राजमंड डेब्वेक ने ओलंपिक पदक विजेता गगन नारंग और अभिनव बिंद्रा को सराहा

शूटिंग दिग्गज राजमंड डेब्वेक ने अपने करियर ग्राफ और अभिनव बिंद्रा के साथ अपने जुड़ाव के बारे में बात की।

शूटिंग के दिग्गज राजमंड डेब्वेक (Rajmond Debevec) का मानना है कि भारतीय शूटर गगन नारंग (Gagan Narang) के साथ उनकी दोस्ती कोई संयोग मात्र नहीं है तीन बार के ओलंपिक शूटिंग के पदक विजेता और 57 वर्षीय स्लोवेनिया के राजमंड डेब्वेक को लगता है 2012 लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता नारंग के साथ उनका दोस्ती का रिश्ता दिल के करीब है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि, “मैं 2012 ओलंपिक से बहुत पहले गगन से मिला था। मैंने ओलंपिक में उनको आगे बढ़ते हुए देखा और फाइनल में उनको देखना मेरा सौभाग्य था। स्लोवेनिया के शूटर ने ये भी बताया कि भारतीय ओलंपियन के कांस्य जीतने के एक दिन बाद गगन नारंग से उनकी मुलाकात लंदन ओलंपिक के डाइनिंग हॉल में हुई थी और दोनों ने एक घंटे तक बातचीत की थी।

राजमंड डेब्वेक ने कहा "हम समान खेल व्यक्तित्व वाले इंसान हैं और हम हमेशा अपने अनुभव साझा करते हैं," जिन्होंने कुछ साल पहले स्लोवेनिया में पर्यटन स्थानों पर घुमाने के लिए गगन नारंग को ले गए थे।

लंदन 2012 में 50 मीटर राइफल में कांस्य पदक जीतने वाले राजमंड डेवेक ने चार ओलंपिक खेलों में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया था, इससे पहले उन्होंने सिडनी 2000 में 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन में स्वर्ण पदक जीता था।

गगन नारंग की तरह उनकी कहानी भी कुछ हद तक समान थी, जिन्होंने 2004 और 2008 के ओलंपिक में भाग लिया था, बाद में  2012 लंदन ओलंपिक में अपने सपने को पूरा करते हुए ओलंपिक में पदक जीता।

गहरी दोस्ती की वजह से ही डेब्वेक ने पिछले महीने गगन नारंग के इंस्टाग्राम लाइव सत्र में भाग लिया, जहां उन्होंने भारतीय निशानेबाज़ी के विकास की प्रशंसा की और अपने दोस्त की शूटिंग ऐकेडमी के प्रयासों की प्रशंसा की।

अभिनव बिंद्रा के साथ लगाव

जब वो गगन नारंग के साथ एक अच्छी और यादगार बाते कर रहे थे, तभी राजमंड डेब्वेक ने बीजिंग 2008 के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) की बात की और उनकी तारीफ की।

अगर सब कुछ ठीक रहा, तो स्लोवेनियाई महान शूटर भारतीय निशानेबाज़ के इस कड़ी में कुछ भूमिका निभा सकते थे।

राजमंड डेबेक ने खुलासा किया कि, "बहुत से लोग इस कहानी को नहीं जानते हैं, लेकिन मुझे एक बार अभिनव के पिता ने मुझे अभिनव बिंद्रा को ट्रेनिंग देने के लिए अनुरोध मिला।" "लेकिन मैंने वास्तव में कभी भी खुद को कोच के रूप में नहीं देखा, इसलिए मुझे इस प्रस्ताव को अस्वीकार करना पड़ा।

स्लोवेनियाई शूटर ने सराहना करते हुए कहा कि, "उन्होंने अपने क्षेत्र में चीनी निशानेबाजों को हराने और बीजिंग में स्वर्ण जीतने के लिए अपनी शानदार मानसिक ताकत दिखाई।"

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