोअर अनु रानी का मक़सद 70 मीटर के साथ टोक्यो का टिकट पाना है 

एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीत चुकी अनु रानी टोक्यो 2020 में क्वालिफ़ाई करने के लिए कर रही हैं कड़ी मेहनत।

भारत में एथलेटिक्स की दुनिया सितंबर महीने से पटरी पर आ जाएगी। ऐसे में हर एथलीट अभ्यास कर अपनी फॉर्म और फिटनेस को बेहतर करने में जुटा हुआ है। इस दौड़ में भारतीय जेवलिन थ्रोअर अनु रानी (Annu Rani) भी पीछे नहीं हैं।

नेताजी सुभाष नेशनल स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में फंसी यह जेवलिन थ्रोअर अब एक नई उर्जा के साथ मैदान में अभ्यास और ट्रेनिंग करने उतरेगी। ग़ौरतलब है कि दो महीने के अंतराल के बाद ही यह सब संभव हो पाया है।

कई नई उम्मीदें और सपने लेकर अनु रानी संघर्ष करती नज़र आएंगी। उनका सबसे पहला मकसद भारतीय जेवलिन टीम में आना है और नीरज चोपड़ा  (Neeraj Chopra) और शिवपाल सिंह (Shivpal Singh) की ही तरह टोक्यो 2020 का हिस्सा बनना है।

एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए अनु ने कहा, “64 मीटर की थ्रो फेंकना ही मेरा पहला लक्ष्य है, क्योंकि इसी के बलबूते पर मैं टोक्यो गेम्स के लिए क्वालिफाई कर पाउंगी। मेरे कोच का मानना है और साथ ही मुझे भी विश्वास है कि मैं एक 70 मीटर थ्रोअर बन सकती हूं। मुझे अपनी तकनीक को बेहतर करना होगा और साथ ही जेवलिन को और आगे फेंकने के लिए मुझे और ज़्यादा ताकत लगानी होगी।”
अब जब अनु भी ट्रेनिंग से बहुत समय से दूर हैं तो ऐसे में वह पहले अपने शरीर को काम में लाकर धीरे-धीरे आगे बढ़ेंगी ताकि उन्हे किसी भी तरह की समस्या या इंजरी न हो।

दिमाग शांत हो तो सब है आसान

भारतीय महिला जेवलिन थ्रोअर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर 62.43 मीटर है और यही भारत का नेशनल रिकॉर्ड भी है। ग़ौरतलब है कि यह कीर्तिमान अनु ने दोहा में हुई वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दौरान हासिल किया था और इतना ही नहीं इस थ्रोअर ने एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल पर भी अपने नाम की मुहर लगाई थी।

यह परिणाम उन्हें ‘शार्प फोकस’ और ‘स्मार्ट ट्रेनिंग’ की वजह से ही मिला और 2018 एशियन गेम्स में निराशा हाथ लगने के बाद उन्होंने अपनी तकनीकों में भी बदलाव किया था।

उन्होंने आगे कहा, “मैंने बहुत मेहनत की है लेकिन मेरा दिमाग मेडल जीतने के तनाव में था।” हालांकि यह दौर इस एथलीट के लिए मुश्किल साबित हो रहा था लेकिन उनके पिता अमरपाल सिंह और भाई उपेंद्रे ने उनका काफी साथ दिया।

“मैंने लक्ष्य को बढ़ाना सीखा और साथ ही तनाव से लड़ना भी। मेरा काम है कि मैं अपना 100 प्रतिशत दूूं और उसके बाद परिणाम खुद मिल जाएंगे।”

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