लॉकडाउन में भारतीय शूटरों के पास ड्राई फ़ायरिंग का सहारा, ख़त्म कर रहे ट्रेनिंग का सूखा

लॉकडाउन की वजह से घर पर रह रहे भारतीय शूटरों ने ड्राई फायरिंग का सहारा लिया और अब अपनी तकनीक को और पुख्ता कर रहे हैं।

कोरोना वायरस के प्रकोप ने पूरी दुनिया को रोक दिया है। खेल जगत में भी कोई हलचल नहीं है और ऐसे में भारतीय शूटरों ने ड्राई फायरिंग से अभ्यास करने का फैलसा किया है और वे ज़्यादा से ज़्यादा खेल से जुड़े रहने के प्रयास कर रहे हैं।

यह अभ्यास उनको अपने स्टांस को बेहतर करने, संतुलन बनाने और सांस लेने पर काबू करना सीखाता है और मानसिक तौर पर मज़बूत करने के साथ ही आंखों को भी तेज़ रखता है। अभ्यास ही तो है जो एक खिलाड़ी को महान खिलाड़ी बनाता है। यह जुनून ही तो है जहां पूरा विश्व चार दीवारों में सिमट कर रह गया है लेकिन खिलाड़ी अपने अभ्यास के नए तौर-तरीके ढूंढ रहे हैं।

नहीं भटक रहा ध्यान

शूटर दिव्यांश सिंह पनवर (Divyansh Singh Panwar) अन्य 3 शूटरों के साथ अपने कोच के अपार्टमेंट में रुके हुए हैं। इन सभी खिलाड़ियों का दिन सुबह 5 बजे शुरू होता है और वे करीब 40 मिनट ड्राई ट्रेनिंग से शुरुआत करते हैं।

फर्स्टपोस्ट से बात करते हुए दिव्यांश सिंह पनवर ने बताया कि जब आप शूटिंग रेंज में होते हैं तो आपका ध्यान हमेशा अंक बटोरने पर होता है। जब आप ड्राई शूटिंग करते हैं तो आप अपनी तकनीक पर ध्यान देते हैं। इसलिए मेरा मानना है कि ड्राई शूटिंग एक शूटर के लिए बेहतर है।”

उन्होंने आगे कहा, “इसे दिलचस्प बनाने के लिए हम खुद के प्रदर्शन का आकलन करते हैं। जिसका प्रदर्शन सबसे निराशाजनक होता है उसे बर्तन साफ़ करने होते हैं, ऐसे में मज़ा बना रहता है।”

ओलंपिक कोटा जीतने वालअंजुम मोदगिल (Anjum Moudgil) ने भी ड्राई फाइरिंग को अहम माना है। कॉमनवेल्थ में सिल्वर जीतने वाली इस शूटर ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए कहा, “ड्राई ट्रेनिंग हमारे अभ्यास या ट्रेनिंग का बहुत अहम हिस्सा है। हम लाइव शूटिंग से पहले लगभग 30 से 40 मिनट ड्राई शूटिंग करते हैं। हम जब रेंज पर भी ट्रेनिंग कर रहे होते हैं तब भी हम ड्राई ट्रेनिंग करते हैं। इससे मांसपेशियों पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है।

बीजिंग वर्ल्ड कप में 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीतने की वजह से टोक्यो ओलंपिक गेम्स का कोटा हासिल करने वाले अभिषेक वर्मा फिलहाल अपने घर चंडीगढ़ में हैं और वे गुरुग्राम से लगभग 300 किमी दूर एक गेस्टहाउस में ट्रेनिंग करते हैं।

फर्स्टपोस्ट से बात करते हुए अभिषेक वर्मा ने बताया कि मुझे साल के 365 दिन अभ्यास करना पसंद है लेकिन फिलहाल मैं ड्राई शूटिंग ही कर सकता हूं। मैं घर केवल 2 से 3 दिनों के लिए आया था लेकिन लॉकडाउन के कारण अब मैं निकल नहीं पा रहा हूं।”

जहां इस समय शूटर ड्राई फायरिंग का सहारा लेकर अपने कौशल को बेहतर करने में लगे हैं, वहीं वर्ल्ड नंबर 5 अपूर्वी चंदेला (Apurvi Chandela) के जीवन में ख़ास मुश्किलें नहीं आई हैं।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए अपूर्वी ने कहा, “मेरे घर में ही शूटिंग रेंज है और इस वजह से मुझे अभ्यास में ज़्यादा कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा। फिलहाल केवल यही चीज़ें हैं और ऐसे में मैं अपनी तकनीक और शारीरिक क्षमता पर ध्यान दे रही हूं।

2018 में गोल्ड मेडल जीतने वाली मनु भाकर भी अपने घर में बने शूटिंग रेंज का फायदा उठा रही हैं।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए मनु भाकर (Manu Bhaker) ने बताया, “मैं घर में बने शूटिंग रेंज में अभ्यास कर रही हूं। यह मैनुअल है। इस वजह से मैं बहुत ज़्यादा देर तक इसका प्रयोग नहीं कर सकती। हालांकि पहले यह एक गैलरी थी और दो साल पहले मेरे पिता ने इसे शूटिंग रेंज में बदल दिया और अब मैं घर पर भी अभ्यास कर सकती हूं।

ड्राई शूटिंग के अलावा भारतीय शूटर खुद को मानसिक और शारीरिक तौर से स्वस्थ रखने की कोशिश कर रहे हैं।

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