बिना कोच के भी आप अच्छी ट्रेनिंग कर सकते हैं, बशर्ते खुद पर भरोसा हो: मनु भाकर

बिना कोच के भी मनु करती रहीं ट्रेनिंग, मेहनत रंग लाई और जल्द ही आ गया भारतीय टीम से बुलावा।

भले ही मनु भाकर (Manu Bhakar) चार बार के एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता और द्रोणाचार्य अवार्ड के लिए नामित जसपाल राणा (Jaspal Rana) से ट्रेनिंग ले रही हों, लेकिन इस शूटिंग सनसनी ने बताया कि उनके पास हमेशा ऐसा मार्गदर्शन नहीं होता है।

दरअसल 14 साल की उम्र में स्कूल में शूटिंग शुरू करने के तुरंत बाद मनु भाकर को अपने करियर की शुरुआत में एक महत्वपूर्ण स्पेल सिखाने के लिए कोच के बिना ही छोड़ दिया गया था।

छह बार की ISSF विश्व स्वर्ण पदक विजेता ने पूर्व भारतीय पहलवान संग्राम सिंह (Sangram Singh) के साथ इंस्टाग्राम लाइव सत्र में बताया, ' मैंने पहले स्कूल में ट्रेनिंग शुरू कर दी थी, जहां मेरे कोच अनिल जाखड़ थे, लेकिन उन्होंने कुछ समय बाद स्कूल छोड़ दिया और मुझे एक साल के लिए ऐसे ही छोड़ दिया गया था।

नियमित ट्रेनर के बिना ही 14 साल की उम्र में शूटिंग जारी रखना एक चुनौती थी, लेकिन मनु भाकर ने अपने अभ्यास पर भरोसा रखा।

उन्होंने कहा, "ज्यादातर छात्र कोच के बिना अभ्यास करते हुए परेशान रहते हैं, लेकिन मुझे सभी मूल बातें पता थीं। मुझे पता था कि कैसे शूट करना है, कहां शूट करना है और ट्रिगर कैसे खींचना है। मैंने एक साल तक अपने आप पर कड़ी मेहनत की और खुद को बताती रहती थी कि मैं यह कर सकती हूं।”

2018 यूथ ओलंपिक गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता ने कहा, "मैं वहां के छात्रों के साथ स्कूल में हर दिन धीरे-धीरे ट्रेनिंग करती रही और मुझे पता चला कि मुझे भारतीय टीम में चुना गया है।"

हालांकि मनु भाकर ने जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शूटिंग शुरू कर दी थी, लेकिन 18 साल की इस प्रतिभावान खिलाड़ी ने बताया कि उस समय भी उनके पास कोई पर्सनल कोच नहीं था।

हालांकि, हरियाणा की निशानेबाज़ अपनी प्रतिभा और जूनियर शूटिंग टीम के कोच की थोड़ी मदद से उन्होंने टीम में लाजवाब प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।

"जब भी मुझे समस्या होती थी, मैं जूनियर टीम के कोच को फोन करती थी।"

मनु भाकर की प्रतिभा की पहली बार झलक तब देखने को मिली, जब वो केवल 15 साल की थीं और 2017 एशियन जूनियर चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था।

मनु ने इसके बाद राष्ट्रीय खेलों में अनुभवी भारतीय शूटर हीना सिद्धू (Heena Sidhu) के खिलाफ जीत हासिल की। उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

मनु ने आगे कहा, "मैं एक बात कहना चाहूंगी। ऐसा नहीं है कि आपके पास कोच न हो तो आप अच्छे से ट्रेनिंग नहीं कर सकते हैं। अगर आपके पास कोच नहीं है तो आपको कभी निराश नहीं होना चाहिए। यदि आप

कोशिश करते हैं, तो आपको भी पता चल जाएगा कि आप सफल हो सकते हैं।”

बिना भटके कैसे करें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

हाल ही में अपने ही देश के सौरभ चौधरी (Saurabh Chaudhary), अभिषेक वर्मा (Abhishek Verma) और एलावेनिल वलारिवन (Elavenil Valarivan) के साथ अर्जुन पुरस्कार के लिए नामांकित होने वाली मनु भाकर ने भी ओलंपिक के लिए अपनी तैयारियों के बारे में बताया।

इस सनसनी शूटर ने खुलासा किया कि उनका ज्यादातर ट्रेनिंग अब मानसिक पहलुओं को मजबूत करने पर आधारित है।

मनु भाकर ने कहा, मेरा फोकस अब इस बात पर है कि मैं बिना भटके कैसे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूं, क्योंकि अभी कोई इवेंट नहीं है।"

कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता को टूर्नामेंट के दौरान काफी हद तक संगीत उनको ध्यान केंद्रत करने में मदद करता है।

“मैं प्रतियोगिताओं के दौरान लगभग हर समय संगीत सुनती हूं। ये मुझे अपने विरोधियों के स्कोर से विचलित होने से बचाता है।”

मनु भाकर ने अंत में कहा, "प्रतियोगिताओं के दौरान मेरा पूरा ध्यान खुद पर रहता है और मैं अपने खेल का लगातार विश्लेषण करती रहती हूं।"

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