अभिनव बिंद्रा का मानना है कि भारतीय शूटरों को रोज़ बेहतर होने की है ज़रूरत

ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता अभिनव बिंद्रा कहते हैं कि यह समय की बात है कि भारत भी ओलंपिक गेम्स में व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतना शुरू हो जाएगा।

जब शूटर अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) ने भारत के लिए पहला व्यक्तिगत ओलंपिक गोल्ड मेडल जीता था उस समय भी परिणाम एक ऐसी चीज़ थी जिसने उनके ज़ेहन में सबसे कम अहमियत रखी थी। बीजिंग 2008 में 10 मीटर एयर राइफल वर्ग के दौरान भारतीय शूटर अभिनव बिंद्रा ने यह कारनामा किया था और इस वजह से वे आने वाले पीढ़ी की प्रेरणा भी बन गए।

बिंद्रा ने खेल और कार्य को परिणाम से ऊपर रखा और बताया कि कैसे हर खिलाड़ी को परिणाम का सोचे बिना अपना कार्य पूर्ण मेहनत के साथ करना चहिए।

सोनी स्पोर्ट्स के फेसबुक शो “द मेडल ऑफ़ द ग्लोरी” में इस दिग्गज ने कहा था कि “उस समय मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा, परिणाम चाहे जीत हो या हार। अहम यह है कि हमे रोज़ मेहनत कर रोज़ बेहतर होना चाहिए।”

भारतीय निशानेबाज़ ने आगे कहा कि “हमे बहुत मेहनत करनी चाहिए क्योंकि ओलंपिक में सफलता प्राप्त करना आसान नहीं है। जो कुछ भी हमने 4 सालों में किया होता है परिणाम भी उस हिसाब से मिलता है। तो ऐसे में मेहनत की ओर झोंकना ही महत्वपूर्ण है और खुद को बेहतर करना ही ज़रूरी है।”

बीजिंग 2008 में अभिनव बिंद्रा ने जीता था भारत के लिए पहला ओलंपिक व्यक्तिगत गोल्ड मेडल 
बीजिंग 2008 में अभिनव बिंद्रा ने जीता था भारत के लिए पहला ओलंपिक व्यक्तिगत गोल्ड मेडल बीजिंग 2008 में अभिनव बिंद्रा ने जीता था भारत के लिए पहला ओलंपिक व्यक्तिगत गोल्ड मेडल 

बीजिंग गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने से पहले बिंद्रा ने दो बार ओलंपिक गेम्स में शिरकत की थी। हालांकि कुल 5 ओलंपिक गेम्स में भाग ले चुका यह दिग्गज आज भी बीजिंग में मिली जीत को सबसे ज़्यादा अपने करीब रखता है।

बीजिंग में गोल्ड मेडल बरसों की स्पर्धा के बाद आया

भारतीय शूटर ने आगे कहा “इसमें कोई शंका नहीं है कि गोल्ड मेडल बहुत ख़ास है। यह जीत सालों के अभ्यास और मेहनत के बाद मिलती है। आखिर में मेडल दीवार पर टंगे एक भाग की तरह ही रह जाता है। अगर मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो सोचता हूं कि मैंने क्या सीखा, दुनिया घूमते समय मैंने कितने रिश्ते बनाए। यही सब चीज़ें आपके दिल के करीब रहती हैं और यह यादें कभी मिटती नहीं हैं।”

इस खिलाड़ी ने आगे अलफ़ाज़ साझा करते हुए कहा “ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो खेल के दबाव में टूट न सके। मैं एक इन्सान हूं और मुझमे भी कमियां हैं, और यह एक सच है जिसके साथ में जीता हूं। मेरे लिए स्पर्धा हमेशा मुश्किल रही है।"

भविष्य में भारत जीत सकता है इंडिविजुअल गोल्ड

बीजिंग 2008 में गोल्ड मेडल जीतने के 12 साल बाद भी अभिनव बिंद्रा ओलंपिक गेम्स में व्यक्तिगत गोल्ड जीतने वाले एकलौते भारतीय खिलाड़ी हैं। हालांकि इस शूटर को लगता है कि भारत में कौशल बहुत ज़्यादा है और वे इस आंकडें को बदल सकते हैं।

बिंद्रा ने आगे कहा “यह महज़ समय की बात है कि भारत भी व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने में सफल होगा। बहुत से खिलाड़ी हैं जो बाकी खेलों में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। मेरे हिसाब से समय की बात है कि भारत भी ओलंपिक में गोल्ड जीतेगा।”

अभिनव बिंद्रा ने आगे कहा “भारत में लोग खेल को मज़े के तौर पर चुनते हैं और ऐसा करना समाज के लिए लाभदायक है। इससे स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है और लोगों को मज़ा भी आता है। ऐसा ही चलता रहा तो भारत से भी एलीट सपोर्ट में ज़्यादा लोग जुड़ते रहेंग।"

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