सुमा शिरूर चाहती हैं कि भारतीय निशानेबाज़ शारीरिक फिटनेस पर करें काम

2004 के एथेंस ओलंपियन ने अपने वार्डों से आग्रह किया कि वह अपने शारीरिक और मानसिक फिटनेस पर काम करें।

कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के चलते पूरा देश लॉकडाउन में है। ऐसे में भारतीय निशानेबाज़ अपने आप को फिट रखने और आने वाले सीज़न के लिए खुद को तैयार करने में व्यस्त हैं। पिस्टल की शीर्ष शूटर मनु भाकर (Manu Bhaker) अपने घर में एक मैनुअल रेंज में प्रैक्टिस कर रही हैं। राइफल शूटर दिव्यांष सिंह पंवार (Divyansh Singh Panwar) इस समय ड्राई फायरिंग और महाभारत जैसी पौराणिक कथाओं के साथ अपना समय बिता रहे हैं।

घर के अंदर एक रेंज बनाकर प्रैक्टिस करना काफी मुश्किल है। ऐसे में भारत की जूनियर राष्ट्रीय कोच सुमा शिरूर (Suma Shirur) चाहती हैं कि देश के सभी ओलंपिक खिलाड़ी खेल के भौतिक पहलू पर काम करने के लिए अपने अधिकांश समय का इस्तेमाल करें।

खुद को रखें तैयार

स्पोर्टस्टार से बात करते हुए 2004 की एथेंस ओलंपियन ने कहा कि वह चाहती हैं कि सभी शूटर अपनी मानसिक और शारीरिक फिटनेस पर काम करें, ताकि स्थिति सामान्य होने के बाद वे रेंज में शानदार प्रदर्शन करने के लिए तैयार रहें।

भारतीय जूनियर कोच सुमा शिरूर ने निशानेबाज़ों से खुद को तैयार रखने का आग्रह किया। फोटो: ISSF
भारतीय जूनियर कोच सुमा शिरूर ने निशानेबाज़ों से खुद को तैयार रखने का आग्रह किया। फोटो: ISSFभारतीय जूनियर कोच सुमा शिरूर ने निशानेबाज़ों से खुद को तैयार रखने का आग्रह किया। फोटो: ISSF

उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि जब निशानेबाज़ घर पर ‘वॉल ड्रिल’ जैसी प्रैक्टिस करने में बेहतर होते हैं, तो वे वास्तविक शूटिंग में मानसिक तौर पर और अधिक मज़बूत होते हैं”।

सुमा शिरूर ने कहा कि निशानेबाज़ों को ‘वॉल ड्रिल’ जैसे अभ्यास पर अधिक समय देना चाहिए। यह निशानेबाज़ में जरूरी तकनीक को बेहतर करने में मदद करता है और किसी के पॉश्चर (मुद्रा) को भी अच्छा करता है।

इस तकनीक में एक शूटर दीवार में एक निशान लगाकर उसपर अपने हथियार से निशाना लगाता है, फिर धीरे-धीरे उस बिंदु की ओर आगे बढ़ता है और करीब जाकर निशाना लगाता है। दुनियाभर के निशानेबाज़ इस तकनीक का इस्तेमाल अपने स्टांस और अपने हाथ का संतुलन बढ़ाने के लिए करते हैं।

उन्होंने कहा, "सामान्य दिनों में भी हम 45 मिनट तक वॉल होल्डिंग करते हैं। यह किसी शूटर को अंदर से बहुत मज़बूत बनाता है। सेल्फ-आइसोलेशन की यह अवधि समाप्त होने के बाद जब एक बार फिर शूटिंग रेंज में निशानेबाज़ उतरेंगे तो उन्हें 8 से 10 दिन अपनी फॉर्म में वापस लौटने में लगेगा।”

अपनी बात को आगे जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि आपका तकनीकि कौशल तो वापस लौट सकता है, लेकिन खुद को शारीरिक और मानसिक तौर पर तैयार रखना बहुत महत्वपूर्ण है।

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