बीजिंग की हार ही बनी थी भारतीय शूटर गगन नारंग के लिए बड़ी सीख

2008 ओलंपिक गेम्स के बाद गगन नारंग ने लय में वापसी की और लंदन गेम्स में हासिल किया ब्रॉन्ज़ मेडल। 

2004 और 2008 ओलंपिक गेम्स में बहुत क़रीब आने के बाद भारतीय शूटर गगन नारंग Gagan Narang) मेडल जीतने से वंचित रह गए थे। एथेंस 2004 ओलंपिक गेम्स में तो उन्हें केवल एक पॉइंट से हार का मुह देखना पड़ा था। इसके बाद बीजिंग गेम्स में अंतर नाम मात्र का रह गया और गगन को 0.1 अंक से हार स्वीकार करनी पड़ी। मेडल ऑफ़ द ग्लोरी शो में गगन नारंग ने बताया “वह मुश्किल था। मैंने अपने 42वें शॉट में 8.9 अंक बटोरे थे और जिस शूटर ने क्वालिफ़ाई किया था उसके 9 अंक थे। सभी राउंड के अंक को जोड़ने के बाद 600 में मेरा स्कोर 595 था और इस वजह से मैं फाइनल तक नहीं जा पाया। हालांकि 5 और शूटर थे जिनका स्कोर मेरे ही जितना था।”

चेन्नई के इस शूटर ने ISSF वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल हासिल कर अपने होने का प्रमाण दिया था और उसी लय को लेकर वे ओलंपिक गेम्स में भी गए थे। आगे बात करते हुए उन्होंने कहा “में सदमे और डिप्रेशन में था। जब मैं घर लौटा तो मैंने गन को हाथ तक नहीं लगाया था और मैं भावुक हो रहा था। कुछ दिनों तक मैं सो नहीं पाया था और नींद में ही उठ कर बैठ जाता था।”

बीजिंग गेम्स में गगन नारंग फाइनल राउंड में पहुंचने से बहुत कम अंतर से चूके 
बीजिंग गेम्स में गगन नारंग फाइनल राउंड में पहुंचने से बहुत कम अंतर से चूके बीजिंग गेम्स में गगन नारंग फाइनल राउंड में पहुंचने से बहुत कम अंतर से चूके 

इसके बाद गगन के परिवार और कोच ने उनका बखूबी साथ निभाया और कुछ ही समय बाद उन्होंने अपनी लय भी ढूंढ ली। अपनी लय पर भरोसा रखते हुए गगन ने ISSF वर्ल्ड कप फाइनल में 600 का बेहतरीन स्कोर बनाया और कुल 703.5 स्कोर के साथ रिकॉर्ड भी स्थापित किया। बातचीत को बढ़ाते हुए शूटर ने कहा “उस समय मैंने एक भी अंक नहीं छोड़ा और मुझे परफेक्ट स्कोर चाहिए ही था। उस चीज़ ने मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।''

प्रतियोगिता को शांति से शुरू किया

अपने उम्दा खेल को जारी रख गगन ने बेहतरीन फॉर्म के तो संकेत दिए ही थे और साथ ही उन्होंने 2012 ओलंपिक गेम्स में जगह भी बना ली थी। आगे अलफ़ाज़ साझा करते हुए इस शूटर ने कहा “मेरे कोच ने कहा था कि 70-80 प्रतिशत एथलीट अपने पहले ओलंपिक में जीत जाते हैं और मेरे ज़हन में यही चल रहा था। इस चीज़ से मैं नकारात्मक हो गया था।”

हालांकि अपने तीसरे ओलंपिक में खेलते हुए गगन नारंग ने जीतने की तो ठान ही ली थी और उसी संकल्प के साथ आगे चल रहे थे।

2008 ओलंपिक गेम्स में अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) के गोल्ड की वजह से इस बार भी उनसे उम्मीदें बढ़ गई थी लेकिन इस बात का असर गगन पर ज़रा सा भी नहीं हुआ। उन्होंने प्रतियोगिता से पहले 30 मिनट का अभ्यास किया था। उन्होंने आगे कहा “मैंने खुद को कहा था कि मैं अपना मुकाबला तभी शुरू करूंगा जब मैं उस ज़ोन में होऊंगा और शांत होऊंगा। शुरू होने के आधिकारिक समय के 35 मिनट बाद मैंने रिकॉर्ड बटन दबा दिया था।”

क्वालिफाइंग राउंड को आराम से पार करने बाद भी गगन नारंग ने प्रतियोगिता को तीसरे नंबर पर अंत किया था। हालांकि गोल्ड मेडल विजेता से वह केवल एक ही अंक पीछे थे।

भारतीय शूटर गगन ने 701.1 की बदौलत ब्रॉन्ज़ मेडल जीता और इटली के निकोलो कैम्प्रियानी (Niccolo Campriani) के हाथ 701.5 अंकों से सिल्वर मेडल आया। इसी मुकाबले में रोमानिया के एलिन मोल्दोवीनु (Alin George Moldoveanu) 702.1 अंक हासिल गोल गोल्ड मेडल विजेता बने।

2012 ओलंपिक गेम्स में भारत की ओर से गगन नारंग ने पहला मेडल जीता था और इसी संस्करण में भारत ने आगे चल कर 5 मेडल और अपने खेमे में डाले।

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