वाहबिज़ भरूचा भारतीय रग्बी महिला टीम में कप्तान के साथ एक फ़िज़ियोथेरेपिस्ट भी हैं

वाहबिज़ भरूचा पेशे से एक फ़िज़ियोथेरेपिस्ट हैं और वह खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में उसका अच्छे तरीके से इस्तेमाल के लिए अभ्यास कर रहीं हैं।

वाहबिज़ भरूचा (Vahbiz Bharucha) वर्तमान में भारतीय रग्बी महिला टीम की कप्तान हैं और वह पेशे से एक फिजियोथेरेपिस्ट (physiotherapist) भी हैं, जो खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (Khelo India University Games) में अपने साथियों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। इसके साथ ही भरूचा खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में अपनी फिजियोथेरेपिस्ट का अभ्यास भी कर रहीं हैं।  

इस समय रग्बी मुकाबला कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT)  (Kalinga Institute of Industrial Technology) के मैदान हो रहा है। जहां 26 वर्षीय ये योग्य फिजियोथेरेपिस्ट (KIIT) के मैदान में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में रग्बी खिलाड़ियों की मदद कर रही है।

वाहबिज़ भरूचा ने कहा, "मेरे पैंरों में खुजली हो रही है कि मैं मैदान पर गेंद को चकमा दे सकूं या बेहतरीन तरीके से टैकल कर सकूं, लेकिन मैं यहां भुवनेश्वर में मुख्य रूप से तीन दिन के लिए चिकित्सा सहायता के लिए आईं हूं"।

रग्बी टीम से ड्रॉप होने से लेकर कप्तान बनने का सफ़र

वाहबिज़ भरूचा के नेतृत्व में भारतीय रग्बी महिला टीम ने कांस्य पदक हासिल किया था। यह पदक फिलीपींस में एशियाई महिला डिविजन एक रग्बी चैंपियनशिप (Asian women’s Division 1 Rugby Championship) में हासिल हुआ था। हालांकि वहीं, 2016 में वाहबिज़ भरूचा को टीम से बाहर कर दिया गया था, क्योंकि फिजियोथेरेपी के अभ्यास के कारण उनका प्रदर्शन काफी समय तक खराब हो गया था।T

वाहबिज़ भरूचा पेशे से एक फ़िज़ियोथेरेपिस्ट हैं और वह KIUG में उसका अच्छे तरीके से इस्तेमाल के लिए अभ्यास कर रहीं हैं। तस्वीर साभार: KIUG
वाहबिज़ भरूचा पेशे से एक फ़िज़ियोथेरेपिस्ट हैं और वह KIUG में उसका अच्छे तरीके से इस्तेमाल के लिए अभ्यास कर रहीं हैं। तस्वीर साभार: KIUGवाहबिज़ भरूचा पेशे से एक फ़िज़ियोथेरेपिस्ट हैं और वह KIUG में उसका अच्छे तरीके से इस्तेमाल के लिए अभ्यास कर रहीं हैं। तस्वीर साभार: KIUG

वाहबिज़ भरूचा ने खेल के बारे में बात करते हुए कहा, "एक समय था, जब मैंने खेल पर ही ध्यान केंद्रित किया था, लेकिन मेरे फिजियोथेरेपी की वजह से मुझे बाहर रहना पड़ा। मैंने अपनी ज़िंदगी में अच्छा समय भी देखा है और बुरा समय भी देखा है, जब मुझे भारतीय टीम से बाहर बैठना पड़ा।" उन्होंने आगे कहा, "लेकिन अब मुझे अपने खेल और फिजिथेरिपी को बैलेंस करने में काफी मदद मिल गई है, जहां मैं पहले हाफ में फिजियोथेरेपी और दूसरे हाफ के बाद एक एथलीट के रूप में प्रशिक्षण लेती हूं"।

खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में धारणाओं को बदलना है जरूरी

वाहबिज़ भरूचा ने युवा एथलीटों के बारे में बात करते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी गेम्स में युवा एथलीटों को समझ में नहीं आ रहा है कि अपने शरीर की देखभाल कैसे करें। वहीं, भरूचा युवा एथलीटों को इस बारे में जानकारी देना चाहती हैं ताकि वह अपने आपको कैसे फिट रखें।

उन्होंने आगे कहा, भारतीय रग्बी खेल में ऐसा बहुत कुछ होता है, जो असल में नहीं होना चाहिए और इसे अनदेखा भी नहीं किया जा सकता है। टीम में कुछ एथलीटों को इसलिए लिया जाता है कि उनके पास खेलने की गति और काया बेहतरीन होती है। इसके साथ ही खेल में चोट को पूरी तरह से रोकने की कोई संभावना नहीं है।"                   

वाहबिज़ भरूचा ने बुधवार को खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में एथलीटों के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु पर प्रकाश डाला और कहा, "चोट लगने के कारण एथलीट को मैदान छोड़ना ठीक है, लेकिन इससे आगे खेल के लिए कोई खतरा नहीं है। और हमें इसी सोच को बदलना है।’’

क्या आपको यह आर्टिकल पसंद आया? इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें!