घर पर अकेले ख़ुद से अभ्यास करना और कैंप में प्रतिस्पर्धा करने में फ़र्क़ है: अभिषेक वर्मा 

भारतीय निशानेबाज का मानना है कि तीन महीने तक चलने वाले लंबे शिविर की वजह से आगामी सीज़न की तैयारी का सबसे अच्छे तरीके से हो जाएगी।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

टोक्यो ओलंपिक में जाने के लिए एक साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में भारतीय पिस्टल शूटर अभिषेक वर्मा (Abhishek Verma) का मानना है कि नई दिल्ली में राष्ट्रीय शूटिंग कैंप आगामी सत्र से पहले फॉर्म में वापस आने का एक शानदार तरीका है।

हालांकि भारतीय निशानेबाजों ने लॉकडाउन के दौरान अपने खेल में शीर्ष पर बने रहने के लिए कुछ ख़ास नहीं किया, लेकिन 31 वर्षीय वर्मा का मानना है कि शिविर में वापसी यह सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका था कि वो टोक्यो खेलों के लिए पूरी तरह तैयार हों

"ये बहुत अलग है”। अभिषेक वर्मा ने ओलंपिक चैनल से कहा, "घर पर, आप अपनी मर्जी के मालिक होते हैं, निगरानी करने वाला कोई नहीं होता है।" 

“आपके पास प्रतिस्पर्धा करने के लिए कोई नहीं होता है आप बिलकुल अकेले होते हैं। ऐसे में अपने आप को प्रेरित करना वास्तव में कठिन होता है। कैंप में रहते हुए, आपके पास ये माहौल होता है, जहां हर कोई एक लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में काम करता है। आप विश्व स्तरीय एथलीटों और प्रशिक्षकों से घिरे होते हैं। इससे खुद को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।”

2020 के सीज़न में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में अपने प्रभावी प्रदर्शन के बाद, भारतीय निशानेबाज़ी दल में आत्मविश्वास लौट आया था। लेकिन कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी ने उनकी योजनाओं में खलल डाला, ये देखना होगा कि क्या वो खोई हुई लय को पुनः प्राप्त कर सकते हैं।

वर्मा ने कहा, “मुझे लगता है कैंप ही वो जगह है जहां उस लय को वापस हासिल किया जा सकता है। अगर ये कैंप केवल तीन-चार सप्ताह के लिए होता, तो हम आते, थोड़ी ट्रेनिंग करते और फिर घर लौट जाते।”

“लेकिन तीन महीने लंबे कैंप के साथ, अब हम खुद को निखार सकते हैं और ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि हम उस लय में हैं। फिर हम नए साल में नए सिरे से शुरुआत करेंगे। ”

22 अक्टूबर को फिर से शुरू होने वाले राष्ट्रीय शूटिंग कैंप ने ओलंपिक के लिए मुख्य ग्रुप को दिवाली के लिए घर जाने से पहले दो सप्ताह के ट्रेनिंग के लिए इकट्ठा किया। नए सीजन की तैयारियों को फिर से शुरू करने के लिए शूटरों को एक हफ्ते के भीतर वापस कैंप में लौटने की उम्मीद है। 

“हम इस पल का बहुत लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। हां, हर कोई अपने घरेलू रेंज में ट्रेनिंग कर रहा था, लेकिन राष्ट्रीय कैंप में ये सब करना एक अलग अनुभव होता है।

“हर बार जब कोई प्रतियोगिता शुरू होने वाली होती है तो हम कैंप में आते हैं और उत्साह और अपने आप को बेहतर बनाने की उत्सुकता भी बढ़ जाती है। ऐसे में कैंप को अच्छी तरह से मैनेज होता है, जिससे हमारे प्रयासों में भी सुधार होता है।"

प्रतिस्पर्धा की कमी से चिंतित हैं अभिषेक वर्मा

अपने खोए हुए फॉर्म को पुनः प्राप्त करना, भारतीय निशानेबाजों के लिए बहुत मुश्किल नहीं है, अभिषेक वर्मा को खेलों से पहले प्रतिस्पर्धी शूटिंग की कमी परेशान करती है।

हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय शूटिंग बॉडी, ISSF, ने भारत, दक्षिण कोरिया और अजरबैजान में तीन विश्व कप कार्यक्रम निर्धारित किए हैं - ओलंपिक से पहले, भारतीय शूटर उससे सावधान हैं, जो समय उन्हें टोक्यो ओलंपिक से पहले अपने खेल को निखारने के लिए मिलेगा। 

उन्होंने कहा, "आप जितना चाहें उतना ट्रेनिंग कर लें, लेकिन जब तक आप प्रतिस्पर्धा नहीं करते हैं, तब तक आप कभी नहीं जानते कि आप कहां खड़े हैं।"

“और जब सीजन अगले साल शुरू होगा, तब भी प्रतियोगिताओं में कमी की उम्मीद है। इससे हमारे खेल के कुछ पहलुओं को सुधारने और सुधार में लगने वाला समय कम हो जाता है, जिसका अहसास हमें प्रतियोगिता में शूटिंग के दौरान होता है।”