जिन्सन जॉनसन को लॉकडाउन की वजह से खुद को बेहतर करने का मिला मौका

मिडिल-डिस्टेंस धावक टोक्यो का टिकट हासिल करने के लिए अपनी चोट से उबरकर वापस आ गए थे, लेकिन खेलों के स्थगन ने उन्हें और बेहतर होने का मौका दिया है।

COVID-19 महामारी के कारण अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने टोक्यो ओलंपिक को एक साल के लिए स्थगित करने का फैसला किया है, लेकिन भारतीय धावक जिन्सन जॉनसन (Jinson Johnson) उन कुछ एथलीटों में से एक हैं जिन्हें इस स्थगन की वजह से खुद को पूरी तरह से फिट और बेहतर करने का मौका मिला है।

2018 एशियाई खेलों (2018 Asian Games) के स्वर्ण और रजत पदक विजेता को पिछले साल नवंबर में अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स के कोल्ड क्लिम्स में ट्रेनिंग के दौरान अपने एच्लीस हील टेंडन पर गंभीर चोट लगी थी।

इसकी वजह से उन्हें कई महीनों तक ट्रैक से बाहर रहना पड़ा और इस बात का डर था कि पूरी तरह ठीक होने में कुछ समय लग सकता है और वो टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन इवेंट्स में हिस्सा लेने से चूक जाएंगे।

हालांकि, खेलों में देरी ने उन्हे पूरी तरह से ठीक होने का पर्याप्त समय दिया है और लगातार दूसरे ओलंपिक खेलों में खेलने की उनकी संभावनाओं को भी बढ़ा दिया है। हालांकि भारतीय धावक महामारी के कारण खेलों के स्थगन होने से खुश नहीं हैं।

उन्होंने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “वायरस के कारण ओलंपिक का स्थगन हुआ। इसलिए, मैं यह कभी नहीं कह सकता कि यह एक अच्छी बात थी।”

चोट गलत समय पर लगी और जिन्सन जॉनसन ने माना कि उन्होंने टोक्यो ओलंपिक के लिए टिकट हासिल करने के लिए ज्यादा भाग-दौड़ नहीं की।

उन्होंने कहा, “जून में क्वालिफिकेशन समाप्त होने वाली थी। ये एक ऐसी स्थिति थी जहां मुझे ठीक होने के लिए पर्याप्त समय चाहिए था। इसको लेकर चिंता थी कि मुझे पर्याप्त समय मिल पाएगा भी या नहीं लेकिन मेरे पास कोई और विकल्प भी नहीं था।"

कभी हार न मानने वाला ज़ज़्बा

जिन्सन जॉनसन हमेशा से ही ऐसे एथलीट रहे हैं जो किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं। पिछले साल यूरोपियन इवेंट्स में भारतीय धावक ने अपने बाएं टेंडन में दर्द महसूस किया था।

1500 मीटर स्पेशलिस्ट ने हार नहीं मानी, जहां उन्होंने 3: 35.24 का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया, इस प्रक्रिया में उन्होंने अपने ही एक रिकॉर्ड को तोड़कर बर्लिन में IAAF इवेंट में रजत पदक हासिल किया और विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई किया।

इसके बाद उन्होंने एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (Athletics Federation of India) से अनुरोध किया कि वो कोलोराडो स्प्रिंग्स में उन्हें एक्सट्रीम टेंपरेचर में ट्रेनिंग के लिए भेजें, जहां उन्हें चोट लगी और मुंबई लौटना पड़ा, जहां का गर्म जलवायु उनके रिहैबिलिटेशन के लिए बेहतर था।

बेंगलुरु के स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के कैंप में ट्रेनिंग करके जिन्सन जॉनसन अब धीरे-धीरे अपनी फिटनेस हासिल कर रहे हैं और ऑफ सीज़न ने उन्हें प्रतियोगिताओं के लिए दबाव के बिना उबरने का मौका दे दिया है।

उन्होंने कहा, "हमें नहीं पता कि प्रतियोगिताओं को फिर से कब शुरू किया जाएगा, इसिलिए चीजों को वापस सामान्य करना होगा। मुझे आगे की तैयारियों के लिए कुछ समय मिल गया है।”

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