सफलता बिना मेहनत के हासिल नहीं होती: अभिनव बिंद्रा

पूर्व भारतीय शूटर ने सपने को हासिल करने के बाद उसी रूटीन में वापस लौटने के बारे में बात की।

11 अगस्त 2008 को अभिनव बिंद्रा (Abinav Bindra) ने इतिहास रचा था, जब उन्होंने भारत के लिए एक ऐतिहासिक ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने के लिए अपने अंतिम शॉट में लगभग 10.8 का स्कोर किया। यह पहला व्यक्तिगत स्वर्ण था और 1980 के बाद भी भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल।

देश ने भारतीय निशानेबाज़ के इस अविश्वसनिय उपलब्धि का जश्न मनाया, हालांकि उन्हें उपलब्धि के बाद के डर एहसास नहीं हुआ। कोई भी पदक समारोह के बाद उनसे उत्साह में डूबे होने की उम्मीद कर रहा होगा।

हालांकि, इसके तुरंत बाद अभिनव बिंद्रा के लिए सब कुछ सही नहीं लग रहा था। उन्होंने अपने जीवन का एक सपना पूरा किया था और उन्हें नहीं पता था कि खुद को कैसे लगातार प्रेरित रखा जाए।

टाटा समूह के लीडर क्राफ्ट पॉडकास्ट में स्वर्ण पदक विजेता ने कहा, "असफलता को संभालना मुश्किल है, लेकिन कभी-कभी सफलता के बाद ऐसा करना कठिन हो जाता है। मैंने अपने जीवन के 15 साल ओलंपिक स्वर्ण जीतने लिए लगा दिए थे और 25 साल की उम्र में इसे हासिल किया था।

"ऐसा महसूस हुआ कि मेरे जीवन में कुछ भी नहीं था, ये चुनौतीपूर्ण था। मुझे लगा कि मुझे फिर से शुरू करना पड़ा और मुझे प्रेरणा की कमी महसूस हुई।"

2008 ओलंपिक के बाद आत्मनिरीक्षण के लिए जाने वाले अभिनव बिंद्रा ने एथलीटों से खुद को समय देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “आप थोड़ी देर के बाद प्रक्रिया को याद करना शुरू कर देते हैं, और जब तक आप जो करते हैं उससे प्यार करते हैं, तो ये आपको आगे तक ले जाता रहेगा। यही मेरे साथ हुआ। जब आप अपने सपने को पूरा कर लेते हैं तो कई वर्षों तक कड़ी मेहनत करने की जरुरत होती है, इसलिए वापस वो कारनामा करने के लिए आपको अपने आप को समय देना होगा और खुद को प्रोत्साहित करना होगा।"

संन्यास लेने के बाद भी अभिनव बिंद्रा फ़ाउंडेशन के माध्यम से युवा एथलीटों की मदद करने वाले भारतीय महान शूटर ने टोक्यो ओलंपिक स्थगित होने के बाद भी खिलाड़ियों का समर्थन करना जारी रखा है।

आईओसी के एथलीट आयोग के सदस्य ने मार्च में ओलंपिक चैनल से बात करते हुए कहा था, "मेरा मानना है कि केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में एथलीट सबसे अधिक मेहनती होते हैं और वे इस चुनौती को स्वीकार करके इसका सामना करेंगे और अपनी योजनाओं को फिर से पटरी पर लाएंगे।"

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