युवा भारतीय निशानेबाज़ों ने बोर्ड परीक्षाओं में लगाया ‘सटीक निशाना’

अनीश भानवाला और शपथ भारद्वाज ने ट्रेनिंग और पढ़ाई में तालमेल बनाते हुए 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 90 फीसदी अंक हासिल किए हैं।

युवा निशानेबाज़ अनीश भानवाला (Anish Bhanwala) और शपथ भारद्वाज (Shapath Bharadwaj) ने 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 90 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं, दोनों की परीक्षाओं के परिणाम सोमवार को घोषित किए गए।

अनीश भानवाला कॉमनवेल्थ गेम्स (2018) में स्वर्ण पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय हैं, उन्होंने सीबीएसई आर्ट्स स्ट्रीम में 89.8 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। यह उपलब्धि उन्होंने तब हासिल की है जब उन्हें परिक्षाओं से महज़ एक महीने पहले ही पढ़ने का समय मिला था।

17 वर्षीय भानवाला ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा, “मैं टूर्नामेंट में हिस्सा लेने में व्यस्त था और मेरी परीक्षाएं मार्च में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप के दौरान होनी थीं। इसलिए मैं शूटिंग रेंज में पहले ट्रेनिंग लेता था और फिर स्कूल जाता था, जहां मेरे शिक्षक मुझे अधिक समय देकर मेरी मदद करते थे।”

युवा भारतीय निशानेबाज़ बस यहीं रुकना नहीं चाहते हैं और वह जल्द ही बैचलर्स ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) में दाखिला लेने की योजना बना रहे हैं।

अनीश भानवाला ने प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) से बात करते हुए कहा, “बीबीए के बाद, मैं एमबीए करना चाहता हूं। एक अच्छे भविष्य के लिए प्रोफेशनल डिग्री होना अच्छा होता है।”

25 मीटर रैपिड पिस्टल में दुनिया में 12वें स्थान पर काबिज़ भारतीय निशानेबाज़ अगले साल टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने की उम्मीद कर रहे हैं।

शपथ भारद्वाज साल 2017 में विश्व कप टीम में शामिल होने वाले सबसे कम उम्र के 15 वर्षीय भारतीय निशानेबाज़ थे। उन्होंने ICSE बोर्ड की 12वीं कक्षा में कॉमर्स स्ट्रीम में 90.25 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।

शपथ भारद्वाज ने 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 90.25 प्रतिशत अंक हासिल किए।
शपथ भारद्वाज ने 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 90.25 प्रतिशत अंक हासिल किए।शपथ भारद्वाज ने 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 90.25 प्रतिशत अंक हासिल किए।

अनीश भानवाला के विपरीत 18 वर्षीय भारद्वाज अपनी बोर्ड परीक्षाओं दौरान पूरी तरह तैयार थे।

मेरठ के इस ट्रैप शूटर ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “11वीं की परीक्षाओं को पास करने के बाद मैंने एक महीने की गर्मियों की छुट्टियों में अकाउंट्स का कोर्स पूरा करने की कोशिश की थी। जब सेशन शुरू हुआ तो मैं किताबों को हर जगह अपने साथ ही ले जाया करता था, टूर्नामेंटों के बीच पढ़ाई करता और ट्रेनिंग के बीच मिलने वाले ब्रेक में भी पढ़ाई करता था।”

2013 में निशानेबाज़ी में अपने कदम रखने वाले भारद्वाज ने एक साल के भीतर ही जूनियर स्टेट डबल ट्रैप चैंपियनशिप जीत ली थी। उसके बाद उन्होंने 14 साल की उम्र में सीनियर भारतीय शूटिंग टीम में अपनी जगह पक्की की।

क्या आपको यह आर्टिकल पसंद आया? इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें!