वर्ल्ड रेफ़ुजी डे को यादगार बनाने के लिए AFC अपने ड्रीम एशिया फ़ाउंडेशन के ज़रिए कर रहा काम

बांग्लादेश और मलेशिया में रोहिंग्या शरणार्थियों की बेहतरी के लिए कॉनफ़ेडरेशन की प्रमुख परियोजनाओं काम कर रही हैं।

ओलंपिक शूटिंग चैंपियन्स भारत के अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) और इटली के निकोलो कैंपरियानी (Niccolo Campriani) की ही तरह अब एशियन फ़ुटबॉल कॉनफ़ेडरेशन (AFC) भी फ़ुटबॉल के ज़रिए रेफ़ुजी तक पहुंचने की कोशिश में अपने ड्रीम एशिया फ़ाउंडेशन के साथ मिलकर काम कर रहा है।

2017 में AFC के ड्रीम एशिया फ़ाउंडेशन की शुरुआत हुई थी और तब से अब तक कॉनफ़ेडरेशन ने क़रीब 37000 रेफ़ुजी की मदद की है। शनिवार को वर्ल्ड रेफ़ुजी डे मनाया जा रहा है।

फ़ाउंडेशन के संस्थापक और AFC के अध्यक्ष शेख़ सलमान बिन इब्राहिम अल ख़लीफ़ा (Shaikh Salman bin Ebrahim Al Khalifa) ने कहा, ‘’वर्ल्ड रेफ़ुजी डे के उपलक्ष्य में ये हमारी ज़िम्मेदारी है कि फ़ुटबॉल के ज़रिए कुछ अच्छा करें और लोगों को जागरूक करने के साथ साथ उनका उत्थान भी कर सकें। फ़ुटबॉल लोगों को प्रेरित कर सकता है, और इसकी पहुंच बहुत दूर तक है।‘’

शूटिंग से संन्यास लेने के बाद अभिनव बिंद्रा अपने पुराने दोस्त और तीन बार के ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट निकोलो कैंपरियानी के साथ मिलकर तीन रेफ़ुजी की मदद कर रहे हैं। जिनके नाम हैं मेहदी (Mahdi), खाउला (Khaoula) और लूना (Luna), ये सभी टोक्यो 2020 के लिए 10 मीटर एयर राइफ़ल में क्वालिफ़ाई भी कर चुके हैं।

कई ज़िंदगियों को नई रोशनी दी

AFC की ड्रीम एशिया फ़ाउंडेशन ने अब तक फ़ुटबॉल के ज़रिए लाखों रेफ़ुजियों की ज़िंदगी बदल दी है। लेबनान, सीरिया, इराक़, जॉर्डन, अफ़ग़ानिस्तान, थाईलैंड, फ़िलिस्तीन, बांग्लादेश और मलेशिया में रह रहे रेफ़ुजी को काफ़ी मदद मिली है।

उनकी एक और प्रमुख परियोजना बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार और मलेशिया में रोहिंग्या शरणार्थियों की बेहतरी की दिशा में काम कर रही है।

AFC की परियोजना कोच एक्रॉस कॉन्टिनेंट्स (COC), यूएनएचसीआर (UNHCR), इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस / रेड क्रिसेंट, जेआरईसी (JREC), फुटबॉल एसोसिएशन ऑफ मलेशिया और अंग्रेजी फुटबॉल एसोसिएशन द्वारा समर्थित है।

शेख़ सलमान ने आगे कहा, ‘’AFC ड्रीम एशिया फाउंडेशन के माध्यम से AFC ने कई शरणार्थियों के जीवन पर प्रभाव डाला है और उनके सहयोगियों के साथ अच्छा काम जारी है।‘’

हर साल 20 जून को, संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और कई अन्य लोग उन शरणार्थियों की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए इवेंट्स की मेज़बानी करते हैं जिन्हें अपने घर से भागने के लिए मजबूर किया गया है।

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