महामारी का ओलंपिक खेलों पर नहीं पड़ेगा कोई प्रभाव: गगन नारंग

लंदन 2012 ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता का मानना है कि टोक्यो खेलों में पहले की तरह मुक़ाबला देखने को मिलेंगे।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता, गगन नारंग (Gagan Narang) का मानना है कि कोरोना वायरस (COVID -19) के प्रकोप के कारण दुनिया में जो स्थिति पैदा हुई है, वो खेलों के महत्व को प्रभावित नहीं करेगी।

दुनियाभर में महामारी के प्रकोप के कारण मार्च के बाद होने वाले सभी खेलों को स्थगित या रद्द कर दिया गया। महामारी ने खेल जगत के साथ-साथ जीवन में होने वाले कई कार्यों को प्रभावित किया है।  

बुंडेसलीगा - जर्मन फुटबॉल लीग- 16 मई से शुरू होगा लेकिन मैदान में इस लीग को देखने के लिए दर्शक मौजूद नहीं रहेंगे। सामाजिक दूर को बनाए रखने के लिए इस क़दम को उठाने का फैसला किया गया है। आने वाले समय में ओलंपिक किस तरह से खेला जाएगा, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।

जहां टोक्यो खेलों को एक साल के लिए स्थगित कर दिया गया है, ऐसे में पूर्व राइफल शूटर का मानना था कि इस बार खेलों में उतने ही रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे, जितना कि पहले होते थे।

गगन नारंग ने WION न्यूज़ से बात करते हुए कहा, "मैं ये नहीं कहूँगा कि मौजूदा संकट ओलंपिक खेलों के महत्व को कम करेगा क्योंकि ये चार साल में एक बार ही होता है।"

गगन नारंग ने लंदन 2012 में 10 मीटर एयर राइफल में कांस्य पदक अपने नाम किया था।

“दबाव सिर्फ ओलंपिक में प्रदर्शन करने के लिए होगा क्योंकि ये खेलों का शिखर है। वर्तमान में मैं निशानेबाजों को अपने अपने छोटे छोटे लक्ष्यों पर काम करने की सलाह दूँगा, लेकिन अगले साल होने वाले ओलंपिक की हमें पूरी तरह से अनदेखी भी नही करना है।”

सुरक्षित हाथों में हैं भारतीय शूटर्स

देशभर में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए मार्च में किए गए लॉकडाउन की वजह से भारतीय निशानेबाज़ अपने घरों में रहने पर मजबूर हो गए हैं।

इस दौरान कोई प्रतिस्पर्धा भी आयोजित नहीं हो रही हैं, जिससे शूटर बाहर निकल सकें। कई लोग मानते हैं कि ये स्थिति एथलीटों के मानसिक शक्ति पर असर डाल सकती है।

लेकिन चार बार के ओलंपियन का मानना ​​है कि निशानेबाजों को अपने कोच और मेंटर्स द्वारा उनकी अच्छी तरह से देखभाल किया जाना चाहिए।

गगन नारंग का मानना है कि "एक एथलीट हमेशा सकारात्मक होता है, चाहे कोई भी स्थिति हो।" “आपको अपने जीवन में उतार-चढ़ाव से सीखने में सक्षम होना चाहिए।

"एथलीट अपने करियर में कई कठिनाइयों से गुजरते हैं, और ये केवल तभी होता है जब एथलीट सकारात्मक रहते हैं कि वे जीत सकते हैं।"

इस दौरान 37 वर्षीय पूर्व निशानेबाज़ ने ये भी उम्मीद की है कि आने वाले कुछ समय तक कोई भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा नहीं होने वाला है, ऐसे में राष्ट्रीय राइफल एसोसिएशन (NRAI) इस साल अधिकांश समय शूटरों को 2021 सीज़न से पहले फॉर्म में लौटने में मदद करेगी।

गगन नारंग ने उम्मीद जताते हुए कहा कि, "मुझे लगता है कि चुनौतियों के कारण घरेलू प्रतियोगिता को आयोजित करना बहुत कठिन होगा। लेकिन लगभग 20 निशानेबाजों के साथ किसी टूर्नामेंट का आयोजन किया जा सकता है, जो ओलंपिक के लिए टोक्यो जाने वाले हैं। इससे उनकी फॉर्म बरकरार रहेगी।

“लेकिन टूर्नामेंट केवल तभी संभव हो पाएगा, जब लॉकडाउन प्रतिबंधों में ढील दी जाए। अब हम जानते हैं कि हम कहां तक की यात्रा कर सकते हैं, इसलिए घरेलू प्रतियोगिताओं को आयोजित करना भी एक चुनौती हो सकती है।”

गगन नारंग अपनी ऐकेडमी के गन के माध्यम से युवा निशानेबाजों के करियर को आकार देने में लगे हुए हैं, जहां से एयर राइफल निशानेबाज़ एलावेनिल वलारिवन (Elavenil Valarivan) निकल कर सामने आईं हैं।