अभिनव बिंद्रा के रहते कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतना रहा ख़ास: अपूर्वी चंदेला

गोल्ड मेडल विजेता अभिनव बिंद्रा को प्रेरणा मानने वाली अपूर्वी चंदेला अपने ही हीरो से बात करने में झिजक रही थीं।

भारतीय शूटिंग की बात की जाए तो लगभग हर युवा के लिए अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) एक हीरो के समान हैं। बीजिंग में गोल्ड मेडल जीतने के बाद बिंद्रा रातों रात भारत के चहेते बन गए और एक मिसाल भी।

बहुत से युवाओं का सौभाग्य रहा कि बिंद्रा के साथ उन्होंने भारतीय शूटिंग का खेमा संभाला और हर एक पल को स्वर्णिम बना लिया। उन्हीं खिलाड़ियों में से एक खिलाड़ी हैं अपूर्वी चंदेला (Apurvi Chandela)।

एथेंस में सिल्वर मेडल जीतने वाले राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (Rajyavardhan Singh Rathore) के बेटे मानवादित्य सिंह राठौड़ (Manavaditya Rathore) द्वारा होस्टेड इन्स्टाग्राम लाइव शो ‘CollaboNation’ में अपूर्वी ने कहा “मैं लकी थी कि रियो गेम्स में मैं उनके साथ खेली। वो मेरा पहला ओलंपिक गेम था और उनका आखिरी।”

गौरतलब है कि अपूर्वी चंदेला ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारतीय खेमे का हिस्सा थीं। उसी संस्करण के 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में बिंद्रा और अपूर्वी दोनों ने ही व्यक्तिगत गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।

चंदेला ने यादों को ताज़ा करते हुए आगे कहा “वो मेरा पहला बड़ा मेडल था और एक दिन पहले ही बिंद्रा ने भी गोल्ड हासिल किया था। ये दोनों पल मेरे लिए सबसे ख़ास हैं।”

जहां एक तरफ 2008 ओलंपिक गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले अभिनव बिंद्रा अपूर्वी के लिए हीरो बन चुके थे लेकिन जब इनका पहली बार आमना-सामना हुआ तो इस युवा को उनसे बात करने में हिचकिचाहट थी। शो के दौरान उन्होंने आगे कहा “जब मैंने उनको देखा तो मैं बहुत नर्वस हो गई थी और बस मैंने इशारा कर अपने माता को ज़ाहिर किया की वह अभिनव हैं। वे जानते थे कि मैं शर्मिली हूं और मैं अभिनव से खुद बात नहीं कर सकती इसलिए मुझे भी ज़बरदस्ती उनसे मुलाकात कराने के लिए ले गए। उनसे बात करने का अनुभव वाकई बहुत अच्छा था।”

यह अपूर्वी के माता पिता ही थे जब उन्होंने अपनी बेटी को कम उम्र में ही किसी खेल को ख्नेलने के लिए प्रेरित किया था।

रियो के बाद की शानदार वापसी

रियो गेम्स में अपूर्वी का सफ़र निराशाजनक रहा था और 10 मीटर एयर राइफल वर्ग में खेलते हुए उन्होंने अपने कारवां को 34वीं रैंक पर ख़त्म किया। अपूर्वी ने यह भी माना कि गेम्स से पहले इंजरी ने उनकी लय को प्रभावित किया था। 

भारतीय शूटर ने आगे अलफ़ाज़ साझा करते हुए कहा “मैं वैसे भी चुप रहती हूं और उसके बाद मैं और ज़्यादा खामोश रहने लग गई। ओलंपिक गेम्स में अच्छा प्रदर्शन न करने की वजह से मेरा दिल टूट चुका था और मैं उन सभी चीज़ों के बारे में सोच रही थी जिस वजह से मेरा प्रदर्शन ख़ास नहीं रहा”

यह आलम किसी भी खिलाड़ी के लिए ख़राब होता है और उसके मानसिक संतुलन पर फर्क भी पड़ता है। 27 वर्षीय शूटर ने कहा कि “उस समय मेरी माँ ने मेरा साथ दिया और ध्यान रखा कि चीज़ें दोबारा ठीक हो जाए। बात कर अपने दुःख को ज़ाहिर करने वाली प्रक्रिया फायदेमंद थी और ख़ास तौर से उस समय यह बहुत महत्वपूर्ण साबित हुई।”

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