भारतीय निशानेबाज़ों ने पूर्णिमा ज़नाने की असामयिक मृत्यु पर शोक व्यक्त किया

राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक और दुनियाभर में अपनी छाप छोड़ने वाली 42 वर्षीय पूर्णिमा को दो साल पहले कैंसर के बारे में पता चला था। सोमवार को उनकी अचानक मृत्यु हो गई।

बीजिंग ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra), जॉयदीप करमाकर (Joydeep Karmakar) सहित भारत के अन्य निशानेबाज़ो ने पूर्व निशानेबाज़ और कोच पूर्णिमा ज़नाने (Pournima Zanane) के निधन पर शोक व्यक्त किया। 42 वर्षीय पूर्णिमा का कैंसर से लंबे समय तक जूझने के बाद सोमवार को निधन हो गया।

उन्होंने आईएसएसएफ विश्व कप, एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप सहित अन्य कई टूर्नामेंट में भी भारत के लिए पदक जीते हैं। इसके अलावा 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में वह राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक हैं।

केरल में नेशनल के दौरान दो साल पहले पूर्णिमा ज़नाने को कैंसर का पता चला था। उसी के बाद इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट फेडरेशन की कोच के तौर पर अपना योगदान दे रही पूर्णिमा को एक लम्बे उपचार से गुजरना पड़ा था।

पूर्व ओलंपियन जॉयदीम करमाकर ने उनके अप्रत्याशित निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्णिमा ने कैंसर के खिलाफ अपनी लड़ाई लगभग जीत ही ली थी।

बीजिंग 2008 के खेलों के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने कहा कि इस निशानेबाज को "बहुत याद किया जाएगा।"

इसके अलावा नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने भी अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए बयान जारी किया।

बयान में कहा गया, “नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज़ और कोच सुश्री पूर्णिमा चिन्मय ज़नाने के बहुत कम उम्र में हुए इस असामयिक निधन पर शोक व्यक्त करता है।”

“सुश्री पूर्णिमा ज़नाने एक एयर राइफल शूटर थीं और उन्होंने पूर्णिमा गवाहने के तौर पर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। अपने करियर के अंत में उन्होंने निशानेबाज़ों को कोचिंग देना भी शुरू कर दिया था और इसके साथ ही वह श्री लंका की टीम की भी कोच रहीं”। 

इस निशानेबाज़ ने पुणे में शिफ्ट होने से पहले मुंबई में अपने करियर की शुरुआत की थी। वह सुमा शिरूर की समकालीन थीं और 2004 की एशियन शूटिंग चैंपियनशिप महिला टीम का हिस्सा रहते हुए उन्होंने रजत पदक जीता था।

अपनी रेलवे टीम के साथी और शिव छत्रपति खेल पुरस्कार विजेता सुमा शिरूर (Suma Shirur) ने भी श्रद्धांजलि दी।

भारत के शूटिंग कोच और मनु भाकर (Manu Bhaker) को सलाह देने वाले जसपाल राणा (Jaspal Rana) ने भी पूर्णिमा ज़नाने की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया। वह भी उनके एक अच्छे साथी थे।

क्या आपको यह आर्टिकल पसंद आया? इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें!