जुरगेन क्लॉप भारतीय कोचों के लिए एक बेहतर रोल मॉडल हैं: रसकिन्हा

स्टार हॉकी खिलाड़ी वीरेन रसकिन्हा और एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज ने सरकार से नेशनल और विदेशी कोचों पर विश्वास करने के लिए कहा।

जुरगेन क्लॉप (Jürgen Klopp) की क्षमता ने इस साल लिवरपूल (Liverpool) को प्रीमियर लीग का चैंपियन बनाया। इसका ये बड़ा उदाहरण है कि अगर कोच पर विश्वास किया जाए तो वो क्या कर सकता है।

लिवरपूल ने 30 वर्षों के बाद लीग जीती और ये क्लब के साथ क्लॉप की रणनीति के कारण संभव हो पाया।J

पूर्व भारतीय हॉकी स्टार वीरेन रसकिन्हा (Viren Rasquinha)  को लगता है कि यहां भारत के खेल प्रशासकों के लिए एक संदेश है। भारत में विभिन्न खेलों के कोच के अनुबंध को बढ़ाने की घोषणा के बाद वीरेन रसकिन्हा ने कहा कि क्लॉप एक बड़ा उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि कोचों पर विश्वास करना होगा।

उन्होंने आगे कहा कि “आपको हमेशा अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए कोच को थोड़ा समय देने की आवश्यकता होती है। ये रातों-रात नहीं होता है।” 

"मेरा मतलब है, आप क्लॉप (लिवरपूल के कोच) को ही देख लीजिए देखें। जब वो आए, उन्होंने कहा कि वो चार साल में एक खिताब जीतेंगे। उन्होंने अपने चौथे साल के प्रीमियर लीग के चौथे सत्र में चैंपियंस लीग जीती।’’

उन्होंने कहा “इसलिए, काम करने में समय लगता है, खासकर टीमों के साथ। आपको रातों-रात सफलता नहीं मिलती।”

जब 2015 में जुरगेन क्लॉप ने पदभार संभाला, तब लिवरपूल उस प्रीमियर लीग सीज़न में आठवें स्थान पर रहा, तो अगले दो सीज़न में वो चौथे स्थान पर रही थी, 2018/19 में उप-विजेता बनी और कुछ दिन पहले चैंपियन। इस तरह क्लब ने निरंतर शानदार प्रदर्शन किया है।

ओलंपिक के लिए भी भारत की इसी तरह की सोच होनी चाहिए।

ओलंपिक टास्क फोर्स का सुझाव

खेल मंत्रालय ने गुरुवार को टोक्यो खेलों के स्थगन के मद्देनज़र सितंबर 2021 तक कोचों के मौजूदा अनुबंधों को बढ़ाने की घोषणा की।

मंत्रालय ने कहा कि वो ओलंपिक के दौरान कोचिंग प्रक्रिया में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए चार साल का अनुबंध करेंगे।

हालांकि, नियुक्तियों की समीक्षा वार्षिक रूप से की जाएगी और कोच के प्रदर्शन के आधार पर की जाएगी, जिसका प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में एथलीटों का प्रदर्शन आधार होगा।

सरकार के इस फैसले की पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान वीरेन रसकिन्हा ने सराहना की। आपको बता दें कि अधिकारियों को रियो 2016 के बाद ओलंपिक टास्क फोर्स की स्थापना से भी खुश थे, जिसको स्थापित करने की सिफारिश उन्होंने ने ही की थी।

वीरेन रसकिन्हा ने फोन पर ओलंपिक चैनल से कहा कि, "ओलंपिक टास्क फोर्स प्रमुख सिफ़ारिशें में से एक है, जिसका मैं हिस्सा था। जिसका मकसद देश में कोचों की स्थिति में सुधार करना था।"

“ओलंपिक चैंपियन और चैंपियन टीमों के निर्माण कोच का सबसे महत्वपूर्ण योगदान होता है। हमारे कोचों में स्थिरता इस काम में और मदद करती है, विशेष रूप से ओलंपिक साल या उसके आस-पास के समय में, हम इसमें बहुत ज्यादा बदलाव नहीं कर सकते हैं।”

वीरेन रसकिन्हा ने कहा कि अगर वो कोच को मौका देते हैं तो धैर्य रखना होगा।

सिस्टम द्वारा कोचों को सपोर्ट करने की ज़रुरत है

इस बीच, भारतीय ट्रैक एंड फील्ड स्टार अंजू बॉबी जॉर्ज (Anju Bobby George) की माने तो ये फैसला दिमाग से लिया गया है।

“कोच देश के खेल भविष्य को आकार देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सिस्टम को कोचों का समर्थन करना और उनकी देखभाल करना चाहिए। मैं इस फैसले को सही दिशा में एक कदम के रूप में देख रही हूं।”

“हम हमेशा चैंपियन का जश्न मनाते हैं, लेकिन उस सपोर्ट सिस्टम के बारे में कभी नहीं पूछते हैं जिसने चैंपियन बनाने में मदद की।’’

उन्होंने कहा, 'हमें उन लोगों की देखभाल शुरू करने की जरूरत है जो एथलीटों को अपने करियर में ऊँचाइयों तक पहुंचने में मदद करते हैं। इनकी सिस्टम में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है।‘’

IOA के एथलीट आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुकी अंजू बॉबी गेरोगे ने कहा कि, "मुझे लगता है कि हम इसे कोचों पर छोड़ देना चाहिए।"

ओलंपिक के लिए तैयार रहने की ज़रूरत

हालांकि कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के कारण अनिश्चितता अभी भी बड़ी है, कोचों को जल्द ही सीजन की तैयारी के लिए कारोबार में उतरना होगा।

हालांकि आने वाले महीनों में उनका काम और कठिन होने वाला है, वीरेन रसकिन्हा मानते हैं कि जब भी एथलीटों को प्रतिस्पर्धा के लिए भेजा जाता है, तो कोचों को ये सुनिश्चित करना चाहिए की वो अपने बेहतर फॉर्म में हों।

उन्होंने कहा, "बहुत कम लोग हैं जो महामारी में कुछ कर सकते हैं।"

उन्होंने कहा, '' हमें 23 जुलाई 2021 से शुरू होने वाले ओलंपिक की तैयारी शुरू करनी होगी। भविष्य में क्या होगा? यह हमारे नियंत्रण से बाहर है। लेकिन समय आने पर आपको तैयार होने की जरूरत है। एथलीटों और हमारी तैयारियों के लिए बहाने नहीं हो सकते।”

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